सिद्धि तपस्वियों के सप्त दिवसीय वधामणा कार्यक्रम का मंगलमय शुभारंभ
52 सिद्धितप तपस्वियों का हुआ वधामणा, चत्तर परिवार नामली ने लिया प्रथम दिवस का लाभ
महिदपुर रोड। नवीन महाराणा प्रताप स्टैंड पर चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में 52 सिद्धितप तपस्वियों के सप्त दिवसीय वधामणा कार्यक्रम का सोमवार को मंगलमय शुभारंभ हुआ। सकल जैन श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और तपस्वियों के दर्शन, सम्मान एवं साध्वीश्री के प्रवचन का धर्मलाभ प्राप्त किया।
मनुष्य भव कर्मों को खपाने के लिए मिला है
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि मनुष्य का भव चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ और अनमोल है। यह जीवन केवल खाने-पीने और सांसारिक सुखों में व्यतीत करने के लिए नहीं मिला है, बल्कि कर्मों को खपाने, आत्मा को जगाने और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मिला है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में राग का त्याग करते हुए विराग और वीतराग की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। संसार में रहते हुए व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना चाहिए। आत्मचिंतन, संयम, तप और साधना के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
साध्वीश्री ने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन है। तपस्वियों की साधना समाज के प्रत्येक व्यक्ति को संयम और आत्मचिंतन की प्रेरणा देती है।
गुलाब जल छिड़काव वधामणा का लिया लाभ
सप्त दिवसीय वधामणा कार्यक्रम के प्रथम दिवस गुलाब जल छिड़काव वधामणा का लाभ श्रेणिक कुमार, दिनेश कुमार, विरल कुमार रांका एवं चत्तर परिवार नामली द्वारा लिया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ तपस्वियों का वधामणा किया।
चत्तर परिवार द्वारा लिए गए धार्मिक लाभ की सकल जैन श्री संघ एवं चातुर्मास समिति की ओर से अनुमोदना की गई तथा परिवार का बहुमान किया गया।

साधार्मिक भक्ति एवं प्रभावना का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ मनीष कुमार, हर्ष कुमार एवं चौरडिया परिवार द्वारा लिया गया। परिवार की ओर से श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक प्रभावना की व्यवस्था की गई।
वहीं वधामणा कार्यक्रम में प्रवचन प्रभावना का लाभ सुरेंद्र कुमार, अतुल कुमार एवं अनूप कुमार गोरेचा परिवार रतलाम तथा गोकुल धाम परिवार महिदपुर रोड द्वारा लिया गया।
तपस्वियों की साधना बनी प्रेरणा
52 सिद्धितप तपस्वियों की साधना के प्रति समाजजनों में विशेष श्रद्धा और अनुमोदना का भाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के दर्शन कर उनके तप, त्याग और संयम की अनुमोदना की।
कार्यक्रम के दौरान साध्वीश्री ने कहा कि धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों को पहचानना आवश्यक है। क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों को कम करते हुए आत्मा के वास्तविक स्वरूप को जानने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार धर्माराधना, तप, स्वाध्याय और आत्मचिंतन करना चाहिए।
समाजजनों ने लिया धर्मलाभ
मंगलकारी कार्यक्रम में सकल जैन श्री संघ के साथ बड़ी संख्या में समाज के महानुभाव उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के वधामणा में सहभागिता करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया और साध्वीश्री के प्रेरणादायी प्रवचन का श्रवण किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान नवीन महाराणा प्रताप स्टैंड परिसर भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। समाजजनों ने तपस्वियों की साधना की अनुमोदना करते हुए धर्म, संयम और आत्मचिंतन को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सकल जैन श्री संघ एवं चातुर्मास समिति के तत्वावधान में शुरू हुआ यह सप्त दिवसीय वधामणा कार्यक्रम आगामी दिनों में भी धार्मिक उत्साह और भक्तिभाव के साथ जारी रहेगा। विभिन्न परिवार तपस्वियों के वधामणा, प्रभावना एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों का लाभ लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।
