श्री Saraswatinand Swami Bhajanashram “वैकुंठ धाम” ने रमेन्द्र दादा को दी श्रद्धांजलि
थांदला। जीवन और मृत्यु के अनिवार्य चक्र में प्रत्येक व्यक्ति की समाज में छवि उसके कर्म, वाणी और व्यवहार से बनती है। इसी क्रम में श्री Saraswatinand Swami Bhajanashram “वैकुंठ धाम” ने अपने सक्रिय उपाध्यक्ष रमेन्द्र दादा सोनी के आकस्मिक निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
रमेन्द्र दादा का जीवन और योगदान
रमेन्द्र दादा का जीवन समाजसेवा और धार्मिकता से ओतप्रोत रहा। उन्होंने गुरु और गुरुभक्तों की निःस्वार्थ सेवा में अपने सरल हृदय से योगदान दिया। उनके व्यक्तित्व में धर्म, भक्ति और सेवा की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी। उनके कार्यों ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ युवाओं में सेवा और धार्मिकता की प्रेरणा भी दी।
उनकी धार्मिकता और समाजसेवा के कारण ही उन्हें भजनाश्रम में सक्रिय उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने हमेशा समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से काम किया और गुरु, भक्तों और सामान्य लोगों के प्रति अपने दायित्वों का पालन किया।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
रमेन्द्र दादा के आकस्मिक निधन के पश्चात श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भजनाश्रम में किया गया। इस सभा में ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने उनके सरल हृदय से गुरु और गुरुभक्तों की निःस्वार्थ सेवा का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उनके पुत्र अतुल सहित परिवार को अभिनन्दन पत्र भेंट किया गया। अभिनन्दन पत्र का वाचन उपाध्यक्ष भागवत शुक्ला ने किया।
श्रद्धांजलि सभा में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। यह समारोह उनके योगदान और आदर्शों को याद करने का अवसर था।

समाजसेवी और धर्मगुरुओं की उपस्थिति
श्रद्धांजलि सभा में जीवदया अभियान के राष्ट्रीय संयोजक पवन नाहर, आत्माराम शर्मा, भोला भण्डारा परिवार के श्रीमंत अरोड़ा, चिंटू वैरागी सहित अन्य समाजसेवी संस्थाओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। न्यास मंडल के आश्रम प्रभारी पंडित भूदेव आचार्य, अध्यक्ष राजेन्द्र अग्निहोत्री, सचिव डॉ जया पाठक, कोषाध्यक्ष श्रीरंग आचार्य, प्रदीप अरोड़ा, ओम वैरागी, दीपक आचार्य, नामदेव आचार्य, सत्यप्रकाश परमार, गणपतिदास वैरागी और ईश्चरालाल वाणी समेत मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के अनेक गुरु भक्त उपस्थित थे।
उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने रमेन्द्र दादा के जीवन और कार्यों की सराहना की और उन्हें आदर्श के रूप में अपनाने का संदेश दिया।
श्रद्धांजलि सभा में प्रस्तुत विचार
सभा में यह बात सामने आई कि रमेन्द्र दादा का जीवन न केवल धार्मिकता से भरा हुआ था बल्कि उन्होंने समाजसेवा और गुरुभक्तों के प्रति भी असीम प्रेम और सेवा भावना दिखाई। उनके आदर्शों और जीवन के मूल्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
समाजसेवी और धर्मगुरुओं ने कहा कि उनके कार्य और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्पद होंगे। रमेन्द्र दादा ने हमेशा सेवा और धर्म के मार्ग पर चलकर यह दिखाया कि निःस्वार्थ कार्य और जनसेवा ही व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाती हैं।

समाज में संदेश और प्रभाव
श्रद्धांजलि सभा ने यह संदेश दिया कि समाजसेवा और धार्मिक कर्तव्य का पालन करना ही व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाता है। रमेन्द्र दादा की याद में आयोजित यह सभा उनके योगदान को सम्मानित करने के साथ-साथ समाज में उनके आदर्शों और धर्मनिष्ठा को फैलाने का कार्य भी रही।
उपस्थित सभी लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने और समाज में निःस्वार्थ सेवा की भावना फैलाने का संकल्प लिया। यह समारोह न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि रमेन्द्र दादा के द्वारा दिखाए गए मार्गदर्शन और सहयोग को आगे बढ़ाने का माध्यम भी था।
निष्कर्ष
