Aravalli Case : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर लगाई रोक, चार राज्यों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Aravalli Hills और अरावली रेंज पर दिए गए अपने ही फैसले पर रोक लगा दी है। इस फैसले के साथ ही केंद्र सरकार और चार अरावली राज्यों—राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा—को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और इसके सही परिभाषा को सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।
Aravalli भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसकी लंबाई लगभग 670 किलोमीटर है। यह दिल्ली के पास से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है। इसकी उम्र वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 20 अरब साल है। इसे भारतीय पर्यावरणीय विरासत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए फैसले को स्थगित किया
Aravalli मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि पहले जारी की गई परिभाषा और आदेश में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलुओं को नजरअंदाज किया गया था। विशेष रूप से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 20 नवंबर 2025 को जारी परिभाषा को “स्थगित” कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछला पैनल मुख्य रूप से नौकरशाहों से बना था और इसमें निष्पक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिभाषा अरावली पहाड़ियों के संरक्षण के दायरे को सीमित कर सकती है। यही कारण है कि नए आदेश में एक उच्च स्तरीय, विशेषज्ञों से युक्त कमेटी का गठन किया गया है।
नई एक्सपर्ट कमेटी का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करने के लिए नई हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया। इस कमेटी का कार्य अरावली पहाड़ियों की सही परिभाषा तय करना, माइनिंग गतिविधियों का पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन करना और संरक्षण से जुड़ी नीतियों पर सुझाव देना होगा।
कमेटी में भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, वन विशेषज्ञ और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि कमेटी की रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यपरक और निष्पक्ष होनी चाहिए। यह कमेटी पहले पैनल की तुलना में अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यापक अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Aravalli पहाड़ियों और रेंज की सही परिभाषा न केवल माइनिंग और भूमि उपयोग नीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय निवासियों, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

Aravalli पर्वतमाला का महत्व
Aravalli भारत की सबसे पुरानी और जैविक रूप से विविध पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह क्षेत्र न केवल वन्य जीवन और जैव विविधता का घर है, बल्कि इसकी पहाड़ियाँ बारिश और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अरावली की मिट्टी और प्राकृतिक जल स्रोत आसपास के कृषि क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि मौजूदा परिभाषा से Aravalli के संरक्षण का दायरा सीमित हो सकता है। पर्वत श्रृंखला में माइनिंग, अवैध निर्माण और वनक्षेत्र की कटाई जैसी गतिविधियों से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। इस वजह से अदालत ने उच्च स्तरीय वैज्ञानिक जांच का आदेश दिया।
चार राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा को नोटिस जारी किया। इन राज्यों से पूछा गया कि उन्होंने अरावली के संरक्षण और भूमि उपयोग की नीतियों में क्या कदम उठाए हैं और किस आधार पर पिछले फैसले को लागू किया गया।
कोर्ट ने कहा कि पर्वत श्रृंखला की परिभाषा, माइनिंग गतिविधियों पर रोक या अनुमति और इसके संरक्षण की सीमा के मुद्दों को सुलझाना अत्यंत जरूरी है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी राज्यों को वैज्ञानिक और तथ्यपरक उत्तर देने होंगे।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। अदालत ने उम्मीद जताई है कि इस सुनवाई में चारों राज्यों और केंद्र सरकार की तरफ से विस्तृत रिपोर्ट और आवश्यक डेटा प्रस्तुत किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अब यह सुनवाई केवल स्थगन के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे व्यापक रूप में अरावली संरक्षण नीति के नजरिए से देखा जाएगा।
कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में कोई भी टिप्पणी या निर्णय पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के हित में हो। इसके लिए सभी पक्षों से निष्पक्ष और तथ्यपरक जानकारी मंगाई गई है।
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माइनिंग और भूमि उपयोग के मुद्दे
Aravalli पहाड़ियों में माइनिंग गतिविधियों को लेकर पिछले कई सालों से विवाद चला आ रहा है। कई बार राज्यों और केंद्र सरकार ने अलग-अलग नीतियों के आधार पर माइनिंग की अनुमति दी है। इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान हुआ है, बल्कि स्थानीय निवासियों और कृषि भूमि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Aravalli की संरचना, इसकी ऊँचाई और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए माइनिंग गतिविधियों की अनुमति या रोक के निर्णय लेने होंगे। कोर्ट ने जोर दिया कि कोई भी नीति केवल आर्थिक लाभ के दृष्टिकोण से नहीं बनाई जानी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव जैव विविधता, जल संसाधन और स्थानीय जीवन पर भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
Aravalli मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने पहले फैसले पर रोक लगाकर नई और अधिक निष्पक्ष जांच की दिशा में पहल की है। चार राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने के साथ-साथ नई एक्सपर्ट कमेटी के गठन से उम्मीद है कि अरावली के प्राकृतिक और पर्यावरणीय महत्व की रक्षा की जा सकेगी।
यह फैसला पर्यावरणीय न्याय और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत की रक्षा में केवल प्रशासनिक या कानूनी दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तथ्यपरक निर्णय भी उतने ही आवश्यक हैं।

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