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इंदौर पूर्वी Ring Road परियोजना: किसानों की कलेक्टर से गुहार—”सड़क बनवा दो या योजना ही खत्म कर दो”, मुआवजा और जमीन अधिग्रहण में देरी से बढ़ी परेशानी

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Published On: 8 July 2026
इंदौर पूर्वी Ring Road परियोजना: किसानों की कलेक्टर से गुहार—"सड़क बनवा दो या योजना ही खत्म कर दो", मुआवजा और जमीन अधिग्रहण में देरी से बढ़ी परेशानी

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इंदौर पूर्वी Ring Road परियोजना: किसानों की कलेक्टर से गुहार—”

वर्षों से अधर में लटकी पूर्वी रिंग रोड परियोजना, किसानों का फूटा गुस्सा

इंदौर की बहुप्रतीक्षित पूर्वी Ring Road परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से निर्माण कार्य शुरू नहीं होने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अटकी रहने से प्रभावित गांवों के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को सांवेर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर जल्द फैसला लेने की मांग की।

किसानों ने साफ कहा कि यदि सरकार सड़क बनाना चाहती है तो जल्द निर्माण कार्य शुरू करे, अन्यथा वर्षों से लंबित योजना को समाप्त कर दिया जाए। उनका कहना है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन न तो अधिग्रहित हो रही है और न ही वे उसकी खरीदी-बिक्री कर पा रहे हैं। इससे आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं।

“जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन फैसला तो हो”

कलेक्टर से मिलने पहुंचे किसानों ने बताया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। यदि सरकार सड़क निर्माण करना चाहती है तो वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वर्षों तक अनिश्चितता की स्थिति बनी रहना उचित नहीं है।

किसानों का कहना है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन पर कई तरह की पाबंदियां लग गई हैं। न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इससे जमीन का उपयोग और लेन-देन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

कई गांवों के किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट

मंगलवार को सांवेर विधानसभा क्षेत्र के फरसपुर, मेलकलमा, छोटी कदवाली सहित कई गांवों के किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी समस्याएं कलेक्टर के सामने रखीं।

मेलकलमा निवासी संजय दुबे और फरसपुर के किसान उमाशंकर चौधरी ने बताया कि पूर्वी रिंग रोड परियोजना कई वर्षों से केवल कागजों तक सीमित है। परियोजना के कारण किसानों की जमीन प्रभावित है, लेकिन न तो मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही निर्माण कार्य।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द काम शुरू करती है तो किसानों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।

किसानों ने गिनाईं अपनी परेशानियां

प्रभावित किसानों का कहना है कि अधूरी योजना की वजह से उनकी सबसे बड़ी समस्या जमीन से जुड़ी है।

  • जमीन की खरीदी-बिक्री प्रभावित हो रही है।
  • बैंक से ऋण लेने में कठिनाई आ रही है।
  • मुआवजा नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान हो रहा है।
  • खेती से जुड़े भविष्य के फैसले लेना मुश्किल हो गया है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो उनकी परेशानियां और बढ़ जाएंगी।

सड़क बनने से क्षेत्र के विकास की उम्मीद

किसान लखन पटेल का कहना है कि यदि पूर्वी रिंग रोड परियोजना पूरी हो जाती है तो इसका फायदा केवल शहर को ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा।

उनके अनुसार सड़क बनने से परिवहन आसान होगा, कृषि उत्पादों की आवाजाही बेहतर होगी और रोजगार एवं व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे। यही वजह है कि अधिकांश किसान चाहते हैं कि सरकार अब इस परियोजना पर अंतिम फैसला लेकर काम शुरू करे।

44 गांवों की 696 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित

पूर्वी रिंग रोड परियोजना के लिए इंदौर और देवास जिले के कुल 44 गांवों की लगभग 696 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है।

यह परियोजना प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क योजनाओं में शामिल है और इसके पूरा होने के बाद इंदौर शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।

5,000 करोड़ रुपये की है परियोजना

परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसमें केवल भूमि अधिग्रहण पर ही करीब 1,172.49 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यही कारण है कि यह मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में गिनी जा रही है।

