विश्व पशु दिवस पर श्री मार्तंड फाउंडेशन का संदेश: बेजुबानों को भोजन, पानी और अपनापन दें
राजस्थान। विश्व पशु दिवस के अवसर पर 4 अक्टूबर 2026 को श्री मार्तंड फाउंडेशन की ओर से पूनम रमेश गांधी ने पशु-पक्षियों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता रखने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बेजुबान जीव मनुष्य से थोड़ा भोजन, पानी और अपनापन चाहते हैं। उनके प्रति हिंसा करने या पत्थर फेंकने के बजाय दया और सहयोग का व्यवहार करना चाहिए।
गांधी ने जीवदया को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए लोगों से पशु-पक्षियों की सेवा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी जीवों को जीने का अधिकार है। उनके प्रति दया भाव रखना और जरूरत के समय सहायता करना इंसानियत का परिचय है। विश्व पशु दिवस पर दिए गए संदेश में भोजन-पानी की व्यवस्था तथा पशुओं पर अत्याचार रोकने की भावना प्रमुख रही।
बेजुबानों के प्रति अपनत्व रखने की अपील
पूनम रमेश गांधी ने कहा कि पशु अपनी आवश्यकताएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, लेकिन उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। बेजुबानों को भोजन और पानी के साथ अपनापन भी चाहिए। उन्होंने लोगों से उनकी ओर करुणा की दृष्टि से देखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पशुओं पर पत्थर फेंकना और उन्हें मारना उचित नहीं है। उनके साथ कठोर व्यवहार करने के बजाय सहायता का भाव रखना चाहिए। संदेश में इस बात पर जोर दिया गया कि मनुष्य अपनी संवेदनशीलता का परिचय कमजोर और बेजुबान जीवों के प्रति व्यवहार से भी दे सकता है।
घर के आसपास भूखे पशुओं को दें भोजन
गांधी ने लोगों से अपने घर के आसपास घूमने वाले भूखे पशुओं पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे पशुओं को भोजन देकर उनकी सहायता की जा सकती है। अपने आसपास किसी जीव की जरूरत को समझना और उसके लिए सहयोग करना जीवदया की भावना का हिस्सा है।
उनके संदेश में बड़े आयोजन या विशेष अवसर की प्रतीक्षा किए बिना दैनिक जीवन में करुणा अपनाने का आग्रह रहा। घर के बाहर दिखाई देने वाले भूखे पशु के प्रति दया दिखाना भी सेवा का कार्य है। उन्होंने लोगों से बेजुबानों की उपेक्षा करने के बजाय उनकी आवश्यकताओं के प्रति सजग रहने को कहा।
पक्षियों के लिए रखें दाना और पानी
पूनम रमेश गांधी ने छत और खिड़कियों पर आने वाले पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पक्षियों के प्रति भी दया और सहयोग का भाव होना चाहिए। उनके भोजन और पानी की व्यवस्था करना सेवा का सरल माध्यम बन सकता है।
संदेश में पशुओं के साथ पक्षियों को भी समान रूप से स्थान दिया गया। गांधी ने सभी जीवों के प्रति करुणा रखने की बात कही। अपने आसपास आने वाले पक्षियों की जरूरतों पर ध्यान देकर लोग जीवदया की भावना को व्यवहार में अपना सकते हैं।
जीवदया को धर्म मानकर करें सेवा
गांधी ने जीवदया को धार्मिक भावना से जोड़ते हुए कहा कि बेजुबान जीवों की सेवा पुण्य का कार्य है। उन्होंने अपने संदेश में यह विश्वास व्यक्त किया कि करुणा और सहायता के कार्य ईश्वर के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति भी हैं।
उन्होंने लोगों से जीवदया को धर्म मानकर पशु-पक्षियों की सेवा करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, धर्म की भावना दूसरों के प्रति संवेदनशील व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। भूखे जीव को भोजन देना, प्यासे पक्षी के लिए पानी रखना और पशुओं के प्रति अपनत्व दिखाना इसी भावना के उदाहरण हैं।
अत्याचार के बजाय करुणा का व्यवहार
विश्व पशु दिवस के संदेश में पशुओं पर अत्याचार नहीं करने की स्पष्ट अपील की गई। गांधी ने कहा कि बेजुबान जीव भी मनुष्य से इंसानियत की अपेक्षा रखते हैं। उनके प्रति हिंसा के स्थान पर दया और सम्मान का व्यवहार अपनाना चाहिए।
उन्होंने पशुओं की आंखों में भावनाओं की अभिव्यक्ति का उल्लेख करते हुए उनकी संवेदनाओं को समझने की बात कही। संदेश का उद्देश्य लोगों को अपने व्यवहार पर विचार करने और जीवों के प्रति करुणा अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
सभी जीवों के प्रति रखें दया भाव
श्री मार्तंड फाउंडेशन की ओर से दिए गए संदेश में सभी जीवों के जीने के अधिकार और उनकी सेवा की भावना को महत्व दिया गया। पूनम रमेश गांधी ने लोगों से भोजन, दाना-पानी और अपनत्व के माध्यम से बेजुबानों की सहायता करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभी जीवों के प्रति दया रखकर ही मनुष्य अपनी इंसानियत का परिचय दे सकता है।
