सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा सिलवानी सिविल अस्पताल, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं
विशेषज्ञ डॉक्टरों, पर्याप्त स्टाफ और जांच मशीनों की कमी का आरोप; नगर से दूर अस्पताल होने के कारण आवागमन में भी परेशानी
दैनिक स्वराज वाणी
संवाददाता—वैभव जैन मस्ताना
सिलवानी। नगर का सिविल अस्पताल आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल का नया भवन तो बनाकर तैयार कर दिया गया, लेकिन यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों, पर्याप्त स्टाफ, जांच मशीनों और जरूरी दवाओं का अभाव बना हुआ है। इसके चलते मरीजों को उपचार और जांच के लिए निजी अस्पतालों तथा मेडिकल स्टोरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सिलवानी सिविल अस्पताल की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से गरीब और जरूरतमंद परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
डॉक्टर लिखते हैं दवाएं, अस्पताल में नहीं मिलतीं पूरी
अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीजों के अनुसार चिकित्सक उनकी जांच कर दवाएं लिखते हैं, लेकिन सभी दवाएं अस्पताल के औषधि वितरण केंद्र से उपलब्ध नहीं हो पातीं। कई बार मरीजों को आवश्यक दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बाहर से महंगी दवाएं खरीदना मुश्किल हो जाता है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल में दवाओं की कमी को लेकर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से शिकायत करने पर उपलब्ध स्टॉक के अनुसार दवाएं वितरित करने की बात कही जाती है। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि शासन से जितनी दवाएं प्राप्त होती हैं, उनका वितरण मरीजों को किया जाता है। पर्याप्त आपूर्ति मिलने पर दवाएं देने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
विशेषज्ञ डॉक्टर और जांच मशीनें उपलब्ध नहीं
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त नियुक्ति नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त कई आवश्यक स्वास्थ्य जांचों के लिए मशीनें और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। गंभीर बीमारी या विशेष जांच की आवश्यकता होने पर मरीजों को दूसरे शहरों अथवा निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल भवन तैयार कर देने से बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित नहीं हो सकती। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, आवश्यक मशीनों और पर्याप्त दवाओं की नियमित उपलब्धता भी जरूरी है। इन सुविधाओं के बिना अस्पताल मरीजों को समुचित उपचार नहीं दे सकता।
निजी स्वास्थ्य सेवाओं का सहारा लेने को मजबूर मरीज
सरकारी अस्पताल में दवाओं और जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीज निजी मेडिकल स्टोर, जांच केंद्र और अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हैं। इससे उपचार का खर्च कई गुना बढ़ जाता है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है।
लोगों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का उद्देश्य सभी नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सुलभ और कम खर्च में उपचार उपलब्ध कराना है। यदि अस्पताल में दवाएं, जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगे तो मरीजों को सरकारी व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
नगर से दूर होने के कारण आवागमन में परेशानी
नागरिकों के अनुसार नया सिविल अस्पताल आबादी वाले क्षेत्र से काफी दूर स्थित है। अस्पताल तक आने-जाने में मरीजों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात या आपातकालीन स्थिति में समस्या और अधिक बढ़ जाती है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि नगर के पुराने स्वास्थ्य केंद्र अथवा उपलब्ध पुराने अस्पताल भवन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किया जाए। इससे नगर और आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों को सामान्य उपचार के लिए दूर स्थित सिविल अस्पताल तक नहीं जाना पड़ेगा। गंभीर मरीजों को ही आवश्यकता के अनुसार सिविल अस्पताल भेजा जा सकेगा।
शासन और स्वास्थ्य विभाग से सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों ने शासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सिलवानी सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं आवश्यक कर्मचारियों के रिक्त पद शीघ्र भरे जाएं। जरूरी जांच मशीनें स्थापित करने के साथ दवाओं की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही मरीजों के लिए अस्पताल तक सुगम आवागमन की व्यवस्था करने तथा नगर के पुराने स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में पुनः संचालित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों और मांगों पर स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। विभागीय प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
