ई-टोकन व्यवस्था बंद करने के फैसले को Sunil Star Chouhan ने बताया किसानों के संघर्ष की जीत
रिपोर्ट नरेंद्र सिरवी
आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- किसानों की एकजुटता और आंदोलन के दबाव से सरकार को लेना पड़ा निर्णय
मनावर/धार। किसानों के हितों को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध और मांगों के बाद सरकार द्वारा ई-टोकन व्यवस्था बंद करने के निर्णय पर आदिवासी कांग्रेस जिला धार के जिलाध्यक्ष Sunil Star Chouhanन ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे किसानों की एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर आदिवासी कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रही है और किसानों को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए संगठन द्वारा विभिन्न स्तरों पर आंदोलन, ज्ञापन और जनजागरूकता अभियान चलाए गए।

धार जिले से शुरू हुआ था ई-टोकन व्यवस्था का विरोध
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि प्रदेश में सबसे पहले धार जिले से आदिवासी कांग्रेस के बैनर तले ई-टोकन व्यवस्था का विरोध शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि किसानों को खाद प्राप्त करने में आ रही परेशानियों को देखते हुए संगठन ने इस व्यवस्था को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर राज्यपाल महोदय के नाम ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था में सुधार की मांग की गई थी। संगठन लगातार किसानों के साथ खड़ा रहा और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाता रहा।

कांग्रेस नेताओं ने भी उठाई किसानों की आवाज
जिलाध्यक्ष सुनील स्टार चौहान ने कहा कि किसानों के मुद्दे को विधानसभा में भी मजबूती से उठाया गया। उन्होंने बताया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किसानों की परेशानियों को सदन में प्रमुखता से रखा।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम के मार्गदर्शन में आदिवासी कांग्रेस लगातार किसानों के हितों को लेकर सक्रिय रही।
उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी गईं और सरकार तक उनकी मांगों को पहुंचाने का प्रयास किया गया।

किसानों की आवाज के सामने सरकार को झुकना पड़ा
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि आखिरकार सरकार को किसानों की समस्याओं को समझना पड़ा और ई-टोकन व्यवस्था बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने इसे किसानों के अधिकारों की लड़ाई की सफलता बताते हुए कहा कि यह निर्णय किसानों की एकता और उनके संघर्ष का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में उन्हें खेती के समय आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
खाद वितरण व्यवस्था को लेकर सरकार से मांग
आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि केवल ई-टोकन व्यवस्था बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
उन्होंने कहा कि किसान पहले ही मौसम, लागत और बाजार जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में खाद जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए उसे संघर्ष करना पड़े, यह उचित नहीं है।

किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए जारी रहेगा संघर्ष
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय, खाद वितरण में अव्यवस्था या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, “जब-जब किसानों के अधिकारों पर हमला होगा, तब-तब आदिवासी कांग्रेस और मैं स्वयं किसानों के साथ खड़ा रहूंगा। अन्नदाता के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।”

किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील
सुनील स्टार चौहान ने सरकार से अपील की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे उन्हें अपनी जरूरतों के लिए परेशान होकर आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।
उन्होंने कहा कि किसानों को सम्मानजनक और सुविधाजनक तरीके से कृषि सामग्री उपलब्ध कराना ही किसानों के प्रति वास्तविक सम्मान होगा।
उन्होंने किसानों की एकजुटता को इस निर्णय का आधार बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई किसानों की आवाज ने अपना प्रभाव दिखाया है।
