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भक्त के घर भगवान पधारे: सुधासागर जी महाराज की आहार चर्या का परिवार को मिला परम सौभाग्य

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Published On: 23 August 2026
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इंदौर में परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य जैन परिवार को मिला। आहार चर्या के बाद गुरुदेव ने पूरे परिवार को विशेष आशीर्वाद प्रदान किया।

महाराज को परिवार ने कराई नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या

रिपोर्टर : राजेश जैन दद्दू, इंदौर

इंदौर। सुधासागर जी महाराज के पावन पदार्पण से जैन परिवार धन्य हो गया। श्रमण संस्कृति के महाश्रमण, तीर्थंकर सम उपकारी परम पूज्य जगतपूज्य निर्यापक मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का परम सौभाग्य परिवार को प्राप्त हुआ। परिवार ने इसे अपने जीवन का परम अहोभाग्य बताते हुए कहा कि भक्त के घर भगवान पधारे और अपने आशीर्वाद से पूरे परिवार को धन्य कर दिया।

सुधासागर जी महाराज के पड़गाहन से परिवार में हर्ष

परम पूज्य गुरुदेव के आहार हेतु पड़गाहन का सौभाग्य प्राप्त होते ही परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गई। शुद्धि, भक्ति और नवधा भक्ति विधि पूर्वक गुरुदेव को आहार कराया गया। आहार चर्या के पश्चात सुधासागर जी महाराज ने परिवार को विशेष आशीर्वाद प्रदान कर धन्य किया।

वरिष्ठ समाजसेवी एवं कार्य अध्यक्ष डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा, “हम कृतज्ञ हैं कि भक्त के घर भगवान पधारे और हमें आशीष प्रदान कर धन्य किया। गुरुदेव का पदार्पण हमारे परिवार के लिए तीर्थ के समान है। उनके आहार से घर पवित्र हो गया और परिवार को मोक्षमार्ग की प्रेरणा मिली।”

सौभाग्यशाली परिवार ने प्राप्त किया आशीर्वाद

इस पुण्य अवसर पर डॉ. जैनेंद्र-मनोरमा जैन, मुक्ता-राजेश जैन (दद्दू), अतिशय जैन, साक्षी-सक्षम बड़जात्या, सविता-पवन मोदी, पिंकी-अनिल बजाज, निर्मला-प्रकाश कासलीवाल, कुणाल सोहिता, सम्यक-आयुषी सहित समस्त परिवार ने गुरुदेव की भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सकल परिवार ने गुरुदेव के चरणों में बारम्बार नमोस्तु करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ रहने की मंगलकामना की। परिवार ने कहा कि सुधासागर जी महाराज के चरण पड़ने से घर और परिवार धन्य हो गए। यह पुण्य अवसर परिवार की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा।

क्या है नवधा भक्ति?

जैन धर्म में मुनिराज को आहार कराने की विधि को नवधा भक्ति कहते हैं। पड़गाहन, उच्चासन, पाद प्रक्षालन, अर्चन, प्रणाम, मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काय शुद्धि और एषणा शुद्धि—इन नौ विधियों से आहार कराना महापुण्य का कारण माना जाता है।

विनीत : डॉ. जैनेंद्र जैन परिवार, राजेश जैन (दद्दू) परिवार, इंदौर

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