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टीएमसी में बड़ी बगावत! Sayani Ghosh समेत 20 सांसदों ने संसद में अलग व्यवस्था की मांग की, ममता- अभिषेक को झटका

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Published On: 10 June 2026
टीएमसी में बड़ी बगावत! Sayani Ghosh समेत 20 सांसदों ने संसद में अलग व्यवस्था की मांग की, ममता- अभिषेक को झटका

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टीएमसी में बड़ी बगावत! Sayani Ghosh समेत 20 सांसदों ने संसद में अलग व्यवस्था की मांग की, 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य में विधायक दल के भीतर बढ़ते असंतोष के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संसदीय दल में भी दरार खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। टीएमसी के 20 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने और अलग व्यवस्था की मांग किए जाने की खबर ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस सूची में जादवपुर से सांसद और पार्टी की चर्चित युवा नेता सयानी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि Sayani Ghosh को टीएमसी की नई पीढ़ी के सबसे प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका इस समूह के साथ दिखाई देना पार्टी नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

संसदीय दल में असंतोष की खुली तस्वीर

सूत्रों के अनुसार टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अलग पहचान और व्यवस्था देने की मांग की है। पत्र में कथित तौर पर संसदीय दल के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि सांसदों के एक समूह ने अभिषेक बनर्जी के स्थान पर वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को संसदीय दल का नेता बनाने की मांग रखी है।

यदि यह मांग औपचारिक रूप से आगे बढ़ती है तो यह टीएमसी के भीतर नेतृत्व को लेकर अब तक का सबसे बड़ा असंतोष माना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लंबे समय से पार्टी के भीतर विभिन्न स्तरों पर असहमति की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अब यह असंतोष सार्वजनिक रूप लेता दिखाई दे रहा है।

कौन हैं Sayani Ghosh ?

सयानी घोष पश्चिम बंगाल की जानी-मानी अभिनेत्री, गायिका और युवा राजनीतिक चेहरा हैं। उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। राजनीति में आने से पहले वह बंगाली मनोरंजन जगत का एक चर्चित नाम थीं।

1993 में कोलकाता में जन्मीं सयानी घोष ने अभिनय के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। यही कारण था कि टीएमसी ने उन्हें युवा और आधुनिक चेहरे के रूप में राजनीति में आगे बढ़ाया।

2021 में टीएमसी में हुई थीं शामिल

सयानी घोष ने वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया। हालांकि वे चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा।

राजनीति में उनकी सक्रियता और जनसभाओं में प्रभावशाली उपस्थिति के कारण उन्हें जल्द ही पार्टी की युवा इकाई में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल गईं। बाद में उन्हें तृणमूल युवा कांग्रेस का नेतृत्व भी सौंपा गया।

विवादों से भी रहा है नाता

सयानी घोष कई बार अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रही हैं। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके एक गीत को लेकर काफी विवाद हुआ था। विपक्षी दलों ने उस पर सवाल उठाए थे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था।

इसके अलावा उन्होंने कई चुनावी सभाओं में भाजपा नेताओं पर तीखे हमले किए। उनके कुछ बयान राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहे और सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बने।

त्रिपुरा में गिरफ्तारी से बढ़ी थी पहचान

वर्ष 2021 में त्रिपुरा में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सयानी घोष को गिरफ्तार किया गया था। उस समय उन्होंने भाजपा के खिलाफ चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

त्रिपुरा में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस घटना के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान और मजबूत हुई तथा टीएमसी ने उन्हें पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल कर लिया।

जादवपुर से बनीं सांसद

लोकसभा चुनाव 2024 में टीएमसी ने सयानी घोष को जादवपुर संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज कर संसद तक का सफर तय किया।

जादवपुर सीट को पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता है। यहां से जीत हासिल करने के बाद सयानी घोष का राजनीतिक कद और बढ़ गया था। उन्हें पार्टी के भविष्य के नेताओं में देखा जाने लगा था।

किन सांसदों के नाम सामने आए?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल, सुवेंदु शेखर रॉय सहित कुल 20 सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

इन सांसदों का एक साथ सामने आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि असंतोष किसी एक क्षेत्र या समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

ममता और अभिषेक के लिए क्यों अहम है मामला?

टीएमसी की राजनीति में ममता बनर्जी सर्वोच्च नेतृत्व का चेहरा रही हैं, जबकि पिछले कुछ वर्षों में अभिषेक बनर्जी को पार्टी के भविष्य के नेतृत्व के रूप में स्थापित किया गया है।

ऐसे में यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग नेतृत्व परिवर्तन या नई व्यवस्था की मांग करता है तो यह सीधे तौर पर पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह की स्थिति पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

भाजपा को मिल सकता है राजनीतिक फायदा

टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी का फायदा भाजपा उठाने की कोशिश कर सकती है। पश्चिम बंगाल में भाजपा लंबे समय से टीएमसी को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में यदि पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ता है तो विपक्ष को राजनीतिक अवसर मिल सकता है।

हालांकि अभी तक किसी सांसद ने औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन संसदीय स्तर पर अलग पहचान की मांग को बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। पार्टी इस घटनाक्रम को कैसे संभालती है और असंतुष्ट सांसदों से बातचीत के जरिए समाधान निकालती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम सामान्य नहीं है। सयानी घोष जैसे युवा और प्रभावशाली चेहरे का इस समूह के साथ नाम जुड़ना टीएमसी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। यदि असंतोष बढ़ता है तो इसका असर पार्टी की संगठनात्मक और संसदीय रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सप्ताह टीएमसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि पार्टी को न केवल अपने सांसदों को एकजुट रखना होगा, बल्कि जनता के बीच यह संदेश भी देना होगा कि संगठन अभी भी मजबूत और स्थिर है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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