<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>ComplaintResolution &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/complaintresolution/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Thu, 11 Jun 2026 09:02:16 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>ComplaintResolution &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>इंदौर में राजस्व विभाग की CM Helpline पर गिरता प्रदर्शन, शिकायत निपटारे में सुस्ती से बढ़ी चिंता</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-cm-helpline-pendency-rises-as-over-950/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:02:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[#RevenueDepartment]]></category>
		<category><![CDATA[CMHelpline]]></category>
		<category><![CDATA[ComplaintResolution]]></category>
		<category><![CDATA[Indore]]></category>
		<category><![CDATA[IndoreNews]]></category>
		<category><![CDATA[MadhyaPradesh]]></category>
		<category><![CDATA[PublicGrievance]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=327495</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर में राजस्व विभाग की CM Helpline पर गिरता प्रदर्शन, शिकायत निपटारे में सुस्ती से बढ़ी चिंता इंदौर इंदौर जिले के राजस्व विभाग में CM Helpline से जुड़ी शिकायतों के ... <a title="इंदौर में राजस्व विभाग की CM Helpline पर गिरता प्रदर्शन, शिकायत निपटारे में सुस्ती से बढ़ी चिंता" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-cm-helpline-pendency-rises-as-over-950/" aria-label="Read more about इंदौर में राजस्व विभाग की CM Helpline पर गिरता प्रदर्शन, शिकायत निपटारे में सुस्ती से बढ़ी चिंता">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>इंदौर में राजस्व विभाग की CM Helpline पर गिरता प्रदर्शन, शिकायत निपटारे में सुस्ती से बढ़ी चिंता</strong></h1>
<h2>इंदौर</h2>
<p>इंदौर जिले के राजस्व विभाग में CM Helpline से जुड़ी शिकायतों के निराकरण की गति में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कभी अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब प्रशासनिक सुस्ती के कारण रैंकिंग में लगातार नीचे खिसकता जा रहा है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p>अप्रैल महीने में इंदौर जहां 13वें स्थान पर था, वहीं मई में यह सीधे 30वें स्थान पर पहुंच गया। यह गिरावट न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि शिकायतों के समाधान में गंभीरता की कमी बनी हुई है। प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई न होने से लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है, लेकिन वर्तमान स्थिति इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही है। विभागीय अधिकारियों की धीमी कार्यप्रणाली और नॉन-अटेंडेड शिकायतों की मौजूदगी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।</p>
<h2><strong>समीक्षा बैठक में सामने आई वास्तविक स्थिति</strong></h2>
<p>कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा तीन जून को आयोजित राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सामने आया कि मई महीने में राजस्व विभाग केवल 13 प्रतिशत शिकायतों का ही निराकरण कर पाया।</p>
<p>इसके अलावा लगभग 10 प्रतिशत शिकायतें ऐसी थीं, जिन पर कोई कार्रवाई ही नहीं की गई और वे नॉन-अटेंडेड श्रेणी में पड़ी रहीं। यह स्थिति विभागीय जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।</p>
<p>कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।</p>
<h2><strong>शिकायतों के आंकड़े बेहद चिंताजनक</strong></h2>
<p>मई माह में राजस्व न्यायालयों से जुड़ी कुल 1210 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इनमें से बहुत कम मामलों का ही समाधान हो पाया।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार:</p>
<ul>
<li>केवल 13 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण किया गया</li>
<li>50 दिन से अधिक लंबित 957 शिकायतें अब भी पेंडिंग हैं</li>
<li>इनमें से मात्र 10.56 प्रतिशत मामलों का ही निपटारा हो सका</li>
</ul>
<p>इसके विपरीत अप्रैल माह में स्थिति काफी बेहतर थी, जब 801 शिकायतों में से 54.46 प्रतिशत मामलों का संतोषजनक समाधान किया गया था। इस तरह एक महीने के भीतर ही प्रदर्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<h2><strong>प्रमुख शिकायतों की श्रेणियां और समस्या की जड़</strong></h2>
