Stock Market Crash: अमेरिका-ईरान तनाव से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, Sensex 700 अंक से ज्यादा टूटा; Nifty 250 अंक फिसला
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों में घबराहट, एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली
बिजनेस डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर बुधवार, 2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार में तेज बिकवाली शुरू हो गई। बीएसई सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में भी 250 अंक से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार खुलने के साथ ही अधिकांश प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। इसका असर लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी घरेलू बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया।
Sensex 76,135 तक फिसला
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर 76,944 के मुकाबले बुधवार को 76,471 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने के साथ इंडेक्स 76,135 के आसपास तक नीचे चला गया। इस तरह सेंसेक्स में 700 अंक से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी की शुरुआत भी कमजोर रही। निफ्टी पिछले बंद स्तर 24,055 के मुकाबले 23,858 पर खुला और शुरुआती कारोबार के दौरान 23,786 के स्तर तक फिसल गया। इससे बाजार में निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी।
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता
भारतीय बाजार में आई इस गिरावट की बड़ी वजहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े संघर्ष के बढ़ने की आशंका का सीधा असर शेयर बाजार, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी पर पड़ता है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट से दूरी बनाते हैं, जिससे इक्विटी बाजारों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की नजर
मौजूदा तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह की बाधा या सैन्य तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
इसी कारण होर्मुज से जुड़ी खबरों पर दुनिया भर के बाजारों की नजर बनी हुई है। तेल की सप्लाई में संभावित बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल सकती है।
Crude Oil की कीमतों में उछाल
भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने की जानकारी सामने आई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से महंगाई पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
यही वजह है कि क्रूड ऑयल में तेज उछाल भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाता है।
इन शेयरों में दिखा बिकवाली का दबाव
शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। लार्जकैप सेगमेंट में IndiGo और Eternal जैसे शेयर दबाव में नजर आए। वहीं मिडकैप शेयरों में GVT&D, Godrej Properties, MFSL, TI India और Voltas में गिरावट दर्ज की गई।
स्मॉलकैप सेगमेंट में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। KFIN Tech, Brigade और Chola Holdings जैसे शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
हालांकि शेयरों और सूचकांकों के स्तर कारोबारी सत्र के दौरान लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए दिन के आगे के कारोबार में इनमें उतार-चढ़ाव संभव है।
एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल भारतीय शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशिया के प्रमुख बाजारों में भी बुधवार को कमजोरी देखने को मिली।
जापान का निक्केई करीब 2.9 प्रतिशत तक गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 4 प्रतिशत तक नीचे जाने की जानकारी सामने आई। एशियाई बाजारों की इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार की शुरुआती चाल पर भी पड़ा।
निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम पर
शेयर बाजार की आगे की दिशा में अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें अहम भूमिका निभा सकती हैं। यदि तनाव और बढ़ता है और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
इसके विपरीत भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिलने पर निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। फिलहाल घरेलू निवेशकों के साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए किसी भी निर्णय से पहले जोखिम, निवेश अवधि और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
