राहुल गांधी से मुलाकात के बाद Shashi Tharoor ने तोड़ी चुप्पी, BJP समर्थक छवि पर दिया करारा जवाब
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद Shashi Tharoor को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। पार्टी आलाकमान से कथित मतभेद और भाजपा समर्थक रुख की चर्चाओं के बीच शशि थरूर ने खुलकर अपनी बात रखी है। दिल्ली से तिरुवनंतपुरम लौटने के बाद शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में Tharoor ने न सिर्फ कांग्रेस नेतृत्व से अपने संबंधों को लेकर स्थिति स्पष्ट की, बल्कि उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें उन्हें भाजपा के करीब बताया जाता रहा है। थरूर ने कहा कि उनके बयानों को कई बार संदर्भ से अलग करके देखा गया, जिससे यह धारणा बनी कि वह भाजपा समर्थक हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका रुख हमेशा भारत और देशहित के पक्ष में रहा है, न कि किसी विशेष पार्टी के समर्थन में।
कांग्रेस आलाकमान से मनमुटाव की चर्चाओं पर विराम
पिछले कुछ समय से यह चर्चा आम थी कि कांग्रेस आलाकमान और Tharoor के बीच मतभेद चल रहे हैं। पार्टी के आंतरिक चुनावों से लेकर कुछ सार्वजनिक बयानों तक, कई मुद्दों पर थरूर का रुख पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग दिखाई दिया था। इससे यह कयास लगाए जाने लगे कि पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज है। हालांकि, हाल ही में राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बाद इन अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच संवाद बेहतर हुआ है। थरूर ने भी संकेत दिए कि अब पार्टी के भीतर किसी तरह का टकराव नहीं है और सभी मतभेद सुलझ चुके हैं।
BJP समर्थक छवि पर Tharoor की सफाई
मीडिया से बातचीत में शशि Tharoor ने कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके विचारों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने बताया कि जब वह अंतरराष्ट्रीय मामलों या विदेश नीति जैसे विषयों पर सरकार की सराहना करते हैं, तो इसे भाजपा समर्थक रुख के तौर पर देखा जाता है। Tharoor ने कहा, हो सकता है कि मीडिया ने मेरे कुछ बयानों को भाजपा समर्थक के रूप में देखा हो, लेकिन मैंने हमेशा इन्हें सरकार समर्थक या भारत समर्थक के तौर पर ही देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देशभक्त नेता का कर्तव्य होता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के हितों का समर्थन करे, चाहे केंद्र में कोई भी सरकार क्यों न हो।
मैं राजनीति नहीं, देश की बात करता हूं
Tharoor ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों पर बोलते समय वह राजनीति से ऊपर उठकर सोचते हैं। उन्होंने बताया कि विदेश नीति, कूटनीति और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका जैसे विषय उनके लिए राष्ट्रीय महत्व के होते हैं, न कि राजनीतिक विवाद के। उन्होंने कहा, मैंने पहले भी साफ किया है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मुझे राजनीति के बारे में बात करना पसंद नहीं है। मैं देश के बारे में बात करना पसंद करता हूं। Tharoor ने यह भी जोड़ा कि यह कोई नई बात नहीं है और वह लंबे समय से इसी सोच के साथ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं।
कांग्रेस के भीतर Tharoor की भूमिका पर चर्चा
Tharoor कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी छवि एक विचारशील, अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले और स्पष्ट वक्ता की रही है। संयुक्त राष्ट्र में लंबा कार्यकाल और विदेश नीति पर गहरी पकड़ उन्हें पार्टी के अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है। हालांकि, उनकी यही स्वतंत्र सोच कई बार पार्टी के भीतर सवालों को भी जन्म देती रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि थरूर को पार्टी लाइन के अनुरूप बोलना चाहिए, जबकि उनके समर्थक इसे कांग्रेस की बौद्धिक ताकत बताते हैं।
मीडिया की भूमिका पर भी इशारा
Tharoor ने अप्रत्यक्ष रूप से मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई बार बयानों को पूरे संदर्भ में न दिखाकर गलत संदेश दिया जाता है। इससे नेता की छवि प्रभावित होती है और अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विचारों की विविधता होनी चाहिए और हर बयान को राजनीतिक चश्मे से देखना सही नहीं है।
राजनीतिक संदेश साफ
Tharoor के इस बयान के बाद राजनीतिक संदेश काफी हद तक साफ हो गया है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि न तो वह भाजपा समर्थक हैं और न ही पार्टी से अलग कोई राह तलाश रहे हैं। उनका फोकस देशहित, विचार और जिम्मेदार राजनीति पर है। राहुल गांधी से मुलाकात और उसके बाद दिया गया यह बयान कांग्रेस के भीतर एकता का संकेत भी माना जा रहा है।
