‘भीड़ कम होते ही टूटने लगा था CJP नेताओं का हौसला’, जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक का बड़ा दावा
45 दिनों तक चला था जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, वांगचुक का दावा—कई नेता आंदोलन खत्म करने के पक्ष में थे
नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 45 दिनों तक चले आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक ने बड़ा दावा किया है। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे वांगचुक के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान जैसे-जैसे भीड़ कम होने लगी, वैसे-वैसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ नेताओं का हौसला भी कमजोर पड़ने लगा था। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कई नेता आंदोलन को ज्यादा लंबा खींचने के पक्ष में नहीं थे और उनसे इसे समाप्त करने की अपील भी की गई थी।
वांगचुक का यह बयान आंदोलन समाप्त होने के बाद सामने आया है और इसके बाद प्रदर्शन के दौरान संगठन के भीतर की परिस्थितियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनके इन दावों पर संबंधित नेताओं या पार्टी का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
45 दिनों तक जंतर-मंतर पर चला आंदोलन
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी स्थान पर CJP से जुड़ा यह आंदोलन भी करीब 45 दिनों तक जारी रहा।
शुरुआती दौर में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी बताई गई। आंदोलन आगे बढ़ने के साथ परिस्थितियां बदलती गईं और कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या में कमी आने लगी।
वांगचुक के अनुसार, भीड़ में आई इसी गिरावट ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुछ नेताओं को चिंतित कर दिया था। उनका दावा है कि आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाने को लेकर संगठन के अंदर एक जैसी राय नहीं थी।
‘आंदोलन खींचने के मूड में नहीं थे कुछ नेता’
सोनम वांगचुक ने दावा किया कि CJP के कुछ नेता आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने के पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, जब आंदोलन में लोगों की संख्या कम होने लगी तो कुछ नेताओं ने इसे समाप्त करने की बात कही।
वांगचुक के बयान के अनुसार, कई मौकों पर नेताओं ने उनसे हाथ जोड़कर आंदोलन खत्म करने का आग्रह किया था। उनका कहना है कि आंदोलन को लेकर बाहर दिखाई देने वाली तस्वीर और अंदर चल रही परिस्थितियों में अंतर था।
यह दावा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि लंबे समय तक चलने वाले किसी भी आंदोलन में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की संख्या बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। समय के साथ आंदोलन की रणनीति, संसाधन और आगे की दिशा को लेकर भी अलग-अलग मत सामने आ सकते हैं।
26 दिनों तक आमरण अनशन पर रहे वांगचुक
59 वर्षीय सोनम वांगचुक इस आंदोलन के दौरान लगातार चर्चा में रहे। उन्होंने करीब 26 दिनों तक आमरण अनशन किया और आंदोलन की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
लंबे अनशन के कारण उनका नाम आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल हो गया। प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका केवल मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि आंदोलन को जारी रखने और उसकी मांगों को सार्वजनिक विमर्श में बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई।
अब आंदोलन खत्म होने के बाद वांगचुक की ओर से सामने आए दावों ने प्रदर्शन की आंतरिक रणनीति और नेतृत्व के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
भीड़ कम होने से बदली आंदोलन की स्थिति?
वांगचुक के बयान से यह संकेत मिलता है कि जंतर-मंतर पर शुरुआती दिनों की तुलना में बाद में प्रदर्शनकारियों की संख्या कम हुई थी। उनके मुताबिक, भीड़ घटने का असर कुछ नेताओं के मनोबल पर भी दिखाई देने लगा था।
किसी भी बड़े आंदोलन में जनसमर्थन को उसकी ताकत के रूप में देखा जाता है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी आंदोलन की मांगों को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने में मदद करती है। इसके विपरीत यदि आंदोलन लंबा चलता है और लोगों की भागीदारी कम होने लगती है तो नेतृत्व पर रणनीति बदलने का दबाव भी बढ़ सकता है।
वांगचुक के दावे को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
आंदोलन खत्म करने को लेकर अंदर ही अंदर थी चर्चा
वांगचुक का दावा है कि आंदोलन समाप्त करने को लेकर नेतृत्व के भीतर कई बार बातचीत हुई थी। कुछ नेताओं का मानना था कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदर्शन को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आंदोलन जारी रखने को लेकर सभी नेताओं में समान उत्साह नहीं था। हालांकि, इन कथित आंतरिक चर्चाओं का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
ऐसे में वांगचुक का बयान आंदोलन के उस पहलू को सामने लाता है, जो प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक मंच से दिखाई नहीं देता था।
वांगचुक के दावे के बाद राजनीतिक चर्चा तेज
सोनम वांगचुक के बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आंदोलन के दौरान CJP के नेतृत्व की वास्तविक रणनीति क्या थी। क्या पार्टी के नेता वास्तव में प्रदर्शन को जल्द समाप्त करना चाहते थे या परिस्थितियों को देखते हुए आंदोलन के स्वरूप में बदलाव पर विचार किया जा रहा था—इन सवालों पर संबंधित पक्ष का जवाब स्थिति को और स्पष्ट कर सकता है।
फिलहाल यह बातें वांगचुक की ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं। CJP या संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आने पर आंदोलन की अंदरूनी परिस्थितियों की तस्वीर और साफ हो सकती है।
45 दिन के आंदोलन के बाद अब अंदरूनी घटनाक्रम चर्चा में
करीब डेढ़ महीने तक चले जंतर-मंतर आंदोलन ने अपनी मांगों और लंबे प्रदर्शन के कारण ध्यान खींचा था। इस दौरान सोनम वांगचुक का 26 दिनों का आमरण अनशन भी चर्चा का विषय रहा।
अब प्रदर्शन समाप्त होने के बाद वांगचुक ने जिस तरह आंदोलन के दौरान भीड़ कम होने और कुछ नेताओं द्वारा इसे खत्म करने की इच्छा जताने का दावा किया है, उससे आंदोलन की अंदरूनी परिस्थितियों पर नई बहस शुरू हो गई है।
आने वाले दिनों में यदि CJP नेतृत्व या आंदोलन से जुड़े अन्य प्रमुख लोग वांगचुक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंदोलन को जारी रखने या समाप्त करने को लेकर नेतृत्व के भीतर वास्तव में किस तरह की चर्चा चल रही थी।
