सारणी में फिर सड़क हादसे का शिकार हुआ गोवंश: 15 दिन में दूसरी मौत, प्रशासनिक लापरवाही और आवारा पशुओं की समस्या पर उठे सवाल
तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से गोवंश की मौत, स्थानीय लोगों में नाराजगी; नगर पालिका और पशुपालकों की जिम्मेदारी पर फिर शुरू हुई बहस
सारणी (बैतूल) | रिपोर्ट: संदीप तायड़े
बैतूल जिले के सारणी क्षेत्र में आवारा गोवंश की समस्या एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। मंगलवार देर रात हाईवे पर हुए एक सड़क हादसे में एक गोवंश की मौत हो गई। यह पिछले 15 दिनों के भीतर सड़क दुर्घटना में गोवंश की दूसरी मौत है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिकों, गौसेवकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और सड़कों पर घूम रहे आवारा गोवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नगर पालिका, पशुपालन विभाग और संबंधित एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करतीं, तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता था। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
देर रात हाईवे पर हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात लगभग 11:15 बजे बगडोना स्थित बालाजी सुपर बाजार के सामने हाईवे पर एक तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से एक गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि घोड़ाडोंगरी से काली माई तिगड्डा की ओर जा रहा 16 चक्का ट्रक (वाहन क्रमांक MH 40 CM 9100) सड़क पर बैठे गोवंश से टकरा गया। टक्कर इतनी तेज थी कि पशु ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने रोका वाहन, पुलिस को दी सूचना
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए ट्रक को मौके पर ही रोक लिया और सारणी थाना पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने संबंधित वाहन को जब्त कर लिया है तथा उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पाथाखेड़ा चौकी में रखा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
15 दिनों में दूसरी घटना, चिंता बढ़ी

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब 15 दिन पहले भी दमुआ नाका क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में एक अन्य गोवंश की मौत हुई थी।
लगातार दो घटनाओं ने इस समस्या को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लोगों का कहना है कि यदि सड़कों पर बैठे आवारा पशुओं की नियमित निगरानी और सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्था की जाती, तो इन हादसों से बचा जा सकता था।
पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
सारणी और आसपास के क्षेत्रों में इससे पहले भी गोवंश से जुड़े गंभीर सड़क हादसे सामने आ चुके हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष बगडोना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार ट्रक कई गोवंशों की चपेट में आ गया था, जिससे अनेक पशुओं की मौत हुई थी। उस घटना के बाद विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने सड़कों पर आवारा गोवंश की समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
प्रशासन के निर्देशों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा नगर पालिका को निर्देश दिए गए थे कि सड़कों पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों या गौशालाओं तक पहुंचाया जाए।
साथ ही ऐसे पशुपालकों की पहचान करने की बात भी कही गई थी, जो अपने पालतू पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ समय तक अभियान चलाया गया, लेकिन बाद में कार्रवाई धीमी पड़ गई। इसके कारण सड़कों पर फिर बड़ी संख्या में गोवंश दिखाई देने लगे हैं।
नगर पालिका की भूमिका पर उठे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहरी क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने में नगर पालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, गौशालाओं में रखने और सड़कों की निगरानी की व्यवस्था हो, तो दुर्घटनाओं की संख्या कम की जा सकती है।
हालांकि इस संबंध में नगर पालिका की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पशुपालकों की जिम्मेदारी भी अहम
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि पशुपालकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
यदि पालतू पशुओं को खुले में छोड़ दिया जाता है तो वे मुख्य मार्गों और हाईवे पर पहुंच जाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि पशुपालकों द्वारा अपने पशुओं की उचित देखभाल और सुरक्षित रख-रखाव से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
तेज रफ्तार वाहन भी बन रहे हादसों की वजह

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय हाईवे पर भारी वाहनों की तेज गति भी दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है।
घोड़ाडोंगरी, सारणी और बगडोना मार्ग पर बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं। यदि निर्धारित गति सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए और नियमित यातायात निगरानी हो, तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है।
यातायात विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में स्पीड कंट्रोल, चेतावनी संकेतक और रात्रिकालीन निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों ने की स्थायी समाधान की मांग
लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सड़कों पर बैठे आवारा गोवंश को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
- गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए और पशुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
- खुले में पशु छोड़ने वाले जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- हाईवे पर रात्रिकालीन गश्त और गति नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए।
- संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं।
- दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाए।
कानून और सुरक्षा दोनों पर ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण दोनों एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं।
जहां एक ओर सड़क पर बैठे पशु स्वयं दुर्घटना का शिकार होते हैं, वहीं दूसरी ओर वाहन चालक और यात्री भी गंभीर हादसों का सामना कर सकते हैं।
इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन, नगर पालिका, पशुपालन विभाग, पुलिस और स्थानीय नागरिक मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा
सारणी क्षेत्र में गोवंश से जुड़ी लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इस विषय को लेकर व्यापक जनआंदोलन भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस ताजा घटना के बाद विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग इस बार केवल अस्थायी अभियान तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
निष्कर्ष
सारणी में 15 दिनों के भीतर सड़क दुर्घटना में गोवंश की दूसरी मौत ने एक बार फिर आवारा पशुओं की समस्या को उजागर कर दिया है। यह केवल पशु संरक्षण का ही नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा का भी गंभीर विषय है। यदि प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और पशुपालक मिलकर समन्वित प्रयास करें तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल स्थानीय नागरिकों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
