Nagda के स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
Nagda । स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय, नागदा में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति में गुरु के महत्व और शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण, अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
अतिथियों का किया गया स्वागत
गुरु पूर्णिमा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. अर्चना कुशवाह उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व प्राचार्य डॉ. भुवनेश मिश्रा ने सहभागिता की। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य एवं प्राध्यापकों द्वारा अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पी. भास्कर रेड्डी ने अपने स्वागत उद्बोधन में भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह अपने शिष्यों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु अपने मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा, संस्कार और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा प्रदान करता है।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए विचार और गुरु वंदना
कार्यक्रम में छात्रा हिमानी पंवार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। वहीं छात्र उच्छव शेखावत द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गुरु वंदना ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।
छात्राओं स्वाति साहनी एवं सिमरन चौहान ने गुरु पूर्णिमा के महत्व, गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में गुरु को जीवन का मार्गदर्शक माना गया है, जो व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
प्राध्यापकों ने बताया गुरु का महत्व
महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. ओ.पी. परमार, श्री प्रांजल रंजन अवस्थी, श्रीमती पुष्पा बरानिया एवं डॉ. मिति शर्मा ने अपने प्रेरक उद्बोधनों में गुरु की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि गुरु व्यक्ति को केवल विषय ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन, नैतिकता और जिम्मेदारी का बोध भी कराता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। गुरु के मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता और श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है।

गुरु संस्कारों से बनता है श्रेष्ठ व्यक्तित्व — डॉ. अर्चना कुशवाह
मुख्य अतिथि डॉ. अर्चना कुशवाह ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होता। गुरु अपने आचरण, विचारों और संस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान और अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. भुवनेश मिश्रा ने गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान और संस्कार का स्रोत माना गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में समर्पण, मेहनत और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा दी।
एनएसएस के माध्यम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के समापन के बाद राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि, प्राचार्य, प्राध्यापकगण और विद्यार्थियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन
गुरु पूर्णिमा समारोह का संचालन वंशिका कुशवाह ने किया, जबकि अंत में प्राची कटारिया ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्पूर्ण आयोजन में गुरु के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
