दस लक्षण महापर्व में अक्षत और आर्य सिंघई ने रखे दसों दिन उपवास
सिलवानी संवाददाता वैभव जैन मस्ताना | सिलवानी
Silwani नगर के प्रतिष्ठित सिंघई परिवार के दो बच्चों ने जैन समुदाय के दस लक्षण महापर्व के दौरान लगातार दस दिनों तक उपवास रखकर धर्म के प्रति अपनी आस्था और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। आशीष सिंघई के पुत्र अक्षत सिंघई और पुत्री आर्य सिंघई ने इंदौर में रहकर महापर्व के पहले दिन से अंतिम दिन तक उपवास किया।
दोनों भाई-बहन ने दस दिनों तक उपवास के साथ धार्मिक आराधना में समय बिताया। परिजनों के अनुसार, इस दौरान दोनों ने मोबाइल और अन्य दुनियादारी की गतिविधियों से दूरी बनाए रखी तथा धार्मिक साधना और आराधना पर ध्यान केंद्रित किया।

छोटी उम्र में लिया बड़ा धार्मिक संकल्प
दस लक्षण महापर्व के दौरान लगातार दस दिनों तक उपवास करना दोनों बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक संकल्प रहा। परिवार और समाज के लोगों ने उनके इस संकल्प की सराहना की और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
बताया गया कि अक्षत और आर्य सिंघई ने इंदौर में ही रहकर दसों दिन की उपवास साधना पूरी की। महापर्व के दौरान दोनों भाई-बहन प्रभु की आराधना और धार्मिक गतिविधियों में लीन रहे।
धर्म के प्रति समर्पण की हुई सराहना
सिंघई परिवार के बच्चों द्वारा कम उम्र में लिया गया यह धार्मिक संकल्प स्थानीय जैन समाज के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजजनों ने कहा कि धार्मिक पर्व के दौरान बच्चों की ऐसी सहभागिता परिवार और समाज के लिए उत्साह का विषय है।
दस लक्षण महापर्व जैन धर्म में आत्मशुद्धि, संयम और धार्मिक साधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसी दौरान अक्षत और आर्य सिंघई ने दस दिनों तक उपवास कर अपनी धार्मिक साधना पूरी की।
