बढ़ती महंगाई से महिलाओं में नाराजगी, जनप्रतिनिधियों से पूछा- रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों पर कब लगेगी लगाम?
सिलवानी की ग्रामीण महिलाओं ने कहा- महंगाई से बिगड़ रहा घर का बजट, बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर त्योहार मनाना तक हुआ महंगा; सरकार से राहत की मांग
संवाददाता – वैभव जैन मस्ताना
सिलवानी। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों को लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। महिलाओं का कहना है कि लगातार बढ़ते घरेलू खर्च के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। खाद्य सामग्री से लेकर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और त्योहारों तक पर होने वाला खर्च परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल रहा है।
महिलाओं ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से महंगाई के मुद्दे पर प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता तभी वास्तविक राहत दे सकती है, जब आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी आम परिवार की पहुंच में रहें।
‘आर्थिक सहायता मिल रही, लेकिन घरेलू खर्च भी बढ़ रहा’
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सरकार की ओर से महिलाओं के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं और आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, लेकिन दूसरी ओर रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च बढ़ने से परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ महिलाओं ने लाड़ली बहना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि योजना से मिलने वाली सहायता उपयोगी है, लेकिन बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने के कारण परिवार के मासिक खर्च को नियंत्रित करना कठिन हो रहा है।
महिलाओं का कहना है कि सरकार को आर्थिक सहायता देने के साथ महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर भी ध्यान देना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से भी महिलाओं ने किए सवाल
महिलाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि घर-घर पहुंचकर जनता से संपर्क करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद आम लोगों की समस्याओं को भी उसी गंभीरता से सुनना चाहिए।
महिलाओं ने मांग की कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि महंगाई और घरेलू बजट से जुड़ी उनकी समस्याओं को सरकार के सामने रखें और राहत दिलाने के लिए आवश्यक पहल करें।
उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सबसे बड़ी चिंता रोजमर्रा के खर्च को पूरा करना है। ऐसे में महंगाई जैसे मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों को जनता और सरकार के बीच प्रभावी माध्यम बनना चाहिए।
विनीता कुशवाह बोलीं- महंगाई से बिगड़ रहा घर का बजट
स्थानीय महिला विनीता कुशवाह ने कहा कि बढ़ते खर्च का सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ रहा है। घर की आय सीमित होने के कारण एक तरफ खर्च बढ़ने पर दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है।
उनका कहना है कि खाद्य सामग्री और घरेलू उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के खर्च में वृद्धि होने पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
‘शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च संभालना भी मुश्किल’
वहीं सुनीता ने कहा कि महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य, रिश्तेदारी में आने-जाने और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने तक का खर्च बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय परिवार का खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में सीमित आय वाले परिवारों के लिए सभी जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
महिलाओं ने सरकार से मांग की कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी की जाए और यदि कहीं जमाखोरी या कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने जैसी गतिविधियां सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सरकार से राहत की उम्मीद
महिलाओं का कहना है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक संबल देना है। इसलिए बाजार में बढ़ते खर्च से मिलने वाली सहायता का प्रभाव कम न हो, इसके लिए महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।
ग्रामीण महिलाओं ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने तथा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों से राहत दिलाने के लिए प्रभावी प्रयास करने की मांग की है।
