श्री पारसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर सिलवानी में भव्य धार्मिक आयोजन
सिलवानी संवाददाता वैभव जैन मस्ताना
मुनिश्री श्रेयांश सागर जी के परम सानिध्य में हुए अभिषेक, शांतिधारा और धार्मिक अनुष्ठान
Silwani। विश्व वंदनीय चिंतामणि श्री पारसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस के पावन अवसर पर सिलवानी स्थित अखंड दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मुनिश्री श्रेयांश सागर जी महाराज के परम सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान पारसनाथ की आराधना कर धार्मिक लाभ प्राप्त किया।
मोक्ष कल्याणक दिवस जैन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन तीर्थंकरों के मोक्ष प्राप्ति के प्रसंग को स्मरण करते हुए विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा और निर्वाण लाडू अर्पित करने सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। सिलवानी में भी समाजजनों ने पूरी श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ इस पावन दिवस को मनाया।
अखंड दिगंबर जैन मंदिर में बना भक्तिमय माहौल
मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर सुबह से ही अखंड दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भक्तिमय वातावरण बना रहा।
समाज के लोगों ने भगवान पारसनाथ की पूजा-अर्चना की और धार्मिक विधि-विधान में सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए जीवन में संयम, अहिंसा, सत्य और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
पूरे आयोजन के दौरान जैन समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
प्रथम बोली के माध्यम से निर्वाण लाडू अर्पित
कार्यक्रम में श्री राजेंद्र वेधराज एवं श्री सुनील वेधराज परिवार द्वारा प्रथम बोली के माध्यम से भगवान श्री पारसनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्वाण लाडू अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान पारसनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और मोक्ष कल्याणक दिवस की आध्यात्मिक महत्ता को स्मरण किया।
लाडू अर्पण के बाद भगवान का विधि-विधान से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई।
भगवान पारसनाथ का अभिषेक और शांतिधारा
मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर भगवान श्री पारसनाथ का अभिषेक और शांतिधारा धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। समाजबंधुओं ने इस धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
शांतिधारा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष सुख, शांति और समाज के कल्याण की भावना से पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में धार्मिक मंत्रोच्चार और भक्ति का वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए आत्मकल्याण और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा ली।
मुनिश्री श्रेयांश सागर जी के मंगल प्रवचन
कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री श्रेयांश सागर जी महाराज ने भगवान श्री पारसनाथ के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुनिश्री ने अपने मंगल प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान पारसनाथ के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने धर्म, संयम, आत्मशुद्धि, अहिंसा और सदाचार के महत्व को समझाया।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बाहरी आडंबर के बजाय आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। धार्मिक जीवन का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जैन धर्म में मोक्ष कल्याणक का विशेष महत्व
जैन धर्म में मोक्ष कल्याणक दिवस को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला अवसर माना जाता है। तीर्थंकरों के जीवन में मोक्ष प्राप्ति को आत्मा की सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था के रूप में देखा जाता है।
भगवान पारसनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। उनके जीवन और उपदेशों में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे सिद्धांतों को विशेष महत्व दिया गया है।
मोक्ष कल्याणक दिवस श्रद्धालुओं को यह संदेश देता है कि मनुष्य को अपने जीवन में आत्मसंयम, सदाचार और आध्यात्मिक चिंतन को स्थान देना चाहिए। यही भाव धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज तक पहुंचाया जाता है।
श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
सिलवानी में आयोजित कार्यक्रम में जैन समाज के बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने सहभागिता की। सभी ने धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान पारसनाथ की पूजा-अर्चना की और मुनिश्री के मंगल प्रवचनों का लाभ लिया।
कार्यक्रम में समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच आपसी सौहार्द और धार्मिक एकता का वातावरण देखने को मिला।
धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प
ऐसे धार्मिक आयोजन समाज की नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भगवान पारसनाथ के जीवन और संदेश को समझने से बच्चों और युवाओं को अहिंसा, संयम तथा आत्मानुशासन जैसे मूल्यों की प्रेरणा मिलती है।
मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर होने वाले आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि समाज को आध्यात्मिक चिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनते हैं।
सिलवानी के अखंड दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम ने भी श्रद्धालुओं को भगवान पारसनाथ के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
आस्था और भक्ति के साथ संपन्न हुआ आयोजन
दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों में समाजजनों की सक्रिय सहभागिता रही। अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण लाडू अर्पण और मंगल प्रवचन के माध्यम से मोक्ष कल्याणक दिवस को श्रद्धापूर्वक मनाया गया।
मुनिश्री श्रेयांश सागर जी के सानिध्य ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और भगवान पारसनाथ के जीवन तथा संदेश से प्रेरणा ली।
इस अवसर पर उपस्थित समाजबंधुओं ने भगवान पारसनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए समाज और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सद्भाव की कामना की।
मोक्ष कल्याणक दिवस का यह आयोजन सिलवानी के जैन समाज के लिए श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक चेतना का अवसर बना। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समाज में अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण के संदेश को भी मजबूत किया गया।
संवाददाता: वैभव जैन मस्ताना, सिलवानी
