Nagda में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित रासेयो शिविर में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण
Nagda , जिला (निप्र) – स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय, Nagda की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा ग्राम नायन में आयोजित विशेष आवासीय रासेयो शिविर के पांचवें दिन का शुभारंभ उल्लास और ऊर्जा से हुआ। इस दिन की शुरुआत एनएसएस स्वयंसेवकों ने प्रसिद्ध गीत “उठ जाग मुसाफिर भोर भई” के साथ की, जिससे शिविरार्थियों और ग्रामीणों में उत्साह और जागरूकता का माहौल बना।
Nagda श्रमदान और सामाजिक गतिविधियाँ
शिविरार्थियों ने दिन की शुरुआत ग्राम नायन के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में श्रमदान से की। स्वयंसेवकों ने स्कूल परिसर की सफाई की और छात्रों के लिए शिक्षण-सहायता प्रदान की। इसके बाद, शिविर स्थल से गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए जन-जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों को स्वास्थ्य, स्वच्छता, टीकाकरण, पोषण और सरकारी योजनाओं के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
रैली के दौरान, ग्राम के मध्य नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। इस नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति सजग होने, टीबी, पोषण और अन्य बीमारियों से बचाव के उपायों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
सरकारी योजनाओं और सर्वेक्षण
शिविर में स्वयंसेवकों ने ग्रामवासियों के बीच वोटर आईडी, आधार कार्ड, आभा आईडी और संबल योजना जैसी योजनाओं से संबंधित सर्वेक्षण भी किया। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना और उनके लाभ प्राप्ति की प्रक्रिया को आसान बनाना था।
बौद्धिक सत्र और स्वास्थ्य जागरूकता
बौद्धिक कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम नायन के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) हेमेंद्र सिंह चंद्रावत ने की। इस सत्र में स्वास्थ्य और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार प्रसाद ने स्वयंसेवकों और ग्रामीणों को संतुलित और पोषित आहार के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने खानपान संबंधी आदतों को सुधारने और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी।
स्वास्थ्य परीक्षण शिविर
सत्र के पश्चात, सीएचओ नायन हेमेंद्र सिंह चंद्रावत, सिविल हॉस्पिटल नागदा के टीबी विभाग की लैब सुपरवाइजर नीतू शर्मा और आईसीटीसी काउंसलर कविता सेन द्वारा ग्रामीणों और शिविरार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
नीतू शर्मा ने क्षय रोग (टीबी) संबंधी जानकारी दी और बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत किस प्रकार जागरूकता, लक्षण, कारण, रोग निदान और दवाओं का वितरण किया जाता है। उन्होंने ग्रामीणों और स्वयंसेवकों से अपील की कि वे निक्षय मित्र बनकर टीबी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलों में सरकार की मदद करें।
साथ ही, शासन की निक्षय पोषण योजना, फूड बास्केट योजना और प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से मिलने वाली राशियों के बारे में भी ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी गई।
स्वयंसेवकों और प्राध्यापकों की भागीदारी
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार प्रसाद, डॉ. ओमप्रकाश परमार, तथा स्वयंसेवक सचिन तिवारी, प्रांजल रंजन अवस्थी, कविता कौर चौहान, पुष्पा बरानिया, अंजू ठाकुर, डॉ. कृष्णपाल सिंह नरूका, डॉ. शिवशंकर पटेल, डॉ. निधि बाजपेयी और रामप्रताप वीर सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्य स्वयंसेवक उपस्थित थे।
सभी ने मिलकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित कीं। शिविरार्थियों ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी दी।
ग्रामीणों के लिए लाभ और जागरूकता
Nagda शिविर में ग्रामीणों को यह समझने का अवसर मिला कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं है, बल्कि समाज और परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण है। एनएसएस स्वयंसेवकों ने उन्हें टीबी, पोषण, साफ-सफाई और संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
स्वयंसेवकों और प्राध्यापकों ने यह भी बताया कि किस प्रकार सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा का स्तर बेहतर किया जा सकता है।
निष्कर्ष
स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित यह रासेयो शिविर ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य और जागरूकता पहल साबित हुआ। शिविर में आयोजित रैली, नुक्कड़ नाटक, स्वास्थ्य परीक्षण और सरकारी योजनाओं की जानकारी ने ग्रामीणों और स्वयंसेवकों दोनों में स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया।
शिविर के पांचवें दिन की गतिविधियों ने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवी पहल और सामुदायिक सहभागिता ग्रामीण स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस तरह के शिविर ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अवगत कराते हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाते हैं।
