आधार और फिंगरप्रिंट से SIM फ्रॉड का खुलासा, ग्राहकों के नाम पर चुपचाप एक्टिव किए जा रहे थे फर्जी नंबर
e-KYC सिस्टम के दुरुपयोग से साइबर अपराध का नया तरीका
अगर आपने कभी नया SIM कार्ड लेने के लिए आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट दिया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की जांच के दौरान ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आधार आधारित e-KYC प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ अधिकृत SIM विक्रेता ग्राहकों की जानकारी और बायोमेट्रिक सत्यापन का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। ग्राहक जिस एक मोबाइल नंबर के लिए SIM खरीदने पहुंचते थे, उसी प्रक्रिया का उपयोग कर उनके नाम पर अतिरिक्त SIM कार्ड भी एक्टिव कर दिए जाते थे। इन नंबरों का इस्तेमाल बाद में साइबर अपराधी गिरोह ठगी और अन्य अपराधों के लिए करते थे।
ऑपरेशन साइबर शील्ड में हुआ रैकेट का खुलासा
छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान दो अधिकृत SIM रिटेलरों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी SIM जारी करने की प्रक्रिया में आधार आधारित e-KYC सिस्टम का दुरुपयोग करते थे। ग्राहक की पहचान सत्यापित करने के लिए लिए गए फिंगरप्रिंट और आई-ब्लिंक वेरिफिकेशन का इस्तेमाल दोबारा करके उनके नाम पर बिना जानकारी दिए अतिरिक्त मोबाइल नंबर जारी कर दिए जाते थे।
ग्राहकों को नहीं होती थी फर्जी SIM की जानकारी
पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल में सबसे बड़ी बात यह थी कि ग्राहकों को पता ही नहीं चलता था कि उनके नाम पर एक से ज्यादा SIM कार्ड एक्टिव हो चुके हैं।
ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार एक SIM कार्ड लेकर चले जाते थे, लेकिन पीछे से उनके आधार विवरण का उपयोग कर अन्य नंबर भी जारी कर दिए जाते थे। बाद में यही मोबाइल नंबर साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा दिए जाते थे।
फर्जी SIM से किए जा रहे थे कई तरह के अपराध
जांच में पता चला है कि इन अवैध SIM कार्डों का इस्तेमाल देशभर में सक्रिय साइबर अपराधी गिरोह कर रहे थे। इन नंबरों से फर्जी KBC लॉटरी, व्हाट्सऐप फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, ऑनलाइन निवेश ठगी और अन्य वित्तीय अपराध किए जा रहे थे।
क्योंकि ये मोबाइल नंबर आम लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड होते थे, इसलिए जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। अपराध के बाद शुरुआती जांच में वही व्यक्ति सामने आता था जिसके नाम पर SIM जारी किया गया था।
दो साइबर ठगी मामलों की जांच से खुला नेटवर्क
इस पूरे रैकेट का खुलासा दो अलग-अलग साइबर अपराध मामलों की जांच के दौरान हुआ।
पहले मामले में गरियाबंद जिले के एक व्यक्ति से फर्जी निवेश योजना के नाम पर करीब 7.9 लाख रुपये की ठगी की गई थी। दूसरे मामले में ठगों ने खुद को KBC लॉटरी का प्रतिनिधि बताकर एक व्यक्ति को इनाम जीतने का झांसा दिया और उससे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगे।
इन मामलों की जांच करते हुए पुलिस संदिग्ध मोबाइल नंबरों और SIM एक्टिवेशन रिकॉर्ड तक पहुंची। इसके बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलती गईं।
बायोमेट्रिक सत्यापन का गलत इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी e-KYC प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर ग्राहकों से कई बार बायोमेट्रिक सत्यापन करवाते थे। कई मामलों में ग्राहक द्वारा आधार कार्ड की कॉपी देने के बाद आरोपी खुद डिजिटल प्रक्रिया पूरी कर अतिरिक्त SIM कार्ड एक्टिव कर देते थे।
आरोपियों ने कथित रूप से ग्राहकों को इस बात की जानकारी नहीं दी कि उनके नाम पर अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं।
तकनीकी जांच से पहुंची पुलिस आरोपियों तक
पुलिस ने इस गिरोह तक पहुंचने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के SIM एक्टिवेशन रिकॉर्ड, सब्सक्राइबर डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और अन्य डिजिटल जानकारी जुटाई।
जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने दो Point of Sale (POS) एजेंटों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों से SIM एक्टिवेशन प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर काम कर रहा था और इसके जरिए बड़ी संख्या में फर्जी SIM कार्ड जारी किए गए हो सकते हैं।
अब जांच एजेंसियां उन साइबर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिन्होंने इन अवैध नंबरों को खरीदा और उनका इस्तेमाल अपराधों में किया। पुलिस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि नया SIM कार्ड लेते समय e-KYC प्रक्रिया पर खुद नजर रखें। यह सुनिश्चित करें कि उनके नाम पर केवल वही मोबाइल नंबर एक्टिव हो रहा है जिसकी उन्होंने मांग की है।
इसके अलावा लोग समय-समय पर यह भी जांच सकते हैं कि उनके आधार नंबर से कितने मोबाइल कनेक्शन जुड़े हुए हैं। किसी भी अनजान नंबर की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित विभाग या टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करना चाहिए।
सावधानी ही साइबर अपराध से बचाव का तरीका
डिजिटल दौर में आधार और बायोमेट्रिक जानकारी बेहद संवेदनशील होती है। SIM खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में सामने आया यह मामला बताता है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पहले से अधिक जरूरी हो गई है।
