त्योहारों के सीजन में महंगी हुई शक्कर, 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंचे भाव; आम परिवारों का बिगड़ा बजट
त्योहार नजदीक आते ही शक्कर की कीमतों में तेजी से उपभोक्ता चिंतित, मिठाइयों और घरेलू खर्च पर पड़ सकता है असर; लोगों ने महंगाई पर नियंत्रण की उठाई मांग
सिलवानी। संवाददाता वैभव जैन मस्ताना। त्योहारों का सीजन नजदीक आते ही सिलवानी में शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय बाजार में शक्कर के खुदरा भाव 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक बताए जा रहे हैं। कीमतों में तेजी का सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने में शक्कर की खपत बढ़ जाती है, ऐसे में बढ़ी हुई कीमतों ने त्योहार की तैयारियों में जुटे परिवारों की परेशानी बढ़ा दी है।
स्थानीय उपभोक्ताओं और व्यापारियों के अनुसार शक्कर की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कीमत बढ़ने के पीछे वास्तविक कारणों को लेकर अलग-अलग बातें कही जा रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए यह स्पष्ट करना चाहिए कि अचानक कीमतों में तेजी क्यों आई है।
65 से 70 रुपये किलो तक बताई जा रही शक्कर
सिलवानी के बाजार में शक्कर की खुदरा कीमत अलग-अलग दुकानों पर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है। कीमत दुकान, गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर अलग हो सकती है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले की तुलना में शक्कर खरीदने के लिए अब उन्हें अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।
विशेषकर ऐसे परिवारों पर इसका अधिक असर दिखाई दे रहा है, जिनकी मासिक आय सीमित है। दैनिक जरूरतों के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर ऐसे परिवारों को अपने अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ती है।
त्योहारी सीजन में शक्कर की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। घरों में मिठाइयां, खीर, हलवा और अन्य पकवान तैयार किए जाते हैं। इसी कारण शक्कर के भाव बढ़ने से त्योहारों पर होने वाला घरेलू खर्च भी बढ़ने की आशंका है।
त्योहार की मिठास पर महंगाई का असर
सावन सहित आने वाले धार्मिक पर्व और त्योहार भारतीय परिवारों में विशेष महत्व रखते हैं। त्योहारों पर मिठाई बनाने और मेहमानों के स्वागत की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन शक्कर जैसी आवश्यक वस्तु की कीमत बढ़ने से लोगों को अपने बजट के अनुसार खरीदारी करनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार के समय पहले से ही कपड़े, पूजा सामग्री, खाद्य पदार्थ और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के कारण अतिरिक्त खर्च होता है। अब शक्कर की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर एक और बोझ जुड़ गया है।
कई उपभोक्ता बाजार में शक्कर की कीमत पूछने के बाद आवश्यकता के अनुसार सीमित मात्रा में खरीदारी करने की बात कह रहे हैं। इससे त्योहारी खरीदारी पर भी असर पड़ सकता है।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की बढ़ी चिंता
महंगाई का सबसे अधिक प्रभाव कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ता है। ऐसे परिवार महीने का बजट बनाकर राशन और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी करते हैं। किसी एक जरूरी खाद्य सामग्री की कीमत में अचानक बढ़ोतरी होने से पूरा घरेलू बजट प्रभावित हो जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शक्कर रोजमर्रा के उपयोग की वस्तु है। चाय से लेकर घर में बनने वाली मिठाइयों तक इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नियमित घरेलू खर्च पर भी पड़ेगा।
लोगों का कहना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाली तेज बढ़ोतरी पर सरकार और प्रशासन को निगरानी रखनी चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।
व्यापारियों में भी कीमतों को लेकर चर्चा
स्थानीय बाजार में शक्कर की बढ़ती कीमत व्यापारियों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में इतनी तेजी सामान्य उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है। खुदरा दुकानदारों के लिए भी बढ़े हुए थोक भाव के अनुसार सामान बेचना मजबूरी बन जाता है।
हालांकि कीमतों में वृद्धि के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं होने के कारण इसके पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। बाजार में आपूर्ति, मांग, थोक कीमत और परिवहन सहित कई कारक खुदरा मूल्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि संबंधित विभाग को बाजार में उपलब्ध स्टॉक और कीमतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। इससे जमाखोरी या कृत्रिम कमी जैसी किसी स्थिति की आशंका होने पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।
महंगाई पर नियंत्रण की मांग
शक्कर के बढ़े हुए भाव को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। नागरिकों का कहना है कि सरकार को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही घरेलू खर्चों को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए अचानक बढ़ने वाली कीमतें उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती हैं।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब त्योहारों के समय आवश्यक वस्तुओं की मांग बढ़ना पहले से तय रहता है तो आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। लोगों ने प्रशासन से बाजार में निरीक्षण बढ़ाने और कीमतों पर नजर रखने की मांग की है।
मिठाई कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
शक्कर केवल घरों में ही नहीं, बल्कि मिठाई कारोबार की भी प्रमुख सामग्री है। यदि इसकी कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो इसका असर मिठाई तैयार करने की लागत पर भी पड़ सकता है। हालांकि मिठाइयों की कीमत में किसी संभावित बदलाव को लेकर स्थानीय कारोबारियों की ओर से अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ती है। ऐसे में दूध, मावा, घी और शक्कर जैसी सामग्री की कीमतें कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने पर उत्पादन खर्च भी प्रभावित होता है।
अब कीमतों में राहत का इंतजार
फिलहाल सिलवानी में शक्कर के बढ़े हुए भाव आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी और कीमतों में जल्द राहत देखने को मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से आवश्यक खाद्य वस्तुओं के बाजार भाव की नियमित समीक्षा करने और असामान्य मूल्य वृद्धि की स्थिति में उचित कदम उठाने की मांग की है। त्योहारों की खुशियों के बीच शक्कर की बढ़ती कीमतों ने फिलहाल आम परिवारों के बजट में कड़वाहट जरूर घोल दी है।
