निस्वार्थ भाव से किया हुआ दान और धर्म व्यर्थ नहीं जाता: मुनि श्री श्रेयांश सागर जी महाराज, सिलवानी में चातुर्मास के दौरान रोज हो रहे मंगल प्रवचन
मुनि श्री की सेवा प्रथम कर्तव्य: सुनील वैद्यराज
Silwani। आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्यों में से एक, सरल और सहज मुनि श्री श्रेयांश सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास सिलवानी नगर में चल रहा है। चातुर्मास के दौरान हर दिन मुनि श्री के मंगल प्रवचनों का आयोजन किया जा रहा है।
बुधवार बाजार के महावीर चौक स्थित मंदिर में हो रहे प्रवचन
चातुर्मास नगर के बुधवार बाजार, महावीर चौक स्थित अखंड दिगंबर जैन मंदिर में संपन्न हो रहा है। मंदिर में प्रतिदिन मुनि श्री के मंगल प्रवचन होते हैं, जिनमें वे अलग-अलग विषयों पर जैन समुदाय को संबोधित करते हैं।
“निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी निष्फल नहीं जाता”
मुनि श्री ने कहा कि यदि जीवन में निस्वार्थ भाव से धर्म, दान या कोई भी अच्छा कार्य किया जाए, तो वह कभी निष्फल नहीं जाता। आने वाले समय में वह किसी न किसी रूप में वापस जरूर मिलता है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने जीवन में निस्वार्थ भाव से सेवा, दान और धर्म करते रहना चाहिए।
“मुनियों की सेवा हम सभी का परम कर्तव्य”
क्षेत्रीय विकास परिषद के सचिव एवं अखंड दिगंबर जैन समाज के सुनील वैद्यराज ने कहा कि मुनियों की सेवा हम सभी का परम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सभी को निरंतर निस्वार्थ सेवा भाव से संघ सेवा और धर्म सेवा में सबसे आगे रहना चाहिए।
(सिलवानी से संवाददाता वैभव जैन मस्ताना की रिपोर्ट)
