चांदी में 7 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट, 2.28 लाख के नीचे पहुंचा भाव; जानें अब कितनी है 1 किलो की कीमत
MCX पर चांदी में तेज उतार-चढ़ाव, ऊंचे स्तर से बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों और खरीदारों की नजर कीमतों पर
नई दिल्ली। पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ रही सोने-चांदी की कीमतों के बीच सोमवार, 28 सितंबर 2026 को चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी के वायदा भाव में कारोबार के दौरान 7 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और कीमत 2.28 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे आ गई। कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों के साथ आभूषण और चांदी के सामान की खरीदारी करने वाले ग्राहकों का भी ध्यान खींचा है।
हालांकि MCX का भाव वायदा बाजार का भाव होता है। अलग-अलग शहरों के सर्राफा बाजार में वास्तविक खुदरा कीमत जीएसटी, स्थानीय प्रीमियम और अन्य शुल्क के कारण इससे अलग हो सकती है।
कितनी रह गई एक किलो चांदी की कीमत?
सोमवार को कारोबार के दौरान MCX पर चांदी की कीमत में तेज बिकवाली देखने को मिली। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के मुताबिक चांदी का भाव गिरकर करीब 2.27 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। दिन के अलग-अलग समय में कीमत में लगातार बदलाव होने के कारण सटीक भाव बदल सकता है।
इससे पहले चांदी के भाव में लगातार तेजी देखने को मिली थी और कीमतें ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं। ऐसे में एक ही कारोबारी सत्र में सात हजार रुपये से अधिक की गिरावट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सोना-चांदी ने पिछले वर्षों में दिखाई बड़ी तेजी
पिछले कुछ वर्षों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। विशेष रूप से चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग रहती है।
यही कारण है कि चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां बदलने पर इसके भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है।
क्यों घटती-बढ़ती है चांदी की कीमत?
चांदी की कीमत को कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभावित करते हैं। अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमत, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इनमें प्रमुख हैं।
इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी भारत में सोने-चांदी के भाव पर असर डालती है। भारत बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं का आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का असर घरेलू बाजार तक पहुंचता है।
क्या ग्राहकों को मिलेगा गिरावट का पूरा फायदा?
MCX पर सात हजार रुपये से अधिक की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि देश के हर शहर में सर्राफा बाजार में चांदी ठीक इतनी ही सस्ती हो गई है।
MCX पर मुख्य रूप से वायदा अनुबंधों में कारोबार होता है, जबकि खुदरा बाजार में चांदी खरीदने पर जीएसटी, स्थानीय डीलर प्रीमियम और उत्पाद के प्रकार के अनुसार अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकते हैं। चांदी के सिक्के, बार और आभूषणों की कीमतों में भी अंतर हो सकता है।
इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा सर्राफा भाव जांचना जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
चांदी में एक दिन की बड़ी गिरावट को देखकर भविष्य की दिशा तय नहीं की जा सकती। कमोडिटी बाजार में कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञ आमतौर पर कीमती धातुओं में निवेश को लंबी अवधि के पोर्टफोलियो और जोखिम क्षमता के आधार पर देखने की सलाह देते हैं। केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर निवेश का निर्णय लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
खरीदारी से पहले जरूर जांचें आज का भाव
त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन में भारत में सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में आई गिरावट खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर सकती है।
फिलहाल 28 सितंबर को MCX पर आई तेज गिरावट के बाद चांदी का भाव 2.28 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे पहुंचने की खबर है। हालांकि बाजार में भाव लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए चांदी खरीदने से पहले अपने शहर का लाइव रेट और सभी लागू शुल्क जरूर जांच लें।
