खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें, स्वयं से प्रेम करें: ज्ञान मंथन व्याख्यान में संदेश
इंदौर, 1 मई। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव और डिप्रेशन के बीच आत्म-संतोष और आत्म-प्रेम का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर में आयोजित पांच दिवसीय ‘ज्ञान मंथन’ व्याख्यान माला में ब्रह्माकुमारी अचल बहन ने “लव योरसेल्फ” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि आज का इंसान अपनी खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर हो गया है। लोग यह अपेक्षा रखते हैं कि कोई उन्हें सम्मान दे, प्यार दे और खुश रखे। लेकिन जब ये अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो व्यक्ति दुख, हताशा और अवसाद का शिकार हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची खुशी तब मिलती है जब व्यक्ति स्वयं को समझता है और खुद से प्रेम करना सीखता है।
स्वयं से प्रेम ही सच्ची खुशी का आधार
ब्रह्माकुमारी अचल बहन ने कहा कि स्वयं से प्रेम करने का अर्थ केवल अपने बारे में अच्छा महसूस करना नहीं है, बल्कि जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन के साथ उसे प्राप्त करना भी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने अंदर झांकना चाहिए और अपनी विशेषताओं को पहचानकर उनका सकारात्मक उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जब व्यक्ति स्वयं को स्वीकार करता है और अपनी क्षमताओं का सही दिशा में उपयोग करता है, तब वह न केवल स्वयं खुश रहता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक योगदान देता है।
परमात्मा से संबंध जोड़ना जरूरी
व्याख्यान के दौरान यह भी बताया गया कि जीवन में प्रेम की कमी का एक बड़ा कारण परमात्मा से संबंध का अभाव है। जब व्यक्ति परमात्मा को पहचानता है और उनसे जुड़ता है, तो उसे आंतरिक शक्ति और सच्चा प्रेम प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा से जुड़कर व्यक्ति मांगने वाला नहीं, बल्कि देने वाला बन जाता है। उसका दृष्टिकोण बदलता है और वह दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और सकारात्मक हो जाता है।
एकता समर कैंप का शुभारंभ
कार्यक्रम के साथ ही 1 से 7 मई तक चलने वाले ‘एकता समर कैंप’ का भी शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बचपन में सीखी गई बातें जीवनभर साथ रहती हैं।
उन्होंने बच्चों को ईमानदारी, सच्चाई और अच्छे संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा दी। एक प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से उन्होंने बताया कि अच्छे गुण ही जीवन की मजबूत नींव होते हैं।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में नगर निगम के पूर्व अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा और संपूर्ण डायग्नोस्टिक सेंटर की डॉ. वर्षा सोडानी ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और सकारात्मक बन गया।
बच्चों को दी गई सकारात्मक सोच की शिक्षा
इस अवसर पर डॉ. प्रज्ञा टावरी ने छोटे-छोटे वीडियो और रोचक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जीवन में सकारात्मक सोच का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से जीवन की कठिनाइयों को आसानी से पार किया जा सकता है।
सुव्यवस्थित संचालन और आयोजन
कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी भुनेश्वरी बहन द्वारा अत्यंत कुशलता और प्रभावशाली शैली में किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को न केवल सुव्यवस्थित रखा, बल्कि अपनी सहज प्रस्तुति से श्रोताओं को लगातार जोड़े रखा। उनके संचालन में स्पष्टता, संतुलन और आत्मीयता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिससे कार्यक्रम का प्रवाह निरंतर बना रहा। प्रत्येक वक्ता का परिचय, सत्रों का क्रम और समय प्रबंधन उन्होंने बहुत ही सटीक ढंग से निभाया। उनके मधुर और संयमित शब्दों ने कार्यक्रम के वातावरण को और भी गरिमामय बना दिया। उपस्थित लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका भी उन्होंने विशेष ध्यान रखा। उनके कुशल संचालन ने कार्यक्रम को सफल और यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए सभी ने उनकी सराहना की।
निष्कर्ष
ज्ञानशिखर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक साधारण आध्यात्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा। इस कार्यक्रम के जरिए आत्म-प्रेम, आत्म-स्वीकृति और सकारात्मक सोच जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे उपस्थित लोगों को अपने भीतर झांकने और स्वयं को बेहतर समझने की प्रेरणा मिली। आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, जहां व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त हो सके। इस कार्यक्रम ने न केवल आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाया, बल्कि लोगों को अपने जीवन में अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। इस तरह के प्रयास समाज में मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और आंतरिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
