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	<title>Child Rights &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का आस संस्था ने किया स्वागत</title>
		<link>https://swarajvani.com/organisation-welcomes-supreme-courts-directions-on-minors-safety-on-social-media/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 10:42:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[AlirajPur]]></category>
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					<description><![CDATA[नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का आस संस्था ने किया स्वागत जानकारी: मनीषा बागोले, जिला समन्वयक, आस संस्था, अलीराजपुर अलीराजपुर। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए ... <a title="नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का आस संस्था ने किया स्वागत" class="read-more" href="https://swarajvani.com/organisation-welcomes-supreme-courts-directions-on-minors-safety-on-social-media/" aria-label="Read more about नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का आस संस्था ने किया स्वागत">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का आस संस्था ने किया स्वागत</strong></h1>
<p><strong>जानकारी: मनीषा बागोले, जिला समन्वयक, आस संस्था, अलीराजपुर<br />
</strong><br />
<strong>अलीराजपुर।</strong> बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर अभियान चला रही आस संस्था ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की सुरक्षा से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का स्वागत किया है। संस्था द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे वैधानिक नियम बनाने की संभावना पर विचार करने को कहा है, जिनके तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन अनिवार्य हो।</p>
<p>आस संस्था का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल सेवाओं की कार्यप्रणाली में आवश्यक सुरक्षा उपाय शामिल किए जाने चाहिए। संस्था ने इस कदम को बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।</p>
<h3><strong>जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की याचिका पर सुनवाई</strong></h3>
<p>संस्था की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें मांग की गई कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को नाबालिगों की कानूनी स्थिति ध्यान में रखते हुए अपनी सेवाओं में सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए जाएं।</p>
<p>याचिका में नाबालिगों की स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने की कानूनी क्षमता का प्रश्न उठाया गया। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन सेवाओं तक बच्चों की पहुंच और प्लेटफॉर्म की उपयोग संबंधी शर्तों में इस पहलू की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल सामान्य उपयोगकर्ता नियम पर्याप्त मानने के बजाय विशेष व्यवस्था की जरूरत बताई गई है।</p>
<h3><strong>भारतीय कानून के अनुरूप हों डिजिटल प्लेटफॉर्म</strong></h3>
<p>प्रेस विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन को भारतीय कानून के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। अदालत ने केंद्र से इस विषय को इंटरमीडियरी नियमों के ढांचे में शामिल करने की संभावना पर विचार करने को कहा।</p>
<p>संस्था के मुताबिक, सुनवाई के दौरान यह बात सामने रखी गई कि प्लेटफॉर्म का सॉफ्टवेयर और संचालन व्यवस्था भारतीय कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। इसका उद्देश्य डिजिटल सेवाओं में नाबालिगों से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, दिए गए विवरण में किसी नए नियम की अधिसूचना जारी होने का उल्लेख नहीं है।</p>
<h3><strong>स्वतंत्र अनुबंध के लिए आयु सीमा का मुद्दा</strong></h3>
<p>आस संस्था द्वारा दी गई जानकारी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु का पालन सुनिश्चित करने का मुद्दा उठाया गया है। यह विषय नाबालिगों की कानूनी क्षमता और ऑनलाइन सेवाओं की शर्तों से जुड़ा है।</p>
<p>इसे सभी नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट तत्काल बंद करने के आदेश के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। उपलब्ध विवरण में ऐसा प्रतिबंध लगाने की जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को संबंधित नियमों और सुरक्षा व्यवस्था पर विचार करने के लिए कहा गया है। आगे की व्यवस्था आधिकारिक निर्णय और नियमों से स्पष्ट होगी।</p>
<h3><strong>ऑनलाइन खतरों से बच्चों की सुरक्षा जरूरी</strong></h3>
<p>आस के निदेशक वसीम इक़बाल ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा भारतीय कानूनों का पालन जरूरी है। उन्होंने ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने मौजूद विभिन्न खतरों की ओर ध्यान दिलाया।</p>
<p>उनके अनुसार, बच्चों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण, मानव तस्करी और सेक्सटॉर्शन का शिकार बनाए जाने का जोखिम रहता है। निजी डेटा का दुरुपयोग और साइबर बुलिंग भी चिंता के विषय हैं। इक़बाल ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय होने और प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू होने से बच्चों को ऑनलाइन शोषण से बचाने में मदद मिल सकती है।</p>
<h3><strong>केंद्र ने विषय की जांच करने की बात कही</strong></h3>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-362525 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/fgdgdf-300x153.jpg" alt="fgdgdf" width="488" height="249" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/fgdgdf-300x153.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/fgdgdf-1024x521.jpg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/fgdgdf-768x390.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/fgdgdf.jpg 1312w" sizes="(max-width: 488px) 100vw, 488px" /><span style="font-size: inherit;">संस्था के प्रेस विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान केंद्र का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की जांच करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी। इससे संबंधित नियमों और उनके क्रियान्वयन की व्यवस्था पर आगे विचार होने की जानकारी दी गई है।</span></p>
<p>अभी उपलब्ध सामग्री में नियम लागू करने की निश्चित तारीख, आयु सत्यापन की तकनीक अथवा प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नई प्रक्रिया का विवरण नहीं है। इसलिए किसी खास व्यवस्था के लागू हो जाने का दावा नहीं किया जा सकता।</p>
