कुक्षी के कोणदा-दोगावां में आयोजित सिर्वी समाज सकल पंच सम्मेलन में आई पंथ धर्मगुरु दीवान श्री माधवसिंहजी और जति श्री महेन्द्रजी महाराज ने सामाजिक एकता, निष्पक्ष पंच व्यवस्था, समाज सेवा और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।
कुक्षी में हुआ भव्य सिर्वी समाज सकल पंच सम्मेलन
रिपोर्ट: नरेंद्र सिरवी
कोणदा/दोगावां/कुक्षी। सिर्वी समाज सकल पंच सम्मेलन का भव्य आयोजन रविवार को श्री जैकलजी मंदिर, कोणदा-दोगावां में अखिल भारतीय सिर्वी महासभा जिला धार-निमाड़ (कुक्षी, मनावर एवं गंधवानी) के सहयोग से किया गया। सम्मेलन में समाज की एकता, पंच परंपरा, सामाजिक संगठन तथा आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री आई माताजी की आरती से हुआ। इसके बाद श्री जैकलजी नर्मदा आश्रम के संत श्री राम बाबा ने आईपंथ के मुख्य धाम श्री आई माताजी मंदिर बिलाड़ा के मुख्य पुजारी जति श्री महेन्द्रजी महाराज का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। स्वागत उद्बोधन वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश जी भायल (कोणदा) ने दिया।
धर्मगुरु दीवान श्री माधवसिंहजी का प्रेरक संदेश
आई पंथ के धर्मगुरु दीवान श्री माधवसिंहजी ने बिलाड़ा धाम से ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सिर्वी समाज सकल पंच सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता और सेवा भावना होती है। श्रेष्ठ पंच परंपरा समाज की पहचान है और इसे मजबूत बनाए रखना प्रत्येक समाजजन का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ समाज सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है तथा आई माताजी के आदर्शों पर चलते हुए समाज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
पंच केवल प्रतिनिधि नहीं, न्याय और विश्वास का प्रतीक
मुख्य अतिथि आईपंथ के जति श्री महेन्द्रजी महाराज ने कहा कि पंच केवल समाज का प्रतिनिधि नहीं होता बल्कि न्याय, मर्यादा और विश्वास का प्रतीक होता है।
उन्होंने कहा कि पंचों को निष्पक्ष रहकर समाजहित में निर्णय लेने चाहिए। “पंच परमेश्वर” की परंपरा भारतीय संस्कृति की महान विरासत है, जिसे आगे बढ़ाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वज हर महत्वपूर्ण अवसर पर बिलाड़ा धाम जाकर आई माताजी का आशीर्वाद प्राप्त करते थे, जिससे समाज संगठित और अनुशासित बना रहता था। आज भी समाज को उसी परंपरा से जुड़े रहने की आवश्यकता है।
संगठन की मजबूती पर दिया विशेष जोर
अखिल भारतीय सिर्वी महासभा निमाड़ जिलाध्यक्ष विक्रम जी चोयल (अमलाल) ने कहा कि मजबूत संगठन की नींव पंच व्यवस्था पर टिकी होती है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का विश्वास इस व्यवस्था पर बना रहे, इसके लिए समय के अनुसार स्वयं को अपडेट करना जरूरी है। कृषि के साथ-साथ व्यवसाय, शिक्षा और आधुनिक क्षेत्रों में भी समाज को आगे बढ़ना चाहिए।
वरिष्ठ पंचों ने रखे विचार
वरिष्ठ पंच घिसाजी जी मुकाती (बड़दा) ने कहा कि हमारे पूर्वज कम संसाधनों और सीमित शिक्षा के बावजूद समाज को एकजुट रखते थे, जबकि आज शिक्षा बढ़ने के बावजूद आपसी मतभेद बढ़ना चिंता का विषय है।
उन्होंने समाजजनों से आपसी प्रेम, भाईचारा और सहयोग की भावना बनाए रखने का आग्रह किया।
कुक्षी तहसील अध्यक्ष विजय जी मुलेवा तथा पूर्व तहसील अध्यक्ष जितेन्द्र जी शिन्दे (कोणदा) ने भी सामाजिक एकता एवं संगठन को मजबूत करने पर अपने विचार रखे।
पौधारोपण और सहभोज
सम्मेलन के दौरान जिला संगठन की ओर से आश्रम परिसर में 21 फलदार पौधों का पौधारोपण किया गया।
इसके बाद श्री आईजी सेवा समिति दोगावां द्वारा सभी पंचों, समाजसेवियों एवं अतिथियों के लिए सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
सम्मेलन का संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का संचालन मोहन जी बर्फा (LIC विकास अधिकारी, कोणदा) ने किया।
आभार प्रदर्शन समाजसेवी लालू जी गेहलोत (दोगावां) ने व्यक्त किया।
सम्मेलन को सफल बनाने में इनका विशेष सहयोग रहा
इस आयोजन को सफल बनाने में—
- लक्ष्मण जी राठौर
- लक्ष्मण जी सोलंकी (दोगावां)
- लादाजी अगल्चा
- चेनाजी गेहलोत
- काशीनाथ जी पंवार (कोणदा)
- संपूर्ण आश्रम समिति
- अखिल भारतीय सिर्वी महासभा जिला धार-निमाड़
- श्री आईजी सेवा समिति दोगावां
का विशेष योगदान रहा।
निष्कर्ष
सिर्वी समाज सकल पंच सम्मेलन केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज की गौरवशाली पंच परंपरा, संगठनात्मक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। धर्मगुरुओं एवं समाज के वरिष्ठजनों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि समाज सेवा, निष्पक्ष पंच व्यवस्था और परंपराओं का संरक्षण जारी रहा तो समाज निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा।

