Sonam Wangchuk ने अनशन खत्म करने का किया ऐलान, सरकार के सामने रखीं तीन शर्तें
शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा अनियमितताओं और लद्दाख के मुद्दों को लेकर कर रहे थे आंदोलन
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk ने अपना अनशन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, उन्होंने सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर कुछ शर्तें भी रखी हैं। वांगचुक का कहना है कि यदि सरकार उनकी तीन शर्तों में से किसी एक को भी स्वीकार कर लेती है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, परीक्षा प्रणाली में सुधार और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उनके अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही थी। अब उन्होंने सरकार से संवाद और समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
एक्स पर दी अनशन खत्म करने की जानकारी
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनशन को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर देंगे, लेकिन इसके लिए सरकार को उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करनी होगी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि छात्रों और आम लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पहली शर्त: शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो
वांगचुक ने अपनी पहली शर्त के रूप में शिक्षा व्यवस्था में हालिया खामियों को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग रखी है। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
उनका कहना है कि देश के लाखों छात्र मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। इसलिए सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर भी चिंता जताई है। वांगचुक का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी और मजबूत परीक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
दूसरी शर्त: संसद में उठाया जाए मुद्दा
सोनम वांगचुक ने अपनी दूसरी शर्त में कहा कि यदि वह और CJP (Citizens for Justice and Peace) का नेतृत्व संसद के दरवाजे तक पहुंचते हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद एवं नेता इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने का आश्वासन देते हैं, तो वह अपना अनशन खत्म कर देंगे।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है। इसलिए छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।
वांगचुक का मानना है कि राजनीतिक दलों को जनहित के मुद्दों पर मिलकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
तीसरी शर्त: अस्पताल पहुंचकर भरोसा दिलाने की मांग
अपनी तीसरी शर्त में वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से संसद तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता है, तो अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल पहुंचकर उनकी मांगों को पूरा करने का भरोसा दिलाएं।
उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उनका उद्देश्य सरकार और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खोलना है।
सफदरजंग अस्पताल में हिरासत का लगाया आरोप
सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में अपनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और लोगों से बातचीत करने के अधिकारों को सीमित किया गया है।
वांगचुक ने इसे कथित तौर पर अवैध हिरासत जैसी स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने और लोगों से संवाद करने का अधिकार मिलना चाहिए।
हालांकि, इस मामले में प्रशासन और अस्पताल की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें लगातार चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।
अस्पताल ने जारी किया स्वास्थ्य बुलेटिन
इसी बीच सफदरजंग अस्पताल की ओर से स्वास्थ्य अपडेट जारी किया गया। अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक को VMMC और सफदरजंग अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
अस्पताल के अनुसार उनके महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पैरामीटर फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, ब्लड पैरामीटर्स की लगातार निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है। विशेषज्ञों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अस्पताल ने बताया कि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जटिलता को समय रहते पहचानने और उपचार सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेडिकल निगरानी की जा रही है। उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
28 जून से जारी था अनशन
बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर थे। उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था।
इस आंदोलन में NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग भी की गई।
वांगचुक ने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति की सुरक्षा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण, राज्य का दर्जा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार से संवाद की मांग की है।
लद्दाख के भविष्य और अधिकारों को लेकर उठाए सवाल
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति की सुरक्षा के लिए संवैधानिक संरक्षण आवश्यक है।
उन्होंने लद्दाख के लोगों की राजनीतिक भागीदारी और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझते हुए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की उम्मीद
वांगचुक के अनशन समाप्त करने के ऐलान के बाद अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। उनके द्वारा रखी गई शर्तों पर यदि सकारात्मक पहल होती है तो आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे किस तरह की बातचीत होती है और उठाए गए मुद्दों पर क्या समाधान निकलता है।