<h3><strong>बाल अधिकार अभियान से जुड़ी है आस संस्था</strong></h3>
<p>आस संस्था जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सहयोगी संस्था है। संगठन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के 782 जिलों में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अभियान चला रहा है।</p>
<p>अलीराजपुर में जिला समन्वयक मनीषा बागोले ने संस्था की ओर से यह जानकारी उपलब्ध कराई। आस ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को बाल अधिकार संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कानूनों के प्रभावी पालन की जरूरत पर जोर दिया है। संस्था का कहना है कि ऑनलाइन सेवाओं में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।</p>
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		<title>बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक पहचान, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस</title>
		<link>https://swarajvani.com/un-declares-november-27-as-international-day-against-child-early-and-forced-marriage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 13:36:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Bal Vivah Mukt Bharat]]></category>
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		<category><![CDATA[Child Early and Forced Marriage]]></category>
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					<description><![CDATA[बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक पहचान, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बाल, कम उम्र और जबरन विवाह ... <a title="बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक पहचान, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस" class="read-more" href="https://swarajvani.com/un-declares-november-27-as-international-day-against-child-early-and-forced-marriage/" aria-label="Read more about बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक पहचान, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक पहचान, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया अंतरराष्ट्रीय दिवस</strong></h1>
<h2><strong>संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए प्रस्ताव अपनाया; भारत ने किया सह-प्रायोजन</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> बाल विवाह के खिलाफ दुनियाभर में चल रही लड़ाई को नई मजबूती मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 27 नवंबर को <strong>‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’</strong> के रूप में मनाने की घोषणा की है। संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची में अब 27 नवंबर को इस अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में शामिल कर लिया गया है। भारत के लिए यह तारीख इसलिए भी विशेष है, क्योंकि केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 को ही राष्ट्रीय स्तर पर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में <strong>A/80/L.99</strong> शीर्षक से प्रस्तुत प्रस्ताव को 4 सितंबर 2026 को अपनाया गया। प्रस्ताव को सिएरा लियोन ने महासभा के सामने रखा था और भारत इसके सह-प्रायोजक देशों में शामिल रहा। इस निर्णय का उद्देश्य बाल विवाह के खिलाफ राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत करना, जागरूकता बढ़ाना, कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करना और लड़कियों की शिक्षा एवं सशक्तिकरण में निवेश बढ़ाना है। <a href="https://press.un.org/en/2026/ga12779.doc.htm" rel="nofollow noopener" target="_blank">संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक घोषणा</a></p>
<h2><strong>27 नवंबर की तारीख भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?</strong></h2>
<p>केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का शुभारंभ किया था। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस राष्ट्रीय अभियान और उससे जुड़े पोर्टल को लॉन्च किया था। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे थे।</p>
<p>इस अभियान का उद्देश्य सरकारी विभागों, नागरिक समाज, पंचायतों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी से देश को बाल विवाह मुक्त बनाना है। अभियान के तहत लोगों को बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाने, संभावित मामलों की समय रहते सूचना देने और जोखिम में मौजूद लड़कियों को शिक्षा एवं कौशल विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया।</p>
<p>भारत सरकार के आधिकारिक बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल के अनुसार, अभियान को ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण से संचालित किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसी तारीख को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने से भारत के राष्ट्रीय अभियान को प्रतीकात्मक वैश्विक पहचान मिली है। <a href="https://stopchildmarriage.wcd.gov.in/campaign" rel="nofollow noopener" target="_blank">बाल विवाह मुक्त भारत अभियान</a></p>
<h2><strong>जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की पहल को मिली मजबूती</strong></h2>
<p>बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले वैश्विक नेटवर्क <strong>जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC)</strong> के संस्थापक और बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने बाल विवाह के उन्मूलन के लिए एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग उठाई थी।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान भुवन ऋभु ने वैश्विक नेताओं के सामने इस प्रस्ताव की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक निर्धारित दिन होने से सरकारों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को हर वर्ष अपनी प्रगति की समीक्षा करने तथा नए संकल्प लेने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>उनकी इस मांग को विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और बाल अधिकार समर्थकों का सहयोग मिला। हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबंधित प्रस्ताव औपचारिक रूप से सिएरा लियोन द्वारा प्रस्तुत किया गया, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने इसके समर्थन में जागरूकता और वैश्विक पैरवी करने की भूमिका निभाई।</p>
