श्रुत पंचमी महोत्सव के अवसर पर त्रि-दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन का शुभारंभ
प्रस्तावना एवं आयोजन का परिचय
विदिशा, मध्य प्रदेश स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा द्वारा श्रुत पंचमी के पावन एवं आध्यात्मिक पर्व के उपलक्ष्य में एक भव्य त्रि-दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 19 जून 2026, शुक्रवार से प्रारंभ होकर 21 जून 2026, रविवार तक निरंतर श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न होगा। इस महोत्सव का उद्देश्य जैन धर्म की प्राचीन श्रुत परंपरा, आगम ग्रंथों के महत्व तथा तीर्थंकरों की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाना है।
इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक अध्ययन, पूजा-पाठ, विधान, प्रवचन तथा भक्ति कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मकल्याण का अवसर प्राप्त होगा। आयोजन स्थल श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट परिसर, अंदर किला, विदिशा रहेगा, जहाँ तीनों दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
आयोजन का शुभारंभ एवं प्रथम दिवस के कार्यक्रम
महोत्सव का शुभारंभ 19 जून 2026, शुक्रवार को प्रातः 7:15 बजे ध्वजारोहण के साथ विधिवत रूप से किया गया। ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ ही धार्मिक वातावरण में मंत्रोच्चारण एवं मंगल ध्वनियों के बीच महोत्सव की औपचारिक शुरुआत हुई।
ध्वजारोहण के पश्चात कार्यक्रम का संचालन चिरंतन बड़कुल एवं आगम शास्त्री द्वारा किया गया। इसके बाद प्रातः 7:30 बजे से कलश विधि का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु महिलाओं द्वारा पवित्र जल से कलश स्थापना की गई। इसी अवसर पर जिनवाणी विराजमान की गई, जिसमें श्रीमती सन्तोषनी शराफ, श्रीमती मनोबाला जैन, श्रीमती शालिनी बड़कुल, श्रीमती सुनीता मोदी तथा श्रीमती इंद्रा सिंघई ने प्रमुख ग्रंथों के साथ शोभा यात्रा में सहभागिता निभाई और उन्हें मंडप स्थल पर विधिवत विराजमान किया गया।
इसके उपरांत 7:45 बजे प्रक्षाल पूजन विधान एवं श्री चौबीस तीर्थंकर लघु विधान का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस दौरान भक्तों ने तीर्थंकरों की आराधना करते हुए धार्मिक विधियों का पालन किया और पुण्य अर्जित किया।
प्रवचन एवं धार्मिक संदेश
प्रातः 9:10 बजे से प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं को जैन धर्म के सिद्धांतों, श्रुत परंपरा तथा आगम ग्रंथों के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
प्रसिद्ध पंडित अनुभव शास्त्री, करेली द्वारा श्रुत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सूत्रपाहुड ग्रंथ के माध्यम से श्रुत परंपरा की महत्ता को सरल एवं गहन रूप में समझाया गया। उन्होंने आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित पंच परमागम के अंतर्गत आने वाले अष्ट पाहुड ग्रंथ के सूत्र पाहुड विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि श्रुत क्या है, श्रुत परंपरा का आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व क्या है, तथा श्रुत पंचमी पर्व जैन धर्म में क्यों अत्यंत पावन माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रुत केवल ज्ञान का माध्यम नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग का आधार स्तंभ है।

