संवाददाता: मनोज कुमार पुष्पाद , संरागपुर
Sarangpur में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न जनसमस्याओं से उन्हें अवगत कराया। यह मुलाकात क्षेत्रीय विकास, बुनियादी सुविधाओं की कमी और लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर हुई, जिसमें स्थानीय नागरिकों की ओर से एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा गया।
प्रतिनिधिमंडल ने दिग्विजय सिंह के समक्ष स्पष्ट रूप से बताया कि क्षेत्र में कई मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिसके कारण आम जनता को रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस दौरान मुख्य रूप से प्रदीप जैन, दिनेश पुरी, महेश खाती और रामबाबू सेन मौजूद रहे। सभी ने क्षेत्र की बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतों को दिग्विजय सिंह के सामने प्रमुखता से रखा। दिग्विजय सिंह ने सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इन समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों और उचित मंच पर आवाज उठाएंगे। उपस्थित नेताओं ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इन परेशानियों से जूझ रही है, जिसके समाधान के लिए वरिष्ठ नेतृत्व का हस्तक्षेप जरूरी है।
बिजली आपूर्ति की समस्या बनी प्रमुख मुद्दा
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि सारंगपुर और आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बिजली की लगातार कटौती एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
कई इलाकों में दिन में कई बार बिजली गुल होने की स्थिति रहती है, जिससे न केवल घरेलू कार्य प्रभावित होते हैं बल्कि छोटे उद्योग, दुकानें और कृषि कार्य भी बाधित होते हैं। किसानों ने विशेष रूप से सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता व्यक्त की।
प्रतिनिधियों ने कहा कि ट्रांसफार्मर की खराबी, ओवरलोडिंग और समय पर मरम्मत न होने के कारण स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं।
पेयजल संकट से जूझते ग्रामीण और शहरी क्षेत्र
बैठक में पेयजल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में पानी की भारी किल्लत देखी जाती है।
ग्रामीण इलाकों में कई बार लोगों को दूर-दराज़ से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था और जल स्रोतों की उचित देखभाल न होने के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर टैंकर व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि जल आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर स्थायी समाधान निकाला जाए।
सड़क निर्माण और मरम्मत की स्थिति पर चिंता
सड़क व्यवस्था को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण मार्ग और आंतरिक सड़कें लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं, जिनकी समय पर मरम्मत नहीं की गई है।
बरसात के मौसम में इन सड़कों की स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे आवागमन में भारी कठिनाई होती है। कई गांवों में एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी पहुंचने में परेशानी होती है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों में धीमी गति और गुणवत्ता की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि सभी प्रमुख और संपर्क मार्गों की तत्काल मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया जाए।
विकास कार्यों में बाधाओं का मुद्दा
बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि क्षेत्र में चल रहे कई विकास कार्य विभिन्न कारणों से रुके हुए हैं या उनकी गति बहुत धीमी है।
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी और प्रक्रियागत देरी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई योजनाएं स्वीकृत होने के बावजूद धरातल पर समय पर लागू नहीं हो पा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय पर निगरानी और समीक्षा की जाए तो इन समस्याओं को काफी हद तक हल किया जा सकता है।
स्थानीय जनता की लगातार बढ़ती समस्याएं
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से इन समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं किसी भी क्षेत्र के विकास की नींव होती हैं, लेकिन सारंगपुर क्षेत्र में इन तीनों ही क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
दिग्विजय सिंह ने दिया आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याएं वाकई महत्वपूर्ण हैं और इनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मुद्दों को संबंधित विभागीय अधिकारियों और उचित मंचों पर मजबूती से उठाएंगे।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार्य नहीं है और जनता को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना
सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात के बाद संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की जा सकती है और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर समीक्षा बैठक भी आयोजित होने की संभावना है।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में जिन प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया गया है, उन पर क्रमवार कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
यदि इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता है तो आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष: उम्मीदों के साथ आगे की राह
सारंगपुर में हुई यह मुलाकात क्षेत्रीय विकास और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस स्तर पर उठाए गए मुद्दों पर जल्द कार्रवाई होगी और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में सुधार आएगा।
हालांकि, वास्तविक बदलाव प्रशासनिक स्तर पर ठोस निर्णय और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। अब देखना यह होगा कि उठाए गए मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और जनता को कब तक राहत मिल पाती है।
