नर्मदा संरक्षण के लिए जनभागीदारी से बनेगी ठोस कार्ययोजना, रेवा सेवा समागम की जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न
लोकेशन रायसेन
ब्यूरो चीफ उमेश चौबे
संवाद, सहभागिता और कार्ययोजना निर्माण का मंच बना रेवा सेवा समागम
रायसेन। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में नर्मदा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से रेवा सेवा समागम अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किसान भवन, बरेली में किया गया। कार्यशाला में नर्मदा संरक्षण, सहायक नदियों की सुरक्षा, घाट संरक्षण, नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि तथा नर्मदा संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल शामिल हुए। उनके साथ मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड, वरिष्ठ पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिव शंकर, नर्मदा समग्र के न्यासी सचिव एवं जन अभियान परिषद के सलाहकार करण कौशिक, टास्क मैनेजर दरियाव सिंह सूर्यवंशी, भोपाल संभाग समन्वयक वरुण आचार्य, नर्मदा समग्र के संभागीय समन्वयक नवीन बोड़खे सहित अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा सेवा से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मां नर्मदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां नर्मदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों का परिचय कराया गया। नर्मदा संरक्षण एवं सेवा के क्षेत्र में अलग-अलग स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा की गई।
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक श्रीमती प्रिया चौधरी ने कार्यशाला के उद्देश्य और रेवा सेवा समागम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। इस दौरान जिले में किए गए सर्वेक्षण तथा नर्मदा नदी से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़ों और जानकारियों का पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण किया गया।
नर्मदा संरक्षण सरकार के साथ समाज की भी जिम्मेदारी
मुख्य अतिथि नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि नर्मदा नदी का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और इनके आधार पर नर्मदा संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि रेवा सेवा समागम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और कार्ययोजना निर्माण का मंच है। इसमें समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठन और नर्मदा क्षेत्र से जुड़े नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं। प्राप्त सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार कर उन्हें कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार महत्वपूर्ण प्रस्तावों को शासन स्तर तक पहुंचाकर उनके क्रियान्वयन की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
आस्था के साथ सेवा और संरक्षण का संकल्प
नरेंद्र शिवाजी पटेल ने लोगों से आह्वान किया कि मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा को केवल पूजा और आस्था तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे सेवा, संरक्षण, संवर्धन और जनभागीदारी से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि नर्मदा की निर्मलता, अविरलता और पवित्रता बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की सामूहिक जिम्मेदारी है। नर्मदा से लाखों लोगों की आस्था, जीवन और संस्कृति जुड़ी हुई है। इसलिए नदी को स्वच्छ और सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
सहायक नदियों और घाटों के संरक्षण पर जोर
कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड और नर्मदा समग्र के न्यासी सचिव करण कौशिक ने नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुख्य नदी के संरक्षण के साथ उसकी सहायक नदियों और जल स्रोतों की सुरक्षा भी जरूरी है।
कार्यशाला में घाटों के संरक्षण, स्वच्छता और उनके सांस्कृतिक महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नर्मदा के घाट केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
प्राकृतिक और जैविक खेती पर प्रस्तुतीकरण
कार्यशाला में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के टास्क मैनेजर दरियाव सिंह सूर्यवंशी ने नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि विषय पर पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की उपयोगिता पर जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जलग्रहण क्षेत्रों में ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे मिट्टी और जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो तथा प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

घाट संरक्षण की जानकारी दी
नर्मदा समग्र के संभागीय समन्वयक नवीन बोड़खे ने घाट संरक्षण विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने घाटों की स्वच्छता, संरक्षण और उनके सांस्कृतिक महत्व से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी।
उन्होंने नर्मदा तटों पर स्वच्छता बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिक्रमा मार्ग की समस्याओं पर भी चर्चा
कार्यशाला के समापन सत्र में एसडीएम बरेली अंकित जैन ने नर्मदा समाजसेवियों और प्रतिभागियों से चर्चा की। इस दौरान नर्मदा परिक्रमा मार्ग में आने वाली समस्याओं, श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं और स्थानीय स्तर पर किए जा सकने वाले कार्यों के संबंध में सुझाव लिए गए।
प्रतिभागियों ने नर्मदा संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने रखे। इन सुझावों को संकलित कर आगामी कार्ययोजना में शामिल किए जाने की बात कही गई।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण
कार्यक्रम के अंत में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन राममोहन रघुवंशी, ब्लॉक समन्वयक उदयपुरा ने किया। बाड़ी की ब्लॉक समन्वयक श्रीमती सविता कावरे सहित प्रस्फुटन समितियों, नवांकुर संस्थाओं, नर्मदा समग्र के कार्यकर्ताओं और नर्मदा समाजसेवियों की सहभागिता रही।
अंत में जिला समन्वयक श्रीमती प्रिया चौधरी ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नर्मदा संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान और भविष्य की ठोस कार्ययोजना की दिशा में आगे बढ़ना रहा।
