स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री के नियम बदले: गलत या छिपाई गई जानकारी की जिम्मेदारी अब संपत्ति धारक की, पटवारी की नहीं
पहले पटवारी को ही माना जाता था रजिस्ट्री करने वाला अधिकारी, अब पदीय हैसियत से सरकार की ओर से होगी रजिस्ट्री
Bhopal । स्वामित्व योजना के तहत मकान या जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियम के अनुसार, यदि रजिस्ट्री से जुड़ी कोई जानकारी गलत पाई जाती है या छिपाई जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी संपत्ति धारक की होगी, पटवारी की नहीं। यही बात जमीन के पुराने विवाद की जानकारी छिपाने पर भी लागू होगी।
स्वामित्व योजना में पहले क्या थे नियम
पुरानी व्यवस्था में रजिस्ट्री से जुड़े प्रावधान कुछ इस तरह थे:
- रजिस्ट्री करने वाले पटवारी को ही अधिकारी बताया गया था।
- घर के पते के कॉलम में पटवारी के घर का पता दर्ज होता था।
- पदनाम में हर पेज पर केवल “निष्पादक” लिखा होता था।
- जमीन का रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार माना जाता था।
- नक्शा मंजूर कराए बिना निर्माण न करने की शर्त जुड़ी होती थी।
- जानकारी छिपाने को लेकर जिम्मेदारी की अलग शर्त थी।
अब क्या होगा: नए नियम एक नजर में
| बिंदु | पहले | अब |
|---|---|---|
| रजिस्ट्री करने वाला | पटवारी को ही अधिकारी बताया गया | सरकार की ओर से पदीय हैसियत से, व्यक्तिगत रूप से नहीं |
| पता | पटवारी के घर का पता | तहसील और कार्यक्षेत्र का नाम |
| पदनाम | केवल “निष्पादक” | “योजनांतर्गत अधिकृत निष्पादक अधिकारी” |
| रिकॉर्ड का आधार | भूलेख पोर्टल का रिकॉर्ड | रजिस्ट्री के दिन का स्वामित्व अधिकार रिकॉर्ड |
| नक्शा मंजूरी की शर्त | दस्तावेज में शामिल | रजिस्ट्री दस्तावेज से हटाई गई |
| जानकारी छिपाने पर | अलग शर्त के साथ जिम्मेदारी तय | संपत्ति धारक जिम्मेदार |
पदीय हैसियत से होगी रजिस्ट्री
सबसे अहम बदलाव यह है कि अब रजिस्ट्री सरकार की ओर से पदीय हैसियत में होगी, व्यक्तिगत रूप से नहीं। दस्तावेज में अब तहसील और कार्यक्षेत्र का नाम दर्ज होगा और हर जगह “योजनांतर्गत अधिकृत निष्पादक अधिकारी” लिखा जाएगा। इससे यह साफ होता है कि रजिस्ट्री एक सरकारी प्रक्रिया के तहत हो रही है।
रजिस्ट्री के दिन का स्वामित्व रिकॉर्ड होगा आधार
अब रजिस्ट्री के दिन का स्वामित्व अधिकार रिकॉर्ड ही आधार माना जाएगा। पहले यह आधार भूलेख पोर्टल का रिकॉर्ड था। साथ ही नक्शा मंजूर कराए बिना निर्माण न करने की शर्त अब रजिस्ट्री दस्तावेज से हटा दी गई है।
गलत जानकारी पर किसकी जिम्मेदारी
नए नियम का सबसे बड़ा असर जिम्मेदारी तय करने पर पड़ेगा। मकान या जमीन से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाने या छिपाए जाने पर संपत्ति धारक जिम्मेदार होगा। जमीन के पुराने विवाद की जानकारी छिपाने की स्थिति में भी यही नियम लागू होगा।
पहले से विवादित मकानों की रजिस्ट्री हुई तो क्या होगा
अब सवाल उठ रहा है कि नई रजिस्ट्री में तो जिम्मेदारी मकान या जमीन मालिक की होगी, लेकिन कई गांवों में जमीन की सीमाओं और मालिकाना हक को लेकर पहले से विवाद चल रहे हैं। ऐसे मामलों में क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
चिंता की बड़ी वजह सीमांकन का न होना है। सीमांकन न होने से यह भी साफ नहीं है कि किसकी जमीन कहां तक है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर, या पटवारी की मिलीभगत से रजिस्ट्री करा लेता है, तो विवाद की स्थिति में असली हकदार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। इस बिंदु पर मूल सूचना अधूरी है, इसलिए प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण का इंतजार है।
