अयोध्या राम मंदिर SIT जांच: दान पेटिका और चढ़ावे में अनियमितताओं की जांच तेज, ट्रस्ट और पुजारियों से पूछताछ जारी
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटिका से जुड़े कथित घोटाले और चढ़ावे में अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। इस मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) एक बार फिर अयोध्या पहुंचा है और मंदिर परिसर में गहन जांच शुरू कर दी गई है।
जांच दल मंगलवार को मंदिर के पुजारियों, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मामले से जुड़े संदिग्धों से पूछताछ करेगा। इससे पहले सोमवार को टीम ने मंदिर परिसर में कई घंटों तक दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और दान व्यवस्था से जुड़े सिस्टम की बारीकी से जांच की थी।
मंदिर परिसर में दस्तावेजों की गहन जांच
सोमवार को अयोध्या पहुंची SIT ने सबसे पहले दान गणना स्थल और चढ़ावे की गिनती से जुड़ी पूरी व्यवस्था का निरीक्षण किया। टीम ने यह समझने की कोशिश की कि दान राशि की गणना, रिकॉर्डिंग और जमा करने की प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है।
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रजिस्टरों को टीम ने अपने कब्जे में लिया है। इसके अलावा निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा सिस्टम की भी जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी प्रकार की अनियमितता कैसे और कहां से हुई।
चंपत राय से बंद कमरे में लंबी पूछताछ
जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से SIT अधिकारियों ने बंद कमरे में कई घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान टीम ने पूरे दान प्रबंधन सिस्टम, रिकॉर्डिंग प्रक्रिया और वित्तीय प्रवाह से जुड़े कई सवाल पूछे।
पूछताछ के समय तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। SIT ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भी विस्तार से अध्ययन किया है।
जांच के दायरे में ट्रस्ट और प्रबंधन
SIT की जांच केवल दान पेटिका तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर के समग्र वित्तीय प्रबंधन और व्यवस्था पर भी केंद्रित है। टीम यह जांच कर रही है कि क्या दान राशि के रिकॉर्ड और वास्तविक जमा में कोई अंतर है।
इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी स्तर पर पारदर्शिता की कमी रही है या फिर व्यवस्था में तकनीकी और प्रशासनिक खामियां मौजूद हैं।
श्रद्धालुओं में बढ़ी चर्चा
अयोध्या में इस जांच को लेकर संतों, महंतों और श्रद्धालुओं के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है। अधिकांश लोग इस मामले को बेहद संवेदनशील मान रहे हैं क्योंकि यह सीधे करोड़ों भक्तों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की पारदर्शिता और प्रतिष्ठा बनी रहे।
SIT की जांच टीम और समयसीमा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित इस SIT में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार शामिल हैं।
टीम को जांच पूरी करने के लिए समयसीमा भी दी गई है:
- 7 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट
- 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश
इससे साफ है कि सरकार इस मामले को तेजी से निपटाना चाहती है।
एफआईआर दर्ज करने की मांग
इस बीच धर्म सेना प्रमुख और पूर्व शिवसेना नेता संतोष दुबे ने थाना राम जन्मभूमि में तहरीर देकर चार नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि दान व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
जांच के दो चरण
सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच दो चरणों में की जा रही है।
पहले चरण में यह पता लगाया जा रहा है कि आरोप कितने सही हैं, अनियमितता कब से चल रही थी और इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई।
दूसरे चरण में जिम्मेदार लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और सिस्टम में मौजूद खामियों की पहचान कर सुधारात्मक सुझाव तैयार किए जाएंगे।
सुधारात्मक सुझावों पर भी जोर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदेन सदस्य और भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि जांच केवल दोषियों को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सिस्टम सुधार पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता से बचने के लिए मजबूत पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।
निष्कर्ष
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटिका और चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और हर छोटे-बड़े पहलू को ध्यान में रखकर दस्तावेजों, रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस जांच से कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं, जो पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल अयोध्या में स्थिति पूरी तरह शांत बनी हुई है और सामान्य श्रद्धालुओं की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि देशभर में श्रद्धालुओं और भक्तों की नजरें लगातार SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उस पर उचित कार्रवाई होगी।
सभी पक्षों को उम्मीद है कि जांच एजेंसियां जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी और सत्य स्थिति सामने आ सकेगी, जिससे मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता और विश्वास और मजबूत होगा।