विदिशा की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर का उल्लेख
प्रवचन के दौरान विदिशा नगर की धार्मिक और ऐतिहासिक परंपरा पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। उल्लेख किया गया कि दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के चार कल्याणकों से पावन हुई विदिशा की धरती का संबंध षट्खंडागम जैसे महान आगम ग्रंथ से अत्यंत विशिष्ट रूप से जुड़ा हुआ है।
बताया गया कि षट्खंडागम ग्रंथ को सर्वप्रथम प्रकाशित कराने के लिए विद्वानों के प्रेरणादायक प्रयासों के बीच विदिशा के सेठ लक्ष्मीचंद्र जी ने वर्ष 1933 में दस हजार रुपये की महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता प्रदान की थी। उस समय की यह राशि आज के संदर्भ में करोड़ों रुपये के तुल्य मानी जा सकती है।
इसी प्रकार विदिशा के ही करणानुयोग के विशिष्ट विद्वान श्रेष्ठी पं. जवाहरलाल जी बड़कुल ने षट्खंडागम ग्रंथ को “श्री सीमंधर आगम जिनालय” में संगमरमर पर उत्कीर्ण कराकर उसे भौतिक रूप से स्थायित्व प्रदान किया, जिससे यह ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर बन गया।
इसी जिनालय में कविवर पं. राजमल पवैया द्वारा रचित षट्खंडागम विधान का सर्वप्रथम आयोजन भी संपन्न हुआ, जिसने इस क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को और अधिक सशक्त एवं समृद्ध बनाया।
विधान एवं धार्मिक व्यवस्थाएँ
इस महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक विधानों का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में श्री चौबीस तीर्थंकर लघु विधान, श्री योगसार लघु विधान तथा श्री द्रव्यसंग्रह विधान जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान सम्मिलित हैं। इन विधानों के माध्यम से श्रद्धालु तीर्थंकरों की आराधना करते हुए आत्मिक शुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर होंगे।

विधान के अंतर्गत सत्येन्द्र लश्करी, गगन जैन खेरुआ, ऋषि खादी भंडार एवं अनर्घ्य शास्त्री जैसे विधान इंद्रों की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने विधि-विधान को पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ संपन्न कराया।
द्वितीय दिवस एवं आगामी कार्यक्रम
20 जून 2026, शनिवार को महोत्सव के द्वितीय दिवस पर प्रातः 7:30 बजे से प्रक्षाल पूजन विधान एवं श्री योगसार लघु विधान का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात प्रातः 9:00 बजे प्रवचन सत्र आयोजित होगा, जिसमें जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों पर प्रकाश डाला जाएगा।
रात्रि में 8:00 बजे से 8:30 बजे तक भक्ति कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें भजन, स्तुति एवं धार्मिक संगीत के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया जाएगा। इसके पश्चात 8:30 बजे से प्रवचन सत्र का आयोजन पुनः किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं को धर्म, नीति एवं आत्मकल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण शिक्षाएँ प्रदान की जाएंगी।
श्रुत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व
श्रुत पंचमी पर्व जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह पर्व श्रुत ज्ञान अर्थात आगम ग्रंथों और शास्त्रों की परंपरा के संरक्षण एवं सम्मान का प्रतीक है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि ज्ञान ही आत्मा के मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस अवसर पर श्रुत परंपरा की महत्ता को पुनः स्थापित करते हुए यह संदेश दिया गया कि आगम ग्रंथ केवल अध्ययन की वस्तु नहीं हैं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं।

आयोजन समिति एवं सहयोगी संस्थाएँ
इस भव्य धार्मिक आयोजन का निवेदन श्री दिगंबर जैन परवार समाज पंचायत समिति, विदिशा द्वारा किया गया है। आयोजन में महिला मंडल बड़ा जैन मंदिर विदिशा तथा अखिल भारतीय जैन युवा एवं महिला फेडरेशन का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।
इसके अतिरिक्त श्री दिगंबर जैन समाज विदिशा एवं मुमुक्षु मंडल विदिशा के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किया जा रहा है।
समापन एवं आमंत्रण
ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन एवं समस्त ट्रस्टियों द्वारा सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे इस पावन महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त करें और आध्यात्मिक पुण्य अर्जित करें।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह जैन संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
संपर्क विवरण
प्रवक्ता
डॉ. मक्खनलाल जैन
श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, विदिशा
मोबाइल: 9826271575
