September 2026 Vrat-Tyohar: सितंबर में जन्माष्टमी से गणेश चतुर्थी तक कई बड़े पर्व, हरतालिका तीज और अनंत चतुर्दशी भी; देखें प्रमुख त्योहारों की लिस्ट
सितंबर 2026 में व्रत-त्योहारों की रहेगी धूम, कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर और हरतालिका तीज 14 सितंबर को; ऋषि पंचमी, राधा अष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और पितृ पक्ष भी रहेंगे खास
धर्म डेस्क। सितंबर 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस महीने कई प्रमुख हिंदू व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, राधा अष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और अनंत चतुर्दशी जैसे महत्वपूर्ण पर्व सितंबर में मनाए जाएंगे। इसके साथ ही पितृ पक्ष की शुरुआत भी इसी महीने होने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का विशेष दौर रहेगा।
सितंबर की शुरुआत से ही मंदिरों और घरों में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला तेज हो जाएगा। विशेष रूप से जन्माष्टमी और गणेश उत्सव को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर तैयारियां होती हैं। वहीं हरतालिका तीज जैसे व्रत का महिलाओं के बीच विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
धार्मिक पंचांग के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर तिथि के आरंभ और समाप्त होने के समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष पूजा या व्रत के शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या जानकार पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी
सितंबर के प्रमुख त्योहारों में सबसे पहले कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व खास रहेगा। दिए गए विवरण के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करते हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और कई स्थानों पर भजन-कीर्तन तथा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष आरती और पूजा की परंपरा है। घरों में भी श्रद्धालु लड्डू गोपाल का श्रृंगार कर उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी और अन्य व्यंजनों का भोग लगाते हैं।
गणेश चतुर्थी से शुरू होगा गणेश उत्सव
सितंबर महीने में गणेश चतुर्थी भी प्रमुख धार्मिक पर्वों में शामिल है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है और गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं स्थापित करते हैं।
गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की सुबह-शाम पूजा और आरती की जाती है। कई स्थानों पर सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। अंतिम दिन गणेश प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाता है।
14 सितंबर को हरतालिका तीज
दिए गए विवरण के अनुसार हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। सनातन परंपरा में हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत करती हैं, जबकि कई अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस व्रत को रखती हैं।
हरतालिका तीज के दौरान शिव-पार्वती की पूजा, कथा और व्रत से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की परंपराओं में कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।
ऋषि पंचमी का भी विशेष महत्व
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के आसपास आने वाली ऋषि पंचमी का भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दिन सप्तऋषियों की पूजा करने की परंपरा बताई जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु इस दिन व्रत और पूजा करते हैं। कई परिवारों में ऋषि पंचमी से जुड़ी पारंपरिक पूजा-पद्धति का पालन पीढ़ियों से किया जाता रहा है।
इस पर्व को आत्मशुद्धि और धार्मिक अनुशासन से भी जोड़कर देखा जाता है।
राधा अष्टमी पर होगी राधा रानी की पूजा
सितंबर में राधा अष्टमी भी मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की परम आराध्या राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मथुरा-वृंदावन और बरसाना सहित देश के कई कृष्ण मंदिरों में राधा अष्टमी पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु राधा-कृष्ण की पूजा कर भजन-कीर्तन करते हैं।
जन्माष्टमी के कुछ दिनों बाद आने वाली राधा अष्टमी वैष्णव परंपरा में महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है।
विश्वकर्मा पूजा में औजारों और मशीनों का पूजन
सितंबर महीने में विश्वकर्मा पूजा भी महत्वपूर्ण रहेगी। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्प से संबंधित देवता के रूप में पूजा जाता है।
इस अवसर पर विशेष रूप से कारखानों, औद्योगिक संस्थानों, वर्कशॉप और तकनीकी कार्यस्थलों पर मशीनों तथा औजारों की पूजा की जाती है। कारीगर और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा की आराधना कर अपने काम में सफलता और प्रगति की कामना करते हैं।
देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजा बड़े स्तर पर आयोजित की जाती है।
अनंत चतुर्दशी पर गणपति को दी जाएगी विदाई
सितंबर में अनंत चतुर्दशी भी प्रमुख पर्वों में शामिल है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा से जुड़ा माना जाता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर इसी अवसर पर गणेश उत्सव का समापन होता है।
गणेश चतुर्थी पर स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं का अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किए जाने की व्यापक परंपरा है। गणपति विसर्जन के दौरान श्रद्धालु शोभायात्राएं निकालते हैं और अगले वर्ष पुनः आने की कामना के साथ भगवान गणेश को विदाई देते हैं।
सितंबर में शुरू होगा पितृ पक्ष
सितंबर 2026 की धार्मिक गतिविधियों में पितृ पक्ष की शुरुआत भी महत्वपूर्ण रहेगी। सनातन परंपरा में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित माना जाता है।
इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों की स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृ पक्ष के दौरान कई श्रद्धालु धार्मिक स्थलों और पवित्र नदियों के किनारे तर्पण तथा अन्य अनुष्ठान करते हैं।
सितंबर 2026 में धार्मिक आयोजनों की रहेगी धूम
कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, राधा अष्टमी, विश्वकर्मा पूजा, अनंत चतुर्दशी और पितृ पक्ष की शुरुआत के कारण सितंबर का महीना धार्मिक आयोजनों से भरा रहेगा।
जन्माष्टमी पर कृष्ण मंदिरों में उत्सव होगा तो गणेश चतुर्थी के साथ गणपति उत्सव की शुरुआत होगी। हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की आराधना की जाएगी, वहीं अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के आयोजन होंगे।
