सीहोर कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु को हार्ट अटैक, 100 मीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाने में लगा आधा घंटा
Sehore Kanwar Yatra 2026: मध्य प्रदेश के सीहोर में मंगलवार, 25 अगस्त को शुरू हुई कांवड़ यात्रा के पहले ही दिन एक श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ने से अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के जलगांव से कांवड़ यात्रा में शामिल होने आए श्रद्धालु को हार्ट अटैक आया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार डॉक्टर को श्रद्धालु को कंधे पर उठाकर हाईवे तक ले जाना पड़ा, जहां से एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
इस घटना के बाद बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और एंबुलेंस के लिए अलग रास्ता सुनिश्चित करने की जरूरत को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक निकली कांवड़ यात्रा
सीहोर में 25 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे सीवन नदी के तट से प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम तक कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई। करीब 11 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ ही महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु सीहोर पहुंचे।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए। पूरे मार्ग पर धार्मिक और भक्तिमय माहौल रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण कई स्थानों पर भारी भीड़ भी देखने को मिली।
महाराष्ट्र के जलगांव से आया था श्रद्धालु
जानकारी के अनुसार जिस श्रद्धालु की तबीयत खराब हुई, वह महाराष्ट्र के जलगांव का रहने वाला बताया जा रहा है। वह विशेष रूप से कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए सीहोर पहुंचा था। यात्रा के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और हार्ट अटैक की स्थिति बताई गई।
श्रद्धालु की हालत बिगड़ते ही आसपास मौजूद लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों ने तत्काल उसकी स्थिति संभालने का प्रयास किया। इसी दौरान एंबुलेंस को भी सूचना दी गई।
महज 100 मीटर दूर थी एंबुलेंस, लेकिन रास्ता बना चुनौती
घटना का सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि एंबुलेंस कथित तौर पर मरीज से करीब 100 मीटर की दूरी पर मौजूद थी, लेकिन भीड़ के कारण वह श्रद्धालु तक नहीं पहुंच पाई। कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के चलते रास्ता पूरी तरह व्यस्त था।
बताया जा रहा है कि मरीज को एंबुलेंस तक पहुंचाने की प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लग गया। आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में यह देरी चिंता का विषय बनी। घटना ने धार्मिक आयोजनों के दौरान एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध कॉरिडोर बनाए रखने की आवश्यकता को भी सामने रखा है।
डॉक्टर ने कंधे पर उठाकर मरीज को हाईवे तक पहुंचाया
जब एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंच सकी तो मौके पर मौजूद डॉक्टर ने खुद जिम्मेदारी संभाली। जानकारी के मुताबिक डॉक्टर ने श्रद्धालु को कंधे पर उठाया और भीड़ के बीच से पैदल हाईवे की ओर लेकर गए।
हाईवे तक पहुंचने के बाद मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया और उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। इस दौरान आसपास मौजूद श्रद्धालुओं ने भी रास्ता बनाने और मरीज को सुरक्षित बाहर निकालने में सहयोग किया।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से यातायात पर भी असर
कुबेरेश्वर धाम की कांवड़ यात्रा को लेकर सीहोर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। इसके चलते प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए। भोपाल-इंदौर मार्ग से गुजरने वाले वाहनों के लिए पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था और डायवर्जन की तैयारी की गई थी, ताकि कांवड़ यात्रियों और सामान्य यातायात को व्यवस्थित किया जा सके।
इसके बावजूद धार्मिक यात्रा के दौरान एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आपातकालीन वाहनों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। मंगलवार को सामने आई घटना ने इसी चुनौती को उजागर किया।
बड़े आयोजनों में इमरजेंसी कॉरिडोर की जरूरत
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों या हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति कभी भी उत्पन्न हो सकती है। बुजुर्ग श्रद्धालुओं, पहले से बीमार लोगों और लंबी दूरी पैदल तय करने वालों के लिए स्वास्थ्य जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
ऐसे आयोजनों में एंबुलेंस की उपलब्धता के साथ उसका मरीज तक समय पर पहुंच पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए भीड़ वाले मार्गों पर इमरजेंसी कॉरिडोर, चिकित्सा सहायता केंद्र और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं अहम भूमिका निभाती हैं।
कुबेरेश्वर धाम तक 11 किलोमीटर की यात्रा
सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक निकाली जा रही कांवड़ यात्रा करीब 11 किलोमीटर लंबी है। यात्रा में शामिल श्रद्धालु पवित्र जल लेकर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए धाम पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजन को लेकर सीहोर सहित आसपास के क्षेत्रों में भी उत्साह का माहौल है।
पहले दिन ही महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद चिकित्सा और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत सामने आई है। राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद डॉक्टर और अन्य लोगों ने सक्रियता दिखाते हुए मरीज को एंबुलेंस तक पहुंचाया और उपचार के लिए अस्पताल रवाना किया।