<h2><strong>हर वर्ष 27 नवंबर को होंगे जागरूकता कार्यक्रम</strong></h2>
<p>संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के बाद अब हर वर्ष 27 नवंबर को सदस्य देश बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह के खिलाफ जागरूकता गतिविधियां आयोजित कर सकेंगे। इस दिन सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और समुदायों से विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की अपेक्षा की जाएगी।</p>
<p>इन गतिविधियों में जनजागरूकता अभियान, कानूनी अधिकारों की जानकारी, बालिकाओं की शिक्षा पर कार्यक्रम, सामुदायिक संवाद, शपथ ग्रहण, कार्यशालाएं और बाल विवाह से प्रभावित लोगों की आवाज को मंच देना शामिल हो सकता है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करते हुए बताया गया कि एक अंतरराष्ट्रीय दिवस अपने आप बाल विवाह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन यह राजनीतिक प्रतिबद्धता, जवाबदेही, कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन और लड़कियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला वैश्विक मंच बन सकता है। <a href="https://transcripts.un.org/en/ga/80/114" rel="nofollow noopener" target="_blank">संयुक्त राष्ट्र महासभा का आधिकारिक विवरण</a></p>
<h2><strong>लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ता है गंभीर प्रभाव</strong></h2>
<p>बाल विवाह को केवल सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाता है। कम उम्र में विवाह होने से लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा बढ़ जाता है। शिक्षा पूरी नहीं होने के कारण उनके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और बेहतर रोजगार प्राप्त करने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।</p>
<p>कम उम्र में गर्भधारण से किशोरियों के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम हो सकता है। इसके साथ ही घरेलू हिंसा, कुपोषण, सामाजिक अलगाव और निर्णय लेने की स्वतंत्रता में कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में बाल विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है।</p>
<p>बाल विवाह समाप्त करने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता। इसके लिए बालिकाओं की शिक्षा, परिवारों की आर्थिक स्थिति, जन्म पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा, सामुदायिक जागरूकता और शिकायत तंत्र को भी मजबूत करना आवश्यक है।</p>
<h2><strong>भारत में बाल विवाह रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था</strong></h2>
<p>भारत में बाल विवाह रोकने के लिए <strong>बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006</strong> लागू है। कानून के तहत निर्धारित आयु से पहले विवाह करना, कराना या इसमें सहयोग करना दंडनीय हो सकता है। बाल विवाह की सूचना संबंधित प्रशासन, पुलिस, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन को दी जा सकती है।</p>
<p>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, संकट में मौजूद बच्चों और बाल विवाह से संबंधित मामलों की सूचना 24 घंटे संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर <strong>1098</strong> पर दी जा सकती है। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन सेवा 112 और कानूनी सहायता के लिए नालसा हेल्पलाइन 15100 की मदद भी ली जा सकती है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने जागरूकता बढ़ाने, संभावित मामलों की समय पर पहचान करने और बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की भूमिका मजबूत करने के उद्देश्य से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था। <a href="https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2239603" rel="nofollow noopener" target="_blank">भारत सरकार की आधिकारिक जानकारी</a></p>
<h2><strong>देशभर में चलाया गया 100 दिवसीय विशेष अभियान</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-355170 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/uyiyu-1-225x300.jpeg" alt="uyiyu 1" width="309" height="412" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/uyiyu-1-225x300.jpeg 225w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/uyiyu-1-768x1024.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/uyiyu-1-1152x1536.jpeg 1152w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/uyiyu-1.jpeg 1200w" sizes="(max-width: 309px) 100vw, 309px" /><span style="font-size: inherit;">बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू किया था। इसमें स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संवाद, निबंध प्रतियोगिताएं, शपथ कार्यक्रम और जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने की योजना बनाई गई थी।</span></p>
<p>अभियान में धार्मिक नेताओं, समुदाय के प्रभावशाली लोगों, विवाह सेवा प्रदाताओं और स्थानीय संस्थाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य उन सामाजिक मान्यताओं को बदलना था, जिनके कारण कई क्षेत्रों में बाल विवाह की प्रथा जारी रहती है।</p>
<p>सरकारी जानकारी के अनुसार, अभियान को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े विभागों के समन्वय से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाल विवाह की समस्या का समाधान केवल एक विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है।</p>
<h2><strong>अंतरराष्ट्रीय घोषणा से क्या बदलेगा?</strong></h2>
<p>27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने से बाल विवाह का मुद्दा हर वर्ष वैश्विक चर्चा के केंद्र में आएगा। सदस्य देश इस अवसर पर अपनी उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं को सामने रख सकेंगे। इससे सरकारों की जवाबदेही बढ़ने और बाल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अधिक संसाधन जुटाने में मदद मिलने की संभावना है।</p>
<p>भारत में पहले से इसी दिन ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू होने के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चलने वाले कार्यक्रम अब वैश्विक अभियान का भी हिस्सा बन सकेंगे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा बाल विवाह के खिलाफ जारी प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब कानूनों का प्रभावी पालन हो, बालिकाएं स्कूलों में बनी रहें और प्रत्येक बच्चे को अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर मिले।</p>
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