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मध्यप्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट: उज्जैन से जुड़ा भगवान कृष्ण का अद्भुत इतिहास, 228 मंदिरों का जीर्णोद्धार और भव्य तीर्थ विकास

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Published On: 8 March 2026
bhopal news 2

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मध्यप्रदेश सरकार का श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट उज्जैन सहित भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को भव्य तीर्थ स्थल बनाएगा। 228 मंदिरों का जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास।

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट क्या है

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को विकसित करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत उन सभी स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े थे या जिनका उनके जीवन से ऐतिहासिक संबंध रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू किए जा रहे इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य इन स्थलों को भव्य तीर्थ स्थल, सांस्कृतिक केंद्र और पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करना है।सरकार ने इस योजना के प्रारंभिक चरण के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है।

मध्यप्रदेश और भगवान श्रीकृष्ण का ऐतिहासिक संबंध

मध्यप्रदेश का उज्जैन भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ उज्जैन आए थे।यहीं स्थित सांदीपनि आश्रम में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी।मध्यप्रदेश में कई ऐसे स्थान हैं जिनका भगवान श्रीकृष्ण से ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध माना जाता है, जैसे:

  • सांदीपनि आश्रम, उज्जैन

  • नारायणा

  • जानापाव

  • अमझेरा

  • जामगढ़ की गुफा

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के अंतर्गत इन सभी स्थानों को सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से विकसित किया जाएगा।

उज्जैन का सांदीपनि आश्रम और शिक्षा की गौरवशाली परंपरा

उज्जैन का सांदीपनि आश्रम भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महान केंद्र रहा है। द्वापर युग में मुनि सांदीपनि के आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की थी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने:

  • 18 दिन में 18 पुराण
  • 4 दिन में 4 वेद
  • 6 दिन में 6 शास्त्र
  • 16 दिन में 16 कलाएं

सीख ली थीं।इस प्रकार उन्होंने केवल 64 दिनों में संपूर्ण शिक्षा प्राप्त कर ली थी।अब सरकार इस स्थान को फिर से एक आधुनिक गुरुकुल और ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।

228 श्रीकृष्ण मंदिरों का जीर्णोद्धार

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के तहत प्रदेश और देश के कई प्रमुख श्रीकृष्ण मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण की योजना बनाई गई है।

इस योजना के अंतर्गत:

  • 228 श्रीकृष्ण मंदिरों का पुनर्निर्माण
  • सांस्कृतिक संग्रहालय
  • धार्मिक गैलरी
  • पुस्तकालय
  • आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र

स्थापित किए जाएंगे।इससे न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

देशभर से निकलेगी श्रीकृष्ण यात्रा

इस प्रोजेक्ट की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग के लिए सरकार ने देशभर से विशेष यात्राएं निकालने का निर्णय लिया है।यह यात्राएं निम्न राज्यों से निकलेगी:

  • असम (गोहाटी)
  • मणिपुर
  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार
  • झारखंड
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • गुजरात
  • उत्तरप्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • आंध्रप्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल

इन यात्राओं का अंतिम पड़ाव उज्जैन होगा।

पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के लागू होने से प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को बड़ा लाभ मिलेगा।

इससे:

  • धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा
  • स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा
  • प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी

उज्जैन पहले ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण विश्व प्रसिद्ध है। अब श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों के विकास से यह शहर और अधिक महत्वपूर्ण बन जाएगा।

55 जिलों के 3000 विद्वानों से मांगे गए सुझाव

इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने 55 जिलों के लगभग 3000 विद्वानों से सुझाव मांगे हैं।

इन विद्वानों की मदद से:

  • ऐतिहासिक शोध
  • सांस्कृतिक संरक्षण
  • पर्यटन विकास
  • धार्मिक व्यवस्थापन

की विस्तृत योजना बनाई जाएगी।

युवाओं को मिलेगा भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचय

आज के समय में युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और इतिहास से जोड़ना बेहद जरूरी है।श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के माध्यम से युवाओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, नीति, ज्ञान और शिक्षा परंपरा से परिचित कराया जाएगा।

इसके तहत:

  • डिजिटल संग्रहालय
  • शोध केंद्र
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • धार्मिक यात्राएं

आयोजित किए जाएंगे।

श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट का भविष्य

आने वाले वर्षों में यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश को भारत के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल कर सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह प्रोजेक्ट:

  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा
  • प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा
  • भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा

इस प्रकार श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश न केवल एक धार्मिक योजना है बल्कि यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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