MP News: Sarthak app में फिर बड़ी गड़बड़ी, घर बैठे लग रही अटेंडेंस, बिना काम किए मिल रही सैलरी
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए शुरू किया गया ‘Sarthak app ’ एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। इस ऐप को इसलिए लागू किया गया था ताकि सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता आए, कर्मचारियों की हाजिरी सही तरीके से दर्ज हो और फर्जी उपस्थिति पर रोक लग सके। लेकिन हाल ही में सामने आई जांच रिपोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
रीवा संभाग के कई जिलों में किए गए परीक्षण में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। कई लोग घर बैठे ही अटेंडेंस लगा रहे थे, तो कुछ ऐसे भी थे जो ऑफिस से दूर किसी अन्य स्थान पर बैठकर उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इन सभी को बिना किसी रुकावट के पूरी सैलरी भी मिल रही थी।
तीन महीने की जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा रीवा संभाग के छह जिलों—रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, अनूपपुर और शहडोल—में तीन महीने तक सार्थक ऐप की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया गया। इस दौरान जो तथ्य सामने आए, वे काफी चौंकाने वाले हैं।
जांच में पाया गया कि कई कर्मचारियों ने ऐप का गलत उपयोग किया। कुछ कर्मचारी अपने घर से ही अटेंडेंस लगा रहे थे, जबकि कुछ लोग बाजार, यात्रा या अन्य स्थानों से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन था, क्योंकि इस ऐप का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कर्मचारी निर्धारित कार्यस्थल पर ही उपस्थित रहें।
इस तरह की अनियमितताओं ने न केवल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर किया है।
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कुछ अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। जांच में यह सामने आया है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सार्थक ऐप के नियमों का पालन नहीं किया।
सतना जिले में सहायक संचालक वरिष्ठ स्तर के अधिकारी करुणेश तिवारी का नाम भी इस अनियमितता में शामिल पाया गया है। उनके अलावा अन्य कई अधिकारियों की उपस्थिति भी संदिग्ध पाई गई है।
यह बात इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि जब वरिष्ठ अधिकारी ही नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो नीचे के कर्मचारियों से अनुशासन की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।
रीवा कृषि मंडी में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में सबसे अधिक अनियमितताएं रीवा कृषि उपज मंडी में पाई गई हैं। यहां कुल 18 अधिकारी और कर्मचारी ऐसे मिले हैं जिन्होंने गलत तरीके से अटेंडेंस दर्ज की।
इन कर्मचारियों में नायबदार, सहायक उप निरीक्षक और अन्य पदों पर कार्यरत लोग शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी को पूरी सैलरी दी जा रही थी, जबकि उनकी उपस्थिति नियमों के अनुसार संदिग्ध पाई गई।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि रीवा मंडी क्षेत्र में कृषि गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं और यहां प्रशासनिक अनुशासन का पालन बेहद जरूरी है।
Sarthak app का उद्देश्य और असल स्थिति
सार्थक ऐप को इस उद्देश्य से लागू किया गया था कि सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सके और पारदर्शिता लाई जा सके। इस ऐप के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना था कि कर्मचारी समय पर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित हों और बिना अनुमति अनुपस्थित न रहें।
लेकिन मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि तकनीक का सही उपयोग न होने के कारण यह सिस्टम अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। कई मामलों में GPS आधारित निगरानी के बावजूद गलत लोकेशन से अटेंडेंस लगाई गई, जिससे सिस्टम की तकनीकी और प्रशासनिक दोनों तरह की कमजोरियां उजागर हो गई हैं।
मंडी बोर्ड की सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामला सामने आने के बाद राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक ने सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इस मामले की पूरी जांच कर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस तरह की लापरवाही सरकारी सिस्टम की छवि को नुकसान पहुंचाती है और जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम वास्तव में उतने प्रभावी हैं जितना उन्हें माना जाता है। सरकार द्वारा डिजिटलाइजेशन के जरिए पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जब उसी सिस्टम का गलत इस्तेमाल होने लगे तो उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक लागू कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सख्त निगरानी और नियमित ऑडिट भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो सिस्टम में खामियां बनी रहेंगी।
कर्मचारियों की लापरवाही और जवाबदेही का अभाव
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कर्मचारियों और अधिकारियों में जवाबदेही की कमी साफ दिखाई दे रही है। जब लोग जानते हैं कि उनकी उपस्थिति डिजिटल रूप से ट्रैक हो रही है, उसके बावजूद गलत स्थान से अटेंडेंस लगाना गंभीर अनुशासनहीनता को दर्शाता है।
यह भी सवाल उठता है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर नियमित जांच और निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।
निष्कर्ष
सार्थक ऐप में सामने आई यह गड़बड़ी मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। घर बैठे अटेंडेंस लगाना, गलत स्थान से उपस्थिति दर्ज करना और बिना काम के पूरी सैलरी लेना न केवल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि सरकारी कार्य संस्कृति पर भी सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाते हैं और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
