Sehore शिक्षा विभाग में प्रमोशन सूची को लेकर विवाद, वरिष्ठ कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप
मध्य प्रदेश के Sehore जिला शिक्षा कार्यालय में कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग द्वारा लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति और क्रमोन्नति प्रक्रिया के तहत जारी की गई सूची पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वरिष्ठता नियमों को दरकिनार करते हुए कुछ जूनियर कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है, जबकि लंबे समय से सेवा दे रहे कई वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम सूची से गायब हैं।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत निर्धारित समय सीमा में पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसी क्रम में जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा 37 लिपिक कर्मचारियों से मार्च 2026 की स्थिति में गोपनीय चरित्रावली और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। लेकिन सूची सामने आने के बाद विभाग के अंदर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
वरिष्ठ कर्मचारियों को नजरअंदाज करने का आरोप
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति के लाभ से वंचित किया जा रहा है। आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1992 और 2001 से कार्यरत कई वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए, जबकि वर्ष 2007 में नियुक्त हुए कुछ कनिष्ठ कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ ने इस मामले में आपत्ति दर्ज कराते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से जांच की मांग की है। संघ का कहना है कि पदक्रम सूची तैयार करते समय नियमों का पालन नहीं किया गया है, जिससे कई पात्र कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के करीब कर्मचारियों के नाम भी गायब
सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसमें कई ऐसे कर्मचारियों के नाम शामिल नहीं हैं, जो अगले एक-दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमानुसार ऐसे कर्मचारियों को पदोन्नति प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
कर्मचारियों ने मांग की है कि जारी सूची की दोबारा समीक्षा की जाए और वरिष्ठता के आधार पर सभी पात्र कर्मचारियों को उचित लाभ दिया जाए।
पहले भी सामने आ चुके हैं लापरवाही के मामले
सीहोर शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की पदोन्नति और क्रमोन्नति से जुड़े विवाद का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पात्र कर्मचारियों को समय पर लाभ नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
ऐसा ही एक मामला चार शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी सेवा अवधि पूरी होने के बावजूद क्रमोन्नति सूची में नाम शामिल नहीं किया गया। बताया गया कि शिक्षकों की फाइल समय पर आगे नहीं बढ़ पाने के कारण उन्हें लाभ से वंचित होना पड़ा।
शिक्षकों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर हुई लापरवाही के कारण उन्हें लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ा और अब उन्हें अपनी वरीयता बहाल कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
कर्मचारी संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी
पदोन्नति सूची को लेकर नाराज कर्मचारियों और संगठनों का कहना है कि यदि सूची में सुधार नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकते हैं।
कर्मचारियों की मांग है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जाए और वरिष्ठता नियमों का पालन किया जाए। उनका कहना है कि किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और पात्र कर्मचारियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
अब सभी की नजर जिला शिक्षा कार्यालय और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। यदि आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो संशोधित सूची जारी की जा सकती है।
इस पूरे मामले को लेकर अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन सबसे जरूरी है। यदि वरिष्ठता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि हुई है तो उसे जल्द से जल्द सुधार किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र कर्मचारी के साथ अन्याय न हो। वहीं विभागीय अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों की निष्पक्ष जांच करेंगे और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पदोन्नति केवल पद बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह वर्षों की सेवा, अनुभव और अधिकारों से जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि विभाग इस विवाद का समाधान किस तरह करता है और क्या संशोधित सूची जारी कर सभी कर्मचारियों को उचित अवसर दिया जाता है।
