बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ बुढ़नपुर से उज्जैन रवाना हुई कावड़ यात्रा, पैदल पहुंचकर बाबा महाकाल का करेंगे जलाभिषेक
श्रावण मास में शिवभक्ति का अनूठा उत्साह, डीजे, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच महाकाल की नगरी के लिए निकले शिवभक्त
संवाददाता: मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना/सारंगपुर। श्रावण मास का शुभारंभ होते ही पूरे देश की तरह मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में भी भगवान शिव की आराधना और कावड़ यात्रा का उत्साह चरम पर है। राजगढ़ जिले के पड़ाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बुढ़नपुर में भी शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां नवयुवक मित्र मंडल के तत्वावधान में शिवभक्तों का एक जत्था “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय भोलेनाथ” के गगनभेदी जयघोष के साथ महाकाल की नगरी उज्जैन के लिए पैदल रवाना हुआ।
डीजे की भक्ति धुनों, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भगवा वस्त्रों में सजे शिवभक्तों के उत्साह ने पूरे गांव को शिवमय बना दिया। कावड़ यात्रा के शुभारंभ से पहले श्रद्धालुओं ने गांव के देवनारायण मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर अपनी धार्मिक यात्रा शुरू की।
श्रावण मास में शिवभक्ति का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे माह में श्रद्धालु उपवास रखते हैं, शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं और दूर-दूर से पवित्र जल लाकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित करते हैं।
कावड़ यात्रा इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें शिवभक्त पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
देवनारायण मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई यात्रा
शुक्रवार को सुबह बुढ़नपुर गांव के देवनारायण मंदिर में सभी शिवभक्त एकत्रित हुए। यहां विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के बाद कावड़ यात्रा का शुभारंभ किया गया।
भगवान शिव के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने अपनी कावड़ कंधों पर उठाई और पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली। इस दौरान गांव का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी यात्रा में शामिल होकर उनका उत्साहवर्धन करते नजर आए।
डीजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों से गूंजा गांव
कावड़ यात्रा के दौरान डीजे पर बज रहे शिव भजनों और ढोल-नगाड़ों की धुनों ने पूरे गांव का माहौल शिवमय बना दिया।
“बोल बम”, “हर-हर महादेव”, “जय भोलेनाथ” और “महाकाल की जय” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। युवा शिवभक्त नाचते-गाते और भगवान शिव का स्मरण करते हुए पूरे उत्साह के साथ यात्रा पर निकले।
गांव की गलियों से निकलते हुए यह यात्रा पड़ाना-सारंगपुर मुख्य मार्ग तक पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
भगवा वस्त्रों में नजर आए शिवभक्त
कावड़ यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं ने भगवा रंग के वस्त्र धारण किए हुए थे, जो शिवभक्ति और सनातन परंपरा का प्रतीक माने जाते हैं।
कंधों पर सजी-धजी कावड़, हाथों में भगवा ध्वज और शिवभक्ति के जयघोष श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह को स्पष्ट रूप से दर्शा रहे थे। यात्रा में शामिल युवाओं के चेहरे पर बाबा महाकाल के दर्शन करने का विशेष उत्साह दिखाई दे रहा था।
ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत
कावड़ यात्रा के गांव से निकलते समय जगह-जगह ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने शिवभक्तों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी यात्रा की सफलता और कुशल मंगल की कामना की। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को जल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
ग्रामीणों ने कहा कि कावड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज में भाईचारे, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाला पर्व भी है।
पहले कपिलेश्वर महादेव का किया जलाभिषेक
यात्रा के दौरान शिवभक्तों ने बुढ़नपुर गांव से लाए गए पवित्र जल से कपिल मुनि की नगरी सारंगपुर स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने मां कालीसिंध नदी से पवित्र जल भरकर अपनी आगे की पैदल यात्रा शुरू की। यही जल वे उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करेंगे।
तीन से चार दिन में पहुंचेंगे उज्जैन
कावड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु लगभग तीन से चार दिन की पैदल यात्रा पूरी कर उज्जैन पहुंचेंगे।
यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु अनुशासन, धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं का पालन करेंगे। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर विश्राम करते हुए वे बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचेंगे और वहां जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
श्रद्धालुओं का कहना है कि महाकाल के दर्शन और जलाभिषेक का सौभाग्य जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव होता है।
नवयुवक मित्र मंडल निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
इस धार्मिक यात्रा का आयोजन नवयुवक मित्र मंडल, बुढ़नपुर द्वारा किया गया।
मंडल के सदस्यों ने यात्रा की सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से तैयार किया। यात्रा में अनुशासन बनाए रखने, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया।
ग्रामीणों ने नवयुवक मित्र मंडल के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और सामाजिक एकता से जोड़ने का कार्य करते हैं।
इन श्रद्धालुओं ने लिया कावड़ यात्रा में हिस्सा
इस कावड़ यात्रा में नवयुवक मित्र मंडल के सदस्य एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
यात्रा में प्रमुख रूप से सरपंच सौदान सिंह चौहान, सतीश चौहान, रंगलाल सिंह चौहान, राजेश चौहान, राजेंद्र चौहान, दीपक पंवार, सुनील चरण, महेश चरण, अशोक डाबी, रोहित डाबी सहित एक दर्जन से अधिक शिवभक्त शामिल हुए।
सभी श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के जयघोष के साथ अपनी यात्रा प्रारंभ की और प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति तथा जनकल्याण की कामना करते हुए उज्जैन के लिए प्रस्थान किया।
श्रावण मास में बढ़ती है महाकाल नगरी की रौनक
श्रावण मास के दौरान विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान कावड़ यात्राओं का विशेष महत्व रहता है।
मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों शिवभक्त पैदल यात्रा करते हुए बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचते हैं और पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और प्रत्येक वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बुढ़नपुर से रवाना हुई यह कावड़ यात्रा भी उसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें शिवभक्त पूरे उत्साह, श्रद्धा और आस्था के साथ महाकाल के दर्शन के लिए निकले हैं। ग्रामीणों ने उनकी सफल यात्रा की कामना करते हुए भगवान शिव से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
