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हरीश कुमार: दिव्यांगता नहीं, अटूट संकल्प ने बनाया भारत का पैरा आर्म रेसलिंग स्टार

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Published On: 27 August 2025
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गूगल से ग्लोबल स्टार तक: प्रो पंजा लीग में शेर-ए-लुधियाना के साथ हरीश कुमार की शानदार वापसी

भारत के शीर्ष पैरा आर्म रेसलर हरीश कुमार ने प्रो पंजा लीग सीजन 2 में शेर-ए-लुधियाना के लिए शानदार प्रदर्शन किया। वर्ल्ड और एशियन चैंपियन हरीश का सफर, गूगल से ग्लोबल सफलता तक।

मध्य प्रदेश, अगस्त 2025:
भारत के सबसे सम्मानित पैरा आर्म रेसलरों में से एक, हरीश कुमार, प्रो पंजा लीग सीजन 2 में शेर-ए-लुधियाना टीम के साथ लौट आए हैं। दोनों खेले गए मैचों में जीत हासिल कर हरीश ने साबित किया कि उनका नाम “शेर” जैसा ही है।

गुजरात के रहने वाले हरीश ने महज 17 साल की उम्र में आर्म रेसलिंग की शुरुआत की। उस समय भारत में इस खेल को ज्यादा पहचान नहीं मिली थी। कोई औपचारिक कोच नहीं था, और न ही कोई सिस्टम। हरीश ने इंटरनेट और गूगल को अपना पहला मेंटर मानते हुए कड़ी मेहनत से खुद को तैयार किया। परिवार और समुदाय के समर्थन ने उनके सपनों को पंख दिए और आज वे वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं।

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कैरेयर हाइलाइट्स:

  • 2015 में अपनी पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर मेडल

  • वर्ल्ड और एशियन चैंपियन का खिताब

  • 8 बार नेशनल चैंपियन

  • वर्तमान में अहमदाबाद नगर निगम में कार्यरत और देश के सम्मानित पैरा-एथलीट

हरीश ने कहा, “शेर-ए-लुधियाना ने हमें राष्ट्रीय मंच दिया, जहां हम अपनी ताकत, तकनीक और कहानियाँ सबके सामने रख सकते हैं। टीम के मालिकों और हेड कोच यरकिन अलीमज़ानोव का आभार, जिन्होंने हमारे खेल के दृष्टिकोण को नया आकार दिया।”

हेड कोच यरकिन अलीमज़ानोव ने हरीश की सराहना करते हुए कहा, “हरीश के पास वर्ल्ड-क्लास तकनीक और अनुशासन है। वे भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोल मॉडल हैं।”

प्रो पंजा लीग के फाउंडर प्रवीण दबास ने इस लीग को एक मजबूत प्लेटफार्म बनाया, जहां खिलाड़ियों को सम्मान और अवसर मिलता है। हरीश ने कहा, “मेरी कोशिश है कि मैं अपने खेल को बेहतर बनाऊँ, पूरी मेहनत करूँ और टीम को गर्व दिलाऊँ।”

आगे की योजनाओं पर हरीश ने कहा, “मुझे विश्वास है कि प्रो पंजा लीग अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाएगी और यह दुनियाभर में खेल और खिलाड़ियों के लिए चमत्कार लेकर आएगी। शेर-ए-लुधियाना अब केवल एक टीम नहीं, बल्कि एक परिवार बन चुका है।”

हरीश कुमार का सफर उनकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि अटूट संकल्प और जुनून से भरा है। उनका अनुभव साबित करता है कि धैर्य और मेहनत किसी भी बाधा को पार कर सकती है।

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