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	<title>CJI Surya Kant Says Supreme Court Doors Are Open to All &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>CJI सूर्यकांत बोले—‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’, INDIA गठबंधन के नेताओं से नहीं मिले — दैनिक स्वराज वाणी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2026 07:30:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[CJI सूर्यकांत बोले—‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’, INDIA गठबंधन के नेताओं से नहीं मिले — दैनिक स्वराज वाणी मुलाकात के अनुरोध पर CJI ने भेजा जवाब भारत ... <a title="CJI सूर्यकांत बोले—‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’, INDIA गठबंधन के नेताओं से नहीं मिले — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/cji-surya-kant-says-supreme-court-doors-are-open-to-all-declines-meeting-with-india-bloc/" aria-label="Read more about CJI सूर्यकांत बोले—‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’, INDIA गठबंधन के नेताओं से नहीं मिले — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>CJI सूर्यकांत बोले—‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’, INDIA गठबंधन के नेताओं से नहीं मिले — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<h3><strong>मुलाकात के अनुरोध पर CJI ने भेजा जवाब</strong></h3>
<p>भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA गठबंधन के नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित ‘वोट चोरी’ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ज्ञापन देने के लिए मुलाकात का समय मांगा था। सोमवार, 12 अक्टूबर को CJI ने कहा कि उन्हें एक दिन पहले मुलाकात के अनुरोध वाला पत्र मिला था और उन्होंने रात में ही जवाब भेज दिया था। उन्होंने कहा कि जवाब में मुलाकात न कर पाने के कारण बताए गए हैं।</p>
<p>मीडिया से बातचीत में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि याचिका के जरिए अदालत का रुख कर सकता है। अदालत कानून के अनुसार संबंधित पक्षों की बात सुनेगी और जो राहत नियमों के तहत देय होगी, उस पर विचार करेगी।</p>
<h3><strong>विपक्षी नेताओं ने मांगा था मिलने का समय</strong></h3>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI से मुलाकात का अनुरोध किया था। रिपोर्टों के अनुसार, वे 12 अक्टूबर को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। ज्ञापन में कथित चुनावी अनियमितताओं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, SIR प्रक्रिया रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दे उठाए जाने थे</p>
<p>राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के नेताओं और अन्य समूहों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की घोषणा भी की थी। विपक्ष का कहना था कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को अदालत के सामने रखना चाहता है। इस बीच दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर कई क्षेत्रों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रतिबंध लगाए गए थे।</p>
<h3><strong>लंबित मामलों को लेकर बताई गई वजह</strong></h3>
<p>बैठक से इनकार के बारे में आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता था, उनसे जुड़े मामले अदालत में पहले से विचाराधीन हैं। CJI के जवाब के बारे में सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबरों में कहा गया कि ऐसे विषयों को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक स्तर पर उठाने के बजाय याचिका के माध्यम से अदालत के सामने रखा जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में इसे न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के बीच संस्थागत दूरी तथा सत्ता के पृथक्करण के सिद्धांत से भी जोड़ा गया है।</p>
<p>हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को अपने और विपक्षी नेताओं के बीच हुए पत्राचार की गोपनीयता का हवाला देते हुए जवाब के विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए। इसलिए मुलाकात से इनकार के संबंध में विस्तार से प्रकाशित कारणों को मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से बताया गया है। CJI की सार्वजनिक टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि किसी पक्ष को अदालत तक पहुंचने से रोका नहीं गया है; संबंधित पक्ष कानूनी प्रक्रिया अपनाकर याचिका दायर कर सकते हैं।</p>
<h3><strong>अदालत में याचिका के जरिए रख सकते हैं पक्ष</strong></h3>
<p>CJI के बयान के बाद यह स्पष्ट किया गया कि अदालत का दरवाजा केवल राजनीतिक दलों या नेताओं के लिए नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए खुला है। किसी मुद्दे पर राहत मांगने के लिए पक्षकारों को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है। याचिका दाखिल होने पर अदालत मामले, उपलब्ध दस्तावेजों और कानून के आधार पर सुनवाई करती है।</p>
<p>मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल का पक्ष अलग है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया का बचाव किया है और कहा है कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे हों, वे दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। ऐसे में विवाद से जुड़े आरोपों और जवाबों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक सुनवाई या संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।</p>
<p>जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मतदाता सूची और SIR को लेकर राजनीतिक विरोध जारी है। CJI ने विपक्षी नेताओं से अलग बैठक नहीं की, लेकिन कहा कि आम नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि याचिका के जरिए अदालत जा सकते हैं और उनके मामलों पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।</p>
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