सारंगपुर श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर कपिलेश्वर तीर्थधाम में मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कालीसिंध में स्नान कर ऋषिपूजन, यज्ञोपवीत पूजन और हवन किया।
सारंगपुर। सारंगपुर श्रावणी उपाकर्म के तहत श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारंगपुर स्थित कपिल मुनि की तपोभूमि एवं कालीसिंध नदी के तट पर धार्मिक आयोजन श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कपिलेश्वर तीर्थधाम पहुंचकर माँ कालीसिंध के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई तथा विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया।
मंत्री डॉ. टेटवाल ने भगवान श्री कपिलेश्वर महादेव की पूजन-अर्चना कर हवन में आहुति दी और क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि श्रावणी उपाकर्म प्रत्येक सनातनी के लिए महत्वपूर्ण है। यह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संस्कार और सदाचरण का संकल्प लेने का पर्व है।
प्रायश्चित, संस्कार और स्वाध्याय हैं उपाकर्म के तीन प्रमुख पक्ष
मंत्री डॉ. टेटवाल ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के तीन प्रमुख पक्ष—प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय हैं। वैदिक परंपरा में श्रावणी पर्व को शरीर, मन और इंद्रियों की पवित्रता से जुड़ा पुण्य पर्व माना गया है। इस अवसर पर यज्ञोपवीत पूजन एवं उपनयन संस्कार का भी विधान है। इसके माध्यम से द्विजत्व के संकल्प का नवीनीकरण किया जाता है।
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि परंपरागत रूप से तीर्थ अवगाहन, दशस्नान, हेमाद्रि संकल्प, तर्पण, ऋषिपूजन एवं यज्ञोपवीत पूजन जैसे कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि इन धार्मिक अनुष्ठानों से आत्मशुद्धि होती है और पितरों के तर्पण से उन्हें तृप्ति प्राप्त होती है।
सदाचार और संयम का लिया संकल्प
मंत्री ने कहा कि सारंगपुर श्रावणी उपाकर्म व्यक्ति को अपने आचरण का आत्मावलोकन करने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर पाप-निवारण के लिए पातक, उपपातक एवं महापातक कर्मों से बचने, परद्रव्य का अपहरण नहीं करने, परनिंदा से दूर रहने, आहार-विहार में संयम रखने, हिंसा से बचने, इंद्रियों पर नियंत्रण रखने तथा सदाचरण करने का संकल्प लिया जाता है।
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि सनातन संस्कृति में पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने और समाज को सद्मार्ग की ओर ले जाने का माध्यम हैं। श्रावणी पर्व हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा से जोड़ता है।
कपिलेश्वर तीर्थधाम में वैदिक विधि से पूजन
कपिलेश्वर तीर्थधाम कालीसिंध तट पर पंडित पवन पारीक, पंडित भूपेंद्र जोशी, पंडित कैलाश शर्मा एवं पंडित बालकृष्ण शर्मा के सानिध्य में हेमाद्रि स्नान एवं संकल्प कराया गया। स्नान के पश्चात ऋषिपूजन, सूर्योपस्थान एवं यज्ञोपवीत पूजन के साथ विधि-विधानपूर्वक हवन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर ब्राह्मण समाज अध्यक्ष आशुतोष वेद, पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कालीसिंध तट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा कपिलेश्वर धाम
श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर कपिलेश्वर तीर्थधाम में श्रद्धालुओं ने माँ कालीसिंध में स्नान कर भगवान कपिलेश्वर महादेव के दर्शन किए। पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और उत्साह का वातावरण रहा। सारंगपुर श्रावणी उपाकर्म के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संकल्प लिया।


