राज्यसभा में तीखी बहस: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और Digvijaya Singh आमने-सामने
नई दिल्ली / भोपाल, फरवरी 2026। शुक्रवार को राज्यसभा में एक बार फिर राजनीतिक बहस देखने को मिली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh आमने-सामने आ गए। बहस का मुख्य विषय मध्यप्रदेश में मूंग उत्पादन और खरीदी प्रक्रिया रही।
Digvijaya Singh ने प्रश्नकाल के दौरान सीधे सवाल किया कि शिवराज के चुनावी क्षेत्र में मूंग उत्पादन अधिक होने के बावजूद उसे खरीदी क्लस्टर सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया। इस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाब दिया कि “मेरे संसदीय क्षेत्र की चिंता आपको है, इसके लिए धन्यवाद।”
Digvijaya Singh का आरोप: पेस्टिसाइड और खरीदी में देरी
Digvijaya Singh ने कहा कि शिवराज के क्षेत्र में थर्ड क्रॉप मूंग बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इसे किसी खरीदी क्लस्टर में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने होशंगाबाद, सीहोर और हरदा के इलाकों का उदाहरण दिया।
दिग्विजय ने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में पेस्टिसाइड का अत्यधिक उपयोग किया गया। पेस्टिसाइड के अधिक इस्तेमाल से मूंग खाने योग्य नहीं रह जाती और इसी वजह से खरीदी विलंबित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि इस विलंब का व्यापारियों ने फायदा उठाया।
दिग्विजय ने स्पष्ट किया कि किसान मेहनत करके मूंग उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन खरीदी और मार्केटिंग में देरी के कारण उन्हें उचित लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से ठोस जवाब और कार्रवाई की मांग की।
शिवराज सिंह चौहान का जवाब: उत्पादन और पारदर्शिता
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में मूंग की खेती सिंचाई प्रणाली और तकनीकी सहायता के कारण बढ़ी है। उन्होंने बताया कि राज्य का किसान अब बीस लाख मीट्रिक टन तक मूंग का उत्पादन कर रहा है।
शिवराज ने जोर देकर कहा कि मूंग की खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है और जिन क्षेत्रों में मूंग भरपूर पैदा हो रही है, वहां खरीदी क्लस्टर की आवश्यकता नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने भावांतर योजना और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी पहल के माध्यम से किसानों को बेहतर लाभ दिलाने की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मूंग उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और राज्य सरकार इसके लिए तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह की सहायता कर रही है।
कांग्रेस सरकार पर तंज और राजनीतिक बहस
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सरकार की तुलना करते हुए कहा कि पहले दलहन का उत्पादन बहुत कम होता था। “तब केवल एक फसल होती थी, अब तीन फसल हो रही हैं।”
Digvijaya Singh ने कहा कि उनका सवाल खरीदी क्लस्टर सूची से संबंधित था। शिवराज ने इस पर भावांतर योजना का जिक्र किया और कहा कि किसानों को लाभ दिया जा रहा है।
राज्यसभा में हल्की-फुल्की तकरार के दौरान शिवराज ने कहा कि “हमारे बड़े भाई बड़े उतावले हो रहे हैं,” जिसका तात्पर्य यह था कि विपक्ष जल्दी में निर्णय लेने की मांग कर रहा है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कृषि नीतियों और किसानों के हित को लेकर तीखी बहस हुई।
मध्यप्रदेश में मूंग उत्पादन की स्थिति
मध्यप्रदेश में मूंग की खेती पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। राज्य में सिंचाई और सरकारी योजनाओं के चलते दलहन की पैदावार में इजाफा हुआ है। किसान अब थर्ड क्रॉप मूंग भी उगा रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में मूंग उत्पादन बीस लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने किसानों के लिए पारदर्शी खरीदी प्रणाली बनाई है। इस व्यवस्था के तहत MSP और भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को सही कीमत मिलती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार तकनीकी सहायता, बीज वितरण और सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवा रही है। इस कदम से मध्यप्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और दलहन की खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
खरीदी क्लस्टर और व्यापारियों का लाभ
Digvijaya Singh ने आरोप लगाया कि पेस्टिसाइड के ज्यादा इस्तेमाल और खरीदी में देरी के कारण व्यापारियों को लाभ हुआ। उन्होंने कहा कि इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यदि उत्पादन अधिक है, तो क्लस्टर की आवश्यकता नहीं। सरकार ने भावांतर योजना और MSP जैसी व्यवस्थाएं बनाई हैं, ताकि व्यापारियों के दुरुपयोग को रोका जा सके और किसान को लाभ मिल सके।
निष्कर्ष
राज्यसभा में हुई यह बहस मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र, मूंग उत्पादन और खरीदी प्रणाली पर केंद्रित रही। दिग्विजय सिंह ने खरीदी क्लस्टर और पेस्टिसाइड उपयोग को मुद्दा बनाया, जबकि शिवराज सिंह चौहान ने उत्पादन बढ़ोतरी और पारदर्शिता पर जोर दिया।
यह बहस दर्शाती है कि मध्यप्रदेश में दलहन और मूंग उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और खरीदी प्रक्रिया, किसान हित और पारदर्शिता पर राजनीति भी तेज है। राज्य सरकार ने किसानों के लिए सिंचाई, तकनीकी सहायता और MSP जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की हैं, जबकि विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है।
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए यह बहस यह संदेश देती है कि उनकी फसल, लाभ और पारदर्शिता हमेशा राजनीति का केंद्र बने रहेंगे।
