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MP News: नरवर किले से 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; ASI अधिकारी करेंगे किले का निरीक्षण

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Published On: 17 July 2026
400-year-old cannon stolen from Narwar Fort in Shivpuri, Madhya Pradesh.
— 400-year-old cannon stolen from Narwar Fort in Shivpuri, Madhya Pradesh.

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MP News: नरवर किले से 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; ASI अधिकारी करेंगे किले का निरीक्षण

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी एक तोप चोरी हो गई है। इस घटना के बाद पुरातत्व और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ लोग वाहन के जरिए किले के पिछले हिस्से तक पहुंचे और वहां रखी इस प्राचीन तोप को उठाकर ले गए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि चोरी के हर पहलू की जांच की जा रही है। इसमें स्थानीय लोगों की भूमिका से लेकर किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की संलिप्तता तक की संभावना को ध्यान में रखा जा रहा है।

नरवर किले से चोरी हुई 400 साल पुरानी तोप

शिवपुरी जिले का नरवर किला मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। इस किले का इतिहास कई सदियों पुराना है और यहां प्राचीन स्थापत्य कला के साथ-साथ युद्धकालीन अवशेष भी मौजूद हैं।

जानकारी के अनुसार, किले में रखी गई यह तोप लगभग 400 साल पुरानी बताई जा रही है। यह तोप ऐतिहासिक महत्व रखती थी और किले की पहचान का एक हिस्सा मानी जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, चोरी की घटना बुधवार और गुरुवार की रात के बीच हुई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि चोरों ने किले के पिछले हिस्से का इस्तेमाल किया, जहां से वे वाहन लेकर अंदर तक पहुंचे और तोप को अपने साथ ले गए।

कुछ दिन पहले गिर गई थी तोप, वापस सुरक्षित स्थान पर नहीं रखी गई

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि चोरी हुई तोप कुछ दिन पहले अपनी निर्धारित जगह से गिर गई थी। इसके बाद उसे दोबारा सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया था।

अधिकारियों के अनुसार, अगर तोप को समय रहते सुरक्षित स्थान पर रखा जाता तो शायद चोरी की घटना को रोका जा सकता था। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि तोप गिरने के बाद उसकी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

इस घटना ने ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पुरानी वस्तुएं केवल धातु का सामान नहीं होतीं, बल्कि वे इतिहास की महत्वपूर्ण निशानियां होती हैं, जिनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है।

पुलिस ने शुरू की जांच, कई पहलुओं पर हो रही पड़ताल

करैरा के सब डिविजनल पुलिस अधिकारी प्रशांत शर्मा ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जांच शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि चोरी के मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस घटना के पीछे स्थानीय चोर हैं या फिर किसी बड़े गिरोह का हाथ है।

जांच में इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • किले में आने-जाने वाले रास्तों की जानकारी जुटाना
  • आसपास लगे संभावित कैमरों की जांच
  • स्थानीय लोगों से पूछताछ
  • संदिग्ध वाहनों की जानकारी जुटाना
  • पुरानी धरोहरों की तस्करी करने वाले गिरोहों की भूमिका की जांच

पुलिस का कहना है कि जल्द ही चोरी की घटना से जुड़े सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

नरवर किले का ऐतिहासिक महत्व

नरवर किला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित एक प्राचीन दुर्ग है। यह किला अपनी विशाल संरचना, ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है।

इतिहास के अनुसार, इस किले का पुनर्निर्माण 10वीं शताब्दी में कछवाहा राजपूतों द्वारा कराया गया था। यह किला कई राजवंशों के शासन और युद्धों का गवाह रहा है।

किले में पहले करीब 14 तोपें मौजूद थीं, जो पुराने समय की सैन्य व्यवस्था और युद्ध तकनीक को दर्शाती थीं। इनमें से एक ऐतिहासिक तोप का चोरी होना पुरातत्व प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

ASI अधिकारी करेंगे नरवर किले का दौरा

तोप चोरी की घटना के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारी नरवर किले का निरीक्षण करेंगे। अधिकारियों का उद्देश्य घटना की जानकारी लेना और किले में मौजूद अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना है।

ASI अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि किले में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।

पुरातत्व विभाग के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐतिहासिक हथियार और वस्तुएं देश की विरासत का हिस्सा होती हैं।

ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

नरवर किले से तोप चोरी की घटना ने प्रदेश में मौजूद ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस शुरू कर दी है।

कई पुराने किले और स्मारक दूरदराज क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था सीमित होती है। ऐसे स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, नियमित निरीक्षण करने और आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों की चोरी केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने वाली घटना है।

चोरी के पीछे तस्करी गिरोह की आशंका

पुलिस ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि चोरी के पीछे किसी बड़े तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है। पुरानी और ऐतिहासिक वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग रहती है।

ऐसी वस्तुओं को अवैध तरीके से बेचने वाले गिरोह अक्सर ऐतिहासिक महत्व वाली चीजों को निशाना बनाते हैं। इसलिए पुलिस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संभावना की भी जांच कर रही है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी होने की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि किले की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए था।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि चोरी हुई तोप को जल्द से जल्द बरामद किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप चोरी होना एक गंभीर मामला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ASI अधिकारी भी किले का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए बेहतर निगरानी और मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और चोरी हुई प्राचीन तोप की बरामदगी पर टिकी हुई है।

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