83.63 किलोमीटर लंबी होगी रिंग रोड

पूर्वी रिंग रोड की कुल लंबाई 83.63 किलोमीटर प्रस्तावित है।

इसमें लगभग 78.30 किलोमीटर हिस्सा इंदौर जिले में और करीब 4.20 किलोमीटर हिस्सा देवास जिले में आएगा। यह सड़क दोनों जिलों की कुल छह तहसीलों से होकर गुजरेगी।

शिप्रा से पीथमपुर तक बनेगा नया कॉरिडोर

प्रस्तावित सड़क शिप्रा (पीर कराड़) से शुरू होकर सिमरोल, दतोदा होते हुए पीथमपुर (नांदेड क्षेत्र) तक पहुंचेगी।

परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा—

  • पहला चरण: शिप्रा से दतोदा तक लगभग 49 किलोमीटर।
  • दूसरा चरण: दतोदा से नांदेड (पीथमपुर) तक लगभग 35 किलोमीटर।

यह मार्ग शहर के बाहरी हिस्से में नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार करेगा।

पहले भी बदल चुका है परियोजना का लेआउट

पूर्वी रिंग रोड परियोजना को लेकर किसानों का विरोध कई वर्षों से जारी है।

लगातार विरोध और आपत्तियों के बाद परियोजना का मूल लेआउट भी बदला जा चुका है। पहले इसकी लंबाई लगभग 68 किलोमीटर प्रस्तावित थी, लेकिन नए अलाइनमेंट के बाद इसे बढ़ाकर 83.63 किलोमीटर कर दिया गया।

इस बदलाव का उद्देश्य अधिक से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि को बचाना और किसानों की आपत्तियों को कम करना बताया गया था।

चार गुना मुआवजे की मांग

परियोजना से प्रभावित किसान लंबे समय से भूमि का चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि उनकी अधिकांश जमीन सिंचित और उपजाऊ है। यदि इसी जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो उन्हें बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

किसानों का यह भी कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है, इसलिए केवल जमीन अधिग्रहण ही नहीं बल्कि भविष्य के पुनर्वास और आय के विकल्पों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।

बंजर भूमि से सड़क निकालने की मांग

कई किसानों का सुझाव है कि जहां संभव हो, सड़क का मार्ग उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय बंजर या कम उपजाऊ जमीन से निकाला जाए।

उनका कहना है कि इससे खेती पर असर कम पड़ेगा और किसानों का विरोध भी घटेगा। इसी मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं।

पहले भी कर चुके हैं प्रदर्शन

इस वर्ष पूर्वी रिंग रोड परियोजना को लेकर 30 से अधिक गांवों के किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया था।

उस दौरान भी किसानों ने मुआवजा, भूमि अधिग्रहण और सड़क के नए अलाइनमेंट को लेकर अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखी थीं।

हालांकि अब तक परियोजना को लेकर कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आ पाया है।

परियोजना पूरी होने से क्या होंगे फायदे?

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी रिंग रोड बनने के बाद इंदौर शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होगा। शहर के बाहरी हिस्से से गुजरने वाला ट्रैफिक सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा।

इसके अलावा—

  • शहर में जाम की समस्या कम होगी।
  • औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेज होगा।
  • निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • परिवहन लागत में कमी आएगी।

अब प्रशासन के फैसले का इंतजार

फिलहाल प्रभावित किसान प्रशासन से जल्द निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित इस परियोजना पर अब स्पष्ट फैसला होना चाहिए ताकि न तो किसानों की जमीन अनिश्चितता में फंसी रहे और न ही क्षेत्र का विकास प्रभावित हो।

यदि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाती है तो जल्द भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाए। वहीं यदि किसी कारण से योजना आगे नहीं बढ़नी है, तो उसे स्पष्ट रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया जाए।

निष्कर्ष

इंदौर की पूर्वी रिंग रोड परियोजना विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन वर्षों से लंबित रहने के कारण यह प्रभावित किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और निर्माण कार्य में देरी से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना आखिर कब जमीन पर उतरती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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