सागर SDM कोर्ट में रिकॉर्ड व्यवस्था पर गंभीर सवाल: जमीन विवाद की 3 फाइलें गायब, जांच के दस्तावेज भी नहीं मिले
सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में SDM कोर्ट से जुड़े एक मामले ने सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बामनखेड़ी, उदयपुरा और कनेरादेव से जुड़े तीन जमीन विवादों की महत्वपूर्ण फाइलें कथित तौर पर गायब हो गई हैं। हैरानी की बात यह है कि इन फाइलों को तलाशने के लिए शुरू की गई जांच से संबंधित रिकॉर्ड भी SDM कार्यालय से नहीं मिल रहा है।
मामला करीब चार साल पुराना है। संबंधित प्रकरणों में 14 नवंबर 2022 को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन निर्धारित तारीख पर आदेश सामने आने के बजाय तीनों मामलों की मूल फाइलें ही उपलब्ध नहीं मिलीं। इसके बाद संबंधित पक्षों ने अधिकारियों से शिकायत की और रिकॉर्ड तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, अब जांच के दस्तावेजों के भी गायब होने की बात सामने आने से पूरा मामला और गंभीर हो गया है।
14 नवंबर 2022 को होना था फैसला
जानकारी के अनुसार बामनखेड़ी, उदयपुरा और कनेरादेव क्षेत्र से जुड़े जमीन विवाद एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन थे। इन मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद 14 नवंबर 2022 को फैसला सुनाए जाने की स्थिति थी। संबंधित पक्षों को उम्मीद थी कि लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान न्यायालय के आदेश के बाद हो जाएगा।
लेकिन फैसला आने के बजाय फाइलों के गायब होने की जानकारी सामने आई। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण आदेश की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। इसके बाद संबंधित आवेदकों ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी और फाइलों की तलाश शुरू हुई।
तत्कालीन रीडर के जवाब से उठे सवाल
फाइलों के गायब होने की शिकायत के बाद तत्कालीन रीडर कमलेश अहिरवार से भी जवाब मांगा गया था। बताया गया कि उन्होंने अपने लिखित जवाब में कहा था कि आदेश टाइप होने के बाद संबंधित फाइलें तत्कालीन एसडीएम सपना त्रिपाठी के केबिन में रखी गई थीं।
रीडर के मुताबिक, बाद में उनका तबादला हो गया। इसके बाद उन्होंने कई बार संबंधित फाइलों को वापस लेने या उनके बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें फाइलें उपलब्ध नहीं कराई गईं।
यह जवाब सामने आने के बाद सवाल उठने लगा कि आखिर महत्वपूर्ण न्यायिक रिकॉर्ड किसकी निगरानी में था और फाइलें कार्यालय से बाहर गईं या कार्यालय के भीतर ही गायब हुईं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
फाइलें लगातार नहीं मिलने पर संबंधित पक्षों ने अपर कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में मामले की जांच कराने और गायब रिकॉर्ड को तलाशने की मांग की गई।
इसके बाद अपर कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम कार्यालय में फाइलों की तलाश और पूरे मामले की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की गई। उम्मीद थी कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि तीनों फाइलें आखिरी बार किस अधिकारी या कर्मचारी के पास थीं और रिकॉर्ड किस स्तर पर गायब हुआ।
लेकिन इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। जिस जांच के माध्यम से मूल फाइलों का पता लगाया जाना था, उससे संबंधित जांच फाइल भी कथित तौर पर कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।
जांच की फाइल गायब होने से बढ़ी परेशानी
मूल प्रकरणों की तीन फाइलों के बाद जांच संबंधी रिकॉर्ड के भी नहीं मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल और गहरा गए हैं। यदि किसी सरकारी कार्यालय में न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रह पाता है, तो इससे न केवल संबंधित पक्षों को परेशानी होती है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
इस मामले में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जमीन विवाद से जुड़े मामलों में फैसला होने की उम्मीद थी, लेकिन रिकॉर्ड के गायब होने के कारण उन्हें अब तक राहत नहीं मिल सकी है।
चार साल से न्याय का इंतजार
संबंधित पक्षों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मामला 2022 से लंबित है। जिस तारीख को फैसला होना था, उसी समय फाइलों के गायब होने की बात सामने आई। इसके बाद शिकायत, जांच और रिकॉर्ड तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया।
पीड़ित पक्षों का कहना है कि जमीन से जुड़े विवादों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि पक्षकारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ती है।
एफआईआर दर्ज होने पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड गायब होने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीन मूल फाइलों और जांच से संबंधित रिकॉर्ड के गायब होने की बात सामने आई है, लेकिन आपराधिक कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह पता लगाए कि रिकॉर्ड आखिर किस स्तर पर गायब हुआ। साथ ही यह भी तय करना जरूरी होगा कि रिकॉर्ड की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की थी।
रिकॉर्ड की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
SDM कोर्ट में रखी जाने वाली फाइलें सामान्य कार्यालयीन दस्तावेज नहीं होतीं। इनमें जमीन विवाद, पक्षकारों के बयान, दस्तावेज, आदेश और अन्य महत्वपूर्ण न्यायिक रिकॉर्ड शामिल होते हैं। ऐसे रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
सागर के इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन मामलों की फाइलों के गायब होने के बाद उसी मामले की जांच से जुड़ी फाइल का भी उपलब्ध नहीं होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।
अब जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए रिकॉर्ड तलाशे जाएं, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर रिकॉर्ड गायब करने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सबसे अहम बात यह है कि जमीन विवाद से जुड़े पक्षों को जल्द से जल्द न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से राहत मिल सके और वर्षों से लंबित मामलों का समाधान हो।
