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मिडिल ईस्ट तनाव, PM Modi की अपील और महंगे तेल के बीच Stock Market लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट में रहा

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Published On: 12 May 2026
मिडिल ईस्ट तनाव, PM Modi की अपील और महंगे तेल के बीच Stock Market लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट में रहा

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 Stock Market में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट: क्या है इसके पीछे की वजह और निवेशकों को क्या करना चाहिए?

भारतीय शेयर बाजार Stock Market में लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारी गिरावट देखने को मिली। सोमवार की बड़ी बिकवाली के बाद मंगलवार को भी बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल बना रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 160 अंक से ज्यादा फिसल गया। सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया, जहां Infosys, TCS, Tech Mahindra और HCL Tech जैसे दिग्गज शेयर तेजी से टूटते नजर आए।

इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारकों ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।

बाजार खुलते ही टूटा सेंसेक्स और निफ्टी

मंगलवार को बाजार की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,015 के मुकाबले गिरकर 75,688 पर खुला। शुरुआती कुछ ही मिनटों में बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि सेंसेक्स 723 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,291 के स्तर तक पहुंच गया।

वहीं दूसरी ओर, NSE निफ्टी भी भारी दबाव में दिखाई दिया। निफ्टी 23,815 के पिछले बंद स्तर से नीचे 23,722 पर खुला और थोड़ी ही देर में 23,633 तक फिसल गया। बाजार में लगभग हर सेक्टर लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों में फिलहाल जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है।

आईटी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट

मंगलवार की गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान आईटी कंपनियों को हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर साफ दिखाई दिया।

बीएसई लार्जकैप इंडेक्स में शामिल प्रमुख टेक शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई:

  • TCS के शेयर लगभग 3.6% टूटे
  • Infosys में करीब 3.3% की गिरावट रही
  • Tech Mahindra के शेयर 2.8% नीचे आए
  • HCL Tech करीब 2.3% गिरा

इसके अलावा मिडकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। UPL, Hindustan Petroleum और Coforge जैसे शेयरों में 3% से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में कमजोरी का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ता है क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका और यूरोप से आता है। यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी होती है, तो टेक कंपनियों की आय पर असर पड़ सकता है।

पीएम मोदी की अपील का बाजार पर असर

बाजार में डर बढ़ने का एक बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी।

उन्होंने कहा कि भारत के आसपास युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में देश को संसाधनों की बचत करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री की इस अपील ने निवेशकों के बीच यह संदेश दिया कि आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि बाजार में घबराहट बढ़ी और निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी।

हालांकि सरकार की ओर से किसी आर्थिक संकट की आधिकारिक चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन बाजार अक्सर भावनाओं और संकेतों पर तेजी से प्रतिक्रिया करता है। यही कारण है कि पीएम मोदी के बयान के बाद बाजार में डर का माहौल बन गया।

मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट

शेयर बाजार में गिरावट का दूसरा बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रही तनातनी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है।

जब तेल महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ती है और उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ता है, जिससे शेयर बाजार दबाव में आ जाता है।

महंगाई का बढ़ता खतरा

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। यदि तेल लगातार महंगा रहता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य सेक्टरों की लागत भी बढ़ जाती है। इससे रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।

महंगाई बढ़ने की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें शेयर बाजार के लिए अच्छी नहीं मानी जातीं क्योंकि इससे कंपनियों की उधारी महंगी हो जाती है और निवेश घटता है।

इसी आशंका के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं।

हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट संकट और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। इससे बाजार में लिक्विडिटी घटती है और बड़े स्तर पर गिरावट देखने को मिलती है।

निवेशकों में डर का माहौल

लगातार दो दिनों की भारी गिरावट ने छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा परेशान किया है। जिन निवेशकों ने हाल ही में बाजार में पैसा लगाया था, उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के समय घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबे समय के निवेशकों को बाजार की मौजूदा स्थिति को अवसर के रूप में देखना चाहिए।

हालांकि अल्पकालिक निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति मानी जाती है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव?

मंगलवार की गिरावट में आईटी और टेक शेयरों के अलावा कई अन्य सेक्टर भी दबाव में दिखाई दिए।

1. आईटी सेक्टर

वैश्विक मंदी की आशंका और अमेरिकी बाजार की कमजोरी का सबसे ज्यादा असर आईटी कंपनियों पर पड़ा।

2. ऑयल एंड गैस सेक्टर

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा। खासकर वे कंपनियां जो आयात पर निर्भर हैं, उनके शेयर टूटे।

3. मिडकैप और स्मॉलकैप

बाजार में डर बढ़ने पर निवेशक सबसे पहले जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाते हैं। यही वजह है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।

4. बैंकिंग सेक्टर

हालांकि बैंकिंग सेक्टर में गिरावट सीमित रही, लेकिन बाजार के दबाव का असर यहां भी दिखाई दिया।

क्या आगे और गिर सकता है बाजार?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इससे बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।

हालांकि कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद बाजार को लंबे समय में सहारा दे सकती है।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार की मौजूदा स्थिति में निवेशकों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञ निम्नलिखित सलाह दे रहे हैं:

घबराकर बिकवाली न करें

बाजार में गिरावट अस्थायी भी हो सकती है। ऐसे में जल्दबाजी में निवेश निकालना नुकसान बढ़ा सकता है।

मजबूत कंपनियों पर भरोसा रखें

अच्छे फंडामेंटल और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन करती हैं।

पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें

सिर्फ एक सेक्टर में निवेश करने से जोखिम बढ़ सकता है। अलग-अलग सेक्टरों में निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

SIP जारी रखें

म्यूचुअल फंड निवेशकों को गिरावट के समय SIP बंद नहीं करनी चाहिए। लंबे समय में यह रणनीति फायदेमंद साबित हो सकती है।

एक्सपर्ट की सलाह लें

किसी भी निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार या मार्केट एक्सपर्ट की राय जरूर लें।

निष्कर्ष

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पीएम मोदी की अपील, मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता जैसे कई कारणों ने बाजार पर दबाव बनाया है।

हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का सामान्य हिस्सा माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

ऐसे समय में धैर्य, सही रणनीति और समझदारी से किया गया निवेश ही निवेशकों को लंबे समय में फायदा पहुंचा सकता है।

नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या मार्केट एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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