शांताबाई सुराणा के निधन के बाद परिवार ने कराया नेत्रदान, जैन सोशल ग्रुप मैत्री के सहयोग से 28वां नेत्रदान संपन्न
खाचरौद : ब्रजेश बोहरा
श्रीमती शांताबाई सुराणा के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर उनकी स्मृतियों को सेवा और परोपकार से जोड़ा। उनके सुपुत्र अभय सुराणा, अजय सुराणा एवं समस्त परिवारजनों की सहमति से जैन सोशल ग्रुप मैत्री के सहयोग से नेत्रदान संपन्न कराया गया। संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह उसके सहयोग से संपन्न हुआ 28वां नेत्रदान है। इस अवसर पर गीता भवन न्यास समिति के डॉक्टर जी.एल. ददरवाल की उपस्थिति रही।
परिवार के लिए दुख की इस घड़ी में लिया गया नेत्रदान का निर्णय शांताबाई सुराणा की सेवा-भावना और संस्कारों से जुड़ा बताया गया। जैन सोशल ग्रुप मैत्री परिवार ने इस निर्णय की सराहना करते हुए दिवंगत शांताबाई सुराणा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
पुत्रों और परिवारजनों की सहमति से हुआ नेत्रदान
शांताबाई सुराणा के निधन के पश्चात उनके दोनों पुत्रों अभय सुराणा और अजय सुराणा सहित परिवारजनों ने नेत्रदान के लिए सहमति दी। इसके बाद जैन सोशल ग्रुप मैत्री के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार के इस निर्णय को संगठन ने मानवीय संवेदना और परोपकार का उदाहरण बताया।
आयोजकों की ओर से साझा जानकारी में परिवारजनों की सहमति और सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। शोक के समय में भी परिवार ने सेवा का मार्ग चुना। इस निर्णय के माध्यम से शांताबाई सुराणा की स्मृतियों को एक ऐसे कार्य से जोड़ा गया, जिसका उद्देश्य दूसरों के जीवन में सहायता की संभावना बनाना है।
धार्मिक संस्कारों और सेवा से रहा जुड़ाव
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, शांताबाई सुराणा का धर्म के प्रति विशेष जुड़ाव और समर्पण रहा। उन्होंने अपने जीवन के संस्कारों तथा सेवा-भावना को अपने पुत्रों तक भी पहुंचाया। उनके निधन के बाद परिवार द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय इन्हीं मूल्यों से प्रेरित बताया गया।
जैन सोशल ग्रुप मैत्री परिवार ने कहा कि दिवंगत की स्मृतियों को समाजसेवा से जोड़ना उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक माध्यम है। संगठन ने परिवार की सहमति से संपन्न इस कार्य की अनुमोदना की और इसे प्रेरणादायी बताया। श्रद्धांजलि के साथ परिवार की परोपकारी भावना का भी सम्मान किया गया।
सात दिनों में चौथा नेत्रदान
जैन सोशल ग्रुप मैत्री की ओर से बताया गया कि पिछले सात दिनों में यह चौथा नेत्रदान संपन्न हुआ है। संगठन ने इसे मैत्री परिवार के लिए संतोष और अनुमोदना का विषय बताया। शांताबाई सुराणा का नेत्रदान संगठन के सहयोग से संपन्न नेत्रदानों की श्रृंखला में 28वां है।
इस जानकारी के साथ संगठन ने उन परिवारों की सेवा-भावना के प्रति सम्मान व्यक्त किया, जिन्होंने अपने प्रियजन के निधन के बाद नेत्रदान का निर्णय लिया। मैत्री परिवार के अनुसार, ऐसे निर्णय समाज में परोपकार के प्रति सकारात्मक संदेश देते हैं और अन्य परिवारों को भी इस विषय पर विचार करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
इन सदस्यों का रहा विशेष सहयोग
नेत्रदान संपन्न कराने में अनिल लोढ़ा, स्वप्निल सुराणा, आयुष बरडिया, अरुण लुणावत एवं राजेश चोपड़ा की विशेष उपस्थिति और सहयोग रहा। इन सभी का उल्लेख करते हुए संगठन ने उनके योगदान की सराहना की। परिवारजनों और सहयोगियों की सहभागिता से नेत्रदान का कार्य संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर गीता भवन न्यास समिति के डॉक्टर जी.एल. ददरवाल भी उपस्थित रहे। उपलब्ध जानकारी में नेत्रदान के सहयोगियों और परिवार के निर्णय को प्रमुखता दी गई है। संगठन ने सामूहिक सहयोग के लिए सभी संबंधित व्यक्तियों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया।
मैत्री परिवार ने अर्पित की श्रद्धांजलि
जैन सोशल ग्रुप मैत्री परिवार ने शांताबाई सुराणा को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार द्वारा किए गए नेत्रदान की हृदय से अनुमोदना की। संगठन ने इस कार्य को अनुकरणीय बताते हुए अभय सुराणा, अजय सुराणा और समस्त परिवारजनों की सेवा-भावना की सराहना की।
शांताबाई सुराणा के निधन से उपजे दुख के बीच परिवार का यह निर्णय उनकी धार्मिक आस्था, संस्कारों और परोपकार की भावना की स्मृति से जुड़ा रहा। मैत्री परिवार ने दिवंगत के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए नेत्रदान में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के योगदान को सम्मान दिया।
