सुप्रीम कोर्ट ने जर्जर भवन गिराने का रास्ता साफ किया, अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
सागर के बड़ा बाजार क्षेत्र में खतरनाक भवन को लेकर रहवासियों में चिंता, सभी न्यायिक स्तरों पर गिराने का आदेश बरकरार
सागर। शहर के सबसे व्यस्ततम बड़ा बाजार-सराफा कोतवाली मुख्य मार्ग पर स्थित सागरोदय तीर्थ क्षेत्र के जर्जर और खतरनाक भवन को गिराए जाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। नगर दंडाधिकारी से लेकर जिला न्यायालय, जबलपुर हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक मामले की सुनवाई के बाद भवन को गिराने संबंधी आदेश बरकरार रखा गया है। अब क्षेत्र के रहवासियों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
रहवासियों का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। भवन का एक हिस्सा वर्ष 2025 में दो बार अपने आप गिर चुका है। ऐसे में आसपास रहने वाले लोगों और मुख्य मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
नगर दंडाधिकारी ने दिया था भवन गिराने का आदेश
जर्जर भवन को लेकर नगर दंडाधिकारी द्वारा 16 जनवरी 2026 को इसे गिराने का आदेश पारित किया गया था। इस आदेश के खिलाफ रुपेश सोनी, दिनेश राव और देशभूषण जैन की ओर से जिला न्यायालय में अर्जी प्रस्तुत की गई।
जिला न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद 14 मार्च 2026 को भवन को जर्जर पाए जाने के साथ नगर दंडाधिकारी के आदेश को सही मानते हुए उसे यथावत रखा।
हाईकोर्ट में भी नहीं मिली राहत
जिला न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित पक्षों की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद 8 जुलाई 2026 को नगर दंडाधिकारी और जिला न्यायालय के आदेश को सही माना।
हाईकोर्ट ने जर्जर भवन को गिराए जाने संबंधी आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद मामले में पुनर्विलोकन याचिका भी प्रस्तुत की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कोई बदलाव नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती
इसके बाद देशभूषण जैन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निचली अदालतों और हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों का अवलोकन किया।
20 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी जर्जर भवन को गिराए जाने संबंधी पूर्व आदेश को बरकरार रखा और एसएलपी को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद भवन को गिराने की कार्रवाई के संबंध में सभी प्रमुख न्यायिक स्तरों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

रहवासियों का सवाल- अब प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब बड़ा बाजार क्षेत्र के रहवासियों का सीधा सवाल है कि प्रशासन जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई कब शुरू करेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन अत्यंत व्यस्त मार्ग पर स्थित है। आसपास दुकानों और रहवासी क्षेत्रों के साथ लगातार लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि भवन का कोई हिस्सा अचानक गिरता है तो बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
रहवासियों का कहना है कि वर्ष 2025 में भवन का हिस्सा दो बार गिर चुका है। इसके बावजूद यदि भवन लंबे समय तक खड़ा रहता है तो खतरा लगातार बना रहेगा।
शाहपुर हादसे के बाद जारी हुए थे निर्देश
जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर शाहपुर में हुए हादसे का भी उल्लेख किया जा रहा है। शाहपुर में जर्जर भवन गिरने से 9 लोगों की मौत के बाद शासन की ओर से जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे।
इसी परिप्रेक्ष्य में सागर के सागरोदय तीर्थ क्षेत्र स्थित जर्जर भवन को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन के सामने आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी है।
हादसे के डर से राहत का इंतजार
बड़ा बाजार क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे किसी विवाद या व्यक्तिगत पक्ष-विपक्ष से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि भवन यदि वास्तव में खतरनाक स्थिति में है तो उसे समय रहते हटाया जाना जरूरी है।
मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से रोज बड़ी संख्या में वाहन और पैदल लोग गुजरते हैं। भवन के आसपास व्यापारिक गतिविधियां भी चलती हैं। ऐसे में किसी भी तरह की दुर्घटना का असर बड़े क्षेत्र में हो सकता है।
अब जब नगर दंडाधिकारी, जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर भवन गिराने संबंधी आदेश बरकरार रह चुके हैं, तो स्थानीय रहवासी प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
रहवासियों की मांग है कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जर्जर भवन को जल्द हटाए, ताकि संभावित दुर्घटना का खतरा समाप्त हो और क्षेत्र के लोगों को भयमुक्त माहौल मिल सके।