<p>राजस्व विभाग में लंबित शिकायतों की श्रेणियों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि समस्या कई स्तरों पर फैली हुई है।</p>
<ul>
<li>416 शिकायतें खसरा ऑनलाइन अपडेट न होने से जुड़ी हैं</li>
<li>306 शिकायतें अवैध कब्जे और अतिक्रमण से संबंधित हैं</li>
<li>247 शिकायतें नामांतरण और बंटवारे (बटांकन) की प्रक्रिया में अटकी हैं</li>
<li>147 शिकायतें शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से जुड़ी हैं</li>
<li>140 मामले सीमांकन (नाप-जोख) से संबंधित लंबित हैं</li>
<li>103 शिकायतें सम्मान निधि भुगतान न होने से जुड़ी हैं</li>
</ul>
<p>इन मामलों से स्पष्ट है कि भूमि रिकॉर्ड, राजस्व न्यायालय और ऑनलाइन सिस्टम तीनों स्तरों पर गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं।</p>
<h2><strong>सीमांकन और भूमि विवादों से बढ़ रही जनता की परेशानी</strong></h2>
<p>सीमांकन और भूमि माप-जोख से जुड़े मामलों में देरी के कारण किसानों और आम नागरिकों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। जमीन की नाप-जोख समय पर न होने से विवाद बढ़ रहे हैं और कई जगह स्थिति तनावपूर्ण हो रही है।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बार-बार तहसीलों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।</p>
<h2><strong>तहसीलवार प्रदर्शन में बड़ा अंतर</strong></h2>
<p>सीएम हेल्पलाइन के तहत शिकायतों के निराकरण में तहसीलवार प्रदर्शन में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है, जो प्रशासनिक असमानता को दर्शाता है।</p>
<ul>
<li>मल्हारगंज: 24.38 प्रतिशत (सबसे बेहतर प्रदर्शन)</li>
<li>राऊ: 21.86 प्रतिशत</li>
<li>महू: 14.31 प्रतिशत</li>
<li>भिचौली हप्सी: 13.04 प्रतिशत</li>
<li>हातोद: 13.33 प्रतिशत</li>
<li>जूनी इंदौर: मात्र 2.95 प्रतिशत (सबसे खराब स्थिति)</li>
</ul>
<p>अन्य क्षेत्रों में भी शिकायत निपटान दर 10 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है।</p>
<h2><strong>लंबित मामलों का बढ़ता बोझ</strong></h2>
<p>राजस्व विभाग पर लंबित शिकायतों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जो प्रशासनिक क्षमता पर दबाव डाल रहा है।</p>
<ul>
<li>650 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय से लंबित हैं</li>
<li>319 शिकायतें 200 दिन से अधिक समय से लंबित हैं</li>
<li>71 शिकायतें 500 दिन से अधिक समय से लंबित हैं</li>
</ul>
<p>इन आंकड़ों से साफ है कि कई मामले लंबे समय से अनसुलझे पड़े हैं, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।</p>
<h2><strong>प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही पर सवाल</strong></h2>
<p>एक महीने के भीतर प्रदर्शन में आई इतनी बड़ी गिरावट ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां सीएम हेल्पलाइन को जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाया गया था, वहीं जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव कमजोर पड़ता दिख रहा है।</p>
<p>नॉन-अटेंडेड शिकायतों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि कुछ मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं है।</p>
<h2><strong>सुधार के प्रयास और चुनौतियां</strong></h2>
<p>कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा लगातार अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।</p>
<p>मुख्य चुनौतियों में शामिल हैं:</p>
<ul>
<li>स्टाफ की कार्यक्षमता में कमी</li>
<li>डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट में देरी</li>
<li>लंबित मामलों का अत्यधिक दबाव</li>
<li>विभागीय समन्वय की कमी</li>
</ul>
<p>इन कारणों से शिकायतों का निपटारा प्रभावित हो रहा है।</p>
<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>
<p>इंदौर जिले का सीएम हेल्पलाइन प्रदर्शन में गिरावट प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चेतावनी संकेत है। लंबित शिकायतों का बढ़ता बोझ और समाधान की धीमी गति आम जनता के विश्वास को प्रभावित कर रही है।</p>
<p>यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब आवश्यकता है कि विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय कर शिकायत निपटारे की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि जनता को वास्तविक राहत मिल सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
