Shahdol 108 एंबुलेंस लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया। कल्याणपुर में सड़क हादसे के बाद घायल युवक करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पता रहा। लोगों ने कई बार 108 पर कॉल किया, लेकिन एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रिपोर्ट – संभागीय ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास
Shahdol 108 एंबुलेंस लापरवाही: 1 घंटे तक सड़क पर तड़पता रहा घायल युवक, लोगों ने खुद पहुंचाया अस्पताल
Shahdol108 एंबुलेंस लापरवाही: घटना क्या है?
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Shahdol 108 एंबुलेंस लापरवाही का मामला उस समय सामने आया जब कल्याणपुर स्थित महर्षि विद्यालय के पास हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा दोपहर लगभग 1:30 बजे हुआ। युवक सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा और उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को कई बार फोन किया, लेकिन उनका आरोप है कि करीब एक घंटे तक कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
हादसा कैसे हुआ?
स्थानीय लोगों के अनुसार दुर्घटना के बाद युवक सड़क पर दर्द से तड़पता रहा। लोगों ने उसकी मदद करने का प्रयास किया और लगातार एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली।
घायल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। ऐसे में स्थानीय नागरिकों ने इंसानियत का परिचय देते हुए निजी वाहन की व्यवस्था की और युवक को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि स्थानीय नागरिक समय रहते आगे नहीं आते तो घायल युवक की जान भी जा सकती थी।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—
- कई बार 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया।
- लगभग एक घंटे तक कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
- घायल युवक सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा।
- आखिरकार लोगों ने स्वयं वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल पहुंचाया।
108 एंबुलेंस सेवा पर उठे गंभीर सवाल
शहडोल 108 एंबुलेंस लापरवाही की इस घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करती है ताकि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार मिल सके। लेकिन यदि गंभीर सड़क दुर्घटना में भी समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचे तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गोल्डन ऑवर क्यों है महत्वपूर्ण?
चिकित्सकों के अनुसार सड़क दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा यानी Golden Hour सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।यदि इस दौरान घायल को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।ऐसे में एंबुलेंस सेवा में देरी गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
घटना के बाद क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से सवाल पूछे हैं।लोगों की प्रमुख मांगें—
- कॉल रिकॉर्ड की जांच हो।
- एंबुलेंस की GPS लोकेशन जांची जाए।
- रिस्पांस टाइम सार्वजनिक किया जाए।
- यदि लापरवाही मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।यह स्पष्ट किया जाए कि—
- कॉल किस समय प्राप्त हुई?
- एंबुलेंस कहां थी?
- देरी क्यों हुई?
- किसकी जिम्मेदारी तय होती है?
यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
निष्कर्ष
Shahdol 108 एंबुलेंस लापरवाही का यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। दुर्घटना के बाद घायल युवक को समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

