लोकायुक्त कार्रवाई के बाद सामने आया कथित पहचान चोरी का मामला, मेडिकल ऑफिसर पर दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों से नौकरी पाने का आरोप
रिपोर्ट: संभागीय ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास
शहडोल।
लोकायुक्त कार्रवाई के बाद खुला नया विवाद
Shahdol : रीवा लोकायुक्त द्वारा हाल ही में की गई रिश्वतखोरी की कार्रवाई के बाद शहडोल स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। जयसिंहनगर विकासखंड के उपरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा के विरुद्ध आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कथित रूप से किसी अन्य व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों और पहचान का दुरुपयोग कर मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी प्राप्त की। इस संबंध में जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता, जो राजस्थान के डीग जिले में मेडिकल अधिकारी के रूप में पदस्थ बताए गए हैं और जिनका नाम भी डॉ. महेश चंद्र शर्मा है, ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा ने उनकी शैक्षणिक अंकसूचियों, डिग्रियों और फोटो का उपयोग कर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त की।
शिकायत के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान शैक्षणिक दस्तावेज शिकायतकर्ता के उपयोग किए गए, जबकि पहचान के लिए अलग आधार कार्ड और अन्य व्यक्तिगत पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रकार उनकी पहचान और शैक्षणिक अभिलेखों का कथित दुरुपयोग किया गया।
सोशल मीडिया से मिली मामले की जानकारी
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब हाल ही में रीवा लोकायुक्त द्वारा शहडोल में एक डॉक्टर को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की खबर समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई। समाचार देखने के बाद उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने जानकारी जुटाई।
इसके बाद वे शहडोल पहुंचे तथा जयसिंहनगर थाने में लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की।
कई जिलों में पदस्थ रहने की जानकारी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित मेडिकल अधिकारी अलग-अलग समय में शहडोल, श्योपुर तथा खरगोन जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस तथ्य के सामने आने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं।
यदि जांच में शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल पहचान के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
पुलिस ने शुरू की जांच
जयसिंहनगर थाना प्रभारी ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा तथा संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख भी प्राप्त किए जाएंगे।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सत्यापन के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन तंत्र को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि किसी व्यक्ति ने कथित रूप से दूसरे के शैक्षणिक दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी सेवा प्राप्त की है, तो यह प्रश्न भी उठता है कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया और संबंधित स्तरों पर जांच में कोई कमी तो नहीं रही।
हालांकि, इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी जांच प्रक्रिया के अनुरूप शामिल किया जाएगा।
