सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 का श्रुत पंचमी पर भव्य समापन हुआ। 17 वर्षों में 4000 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। जानिए शिविर की विशेषताएं, कार्यक्रम और जैन संस्कृति संरक्षण की प्रेरणादायक पहल।
रिपोर्ट: भरत सेठ, घुवारा
सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 का भव्य समापन
घुवारा। सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 का श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर भव्य समापन हुआ। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एवं गुरुदत्तादि महामुनियों की तपोभूमि से पवित्र सिद्ध क्षेत्र द्रोणागिरी की तलहटी में स्थित तीर्थधाम सिद्धायतन में 14 जून से 19 जून तक आयोजित 17वें आवासीय बाल संस्कार एवं प्रवेश पात्रता शिक्षण शिविर में बच्चों को जैन संस्कृति, नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर का मुख्य उद्देश्य
सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 का उद्देश्य बच्चों में जैन संस्कृति, नैतिकता, अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना था। शिविर में ऐसे विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया जो सिद्धायतन में निवास कर अध्ययन करने के इच्छुक हैं।शिविर के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, सदाचार, व्यक्तित्व विकास तथा जीवन मूल्यों की शिक्षा दी गई।
श्रुत पंचमी के अवसर पर हुआ समापन समारोह
श्रुत पंचमी के शुभ अवसर पर आयोजित समापन समारोह में संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के अनेक जिलों से बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. गुलाबचंद सेठ ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सुरभि शर्मा (भगवा टीआई) उपस्थित रहीं।
17 वर्षों में 4000 बच्चों को मिला संस्कारों का मार्गदर्शन
विद्वान गणतंत्र जी ओजस्वी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि जैसे धागे के बिना सुई खो जाए तो उसे ढूंढना कठिन होता है, उसी प्रकार संस्कारों के बिना मनुष्य जीवन और जैन कुल का महत्व समझना कठिन है।उन्होंने बताया कि पिछले 17 वर्षों में लगभग 4000 बच्चों ने इस शिविर में भाग लिया है।
धर्म मार्ग पर अग्रसर हुए हजारों विद्यार्थी
- लगभग 1500 विद्यार्थी विभिन्न धार्मिक संस्थानों में अध्ययनरत हैं।
- 700 से अधिक विद्यार्थी केवल सिद्धायतन से शिक्षा प्राप्त कर शासकीय एवं धार्मिक संस्थाओं में सेवाएं दे रहे हैं।
- कई छात्र समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं।
शिविर में बच्चों ने सीखे जीवनोपयोगी संस्कार
इस वर्ष आयोजित सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 में लगभग 80 बच्चों ने भाग लिया।शिविर के दौरान बच्चों को निम्न विषयों का प्रशिक्षण दिया गया—
- जैन दर्शन
- नैतिक शिक्षा
- व्यक्तित्व विकास
- आध्यात्मिक ज्ञान
- योग एवं व्यायाम
- सांस्कृतिक गतिविधियां
- धार्मिक कथाएं
- अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता
समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया।
ऐसी रही शिविर की दैनिक दिनचर्या
शिविर की अनुशासित दिनचर्या बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी।
प्रतिदिन का कार्यक्रम
- प्रातः 5 बजे जागरण
- प्रार्थना एवं ध्यान
- योग एवं व्यायाम
- जिनेंद्र अभिषेक एवं पूजन
- शैक्षणिक एवं धार्मिक कक्षाएं
- दोपहर 3 बजे सामूहिक अध्ययन
- शाम 4 बजे खेलकूद गतिविधियां
- रात्रि 7 बजे जिनेंद्र भक्ति
- रात्रि 8 बजे आध्यात्मिक एवं पौराणिक कथाएं
- रात्रि 8:30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में उपस्थित रहे प्रमुख अतिथि
समापन समारोह में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, विद्वान और समाजसेवी उपस्थित रहे।मुख्य रूप से उपस्थित रहे—
- सनत कुटौरा (मंत्री, द्रोणागिरी क्षेत्र)
- आलोक दाऊ (अध्यक्ष, सिद्धायतन)
- प्रद्युमन फौजदार (मंत्री)
- पं. स्वतंत्र शास्त्री
- नीलेश शास्त्री
- रोहित शास्त्री
- पं. रत्नेश शास्त्री
- पं. पंकज शास्त्री
- पं. लल्लन प्रसाद जी
- जमनाप्रसाद बक्सवाहा
- कपूरचंद्र कर्री
- संतोष भगवा
- भरत सेठ, घुवारा
अगले वर्ष नए विद्यालय भवन में होगा शिविर
सिद्धायतन के मंत्री प्रद्युमन फौजदार ने जानकारी दी कि आगामी वर्ष तक नए विद्यालय भवन की एक मंजिल का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा।उन्होंने बताया कि अगले वर्ष का सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर नए विद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा तथा आवासीय सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
जैन संस्कृति संरक्षण की अनूठी पहल
आज के आधुनिक और तकनीकी युग में जहां बच्चे पारंपरिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 जैसी पहलें नई पीढ़ी को संस्कृति, धर्म और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।यह शिविर केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि बच्चों को एक जिम्मेदार, संस्कारी और जागरूक नागरिक बनाने का माध्यम भी बन रहा है।
निष्कर्ष
सिद्धायतन द्रोणगिरि बाल संस्कार शिविर 2026 का सफल आयोजन जैन संस्कृति के संरक्षण और भावी पीढ़ी के नैतिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। 17 वर्षों से निरंतर चल रही यह पहल हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है और समाज को संस्कारित युवा प्रदान कर रही है।कार्यक्रम के अंत में सिद्धायतन के अध्यक्ष आलोक दाऊ ने सभी अभिभावकों, अतिथियों, विद्वानों एवं बच्चों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन नीलेश शास्त्री, घुवारा द्वारा किया गया।
